केस विवरण: Law Colleges Affiliation & BCI Portal Deadline Case
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस आर.आई. छागला एवं जस्टिस फरहान दुबाश |
| मुख्य पक्षकार | श्री हरि एजुकेशनल ट्रस्ट व अन्य बनाम मुंबई विश्वविद्यालय व अन्य |
| विवादित विषय | संकाय अनुमोदन में देरी पर ₹10 लाख जुर्माना और 50% सीट कटौती |
| तत्काल राहत | 31 जुलाई की बीसीआई डेडलाइन के लिए ‘अंडर प्रोटेस्ट’ फाइन भरकर सशर्त संबद्धता प्राप्त करना |
Law Colleges Affiliation: मुंबई विश्वविद्यालय (University of Mumbai) से संबद्ध गैर-सहायता प्राप्त लॉ कॉलेजों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की 31 जुलाई की आधिकारिक पोर्टल समय-सीमा से ठीक पहले एक बड़ा फैसला लिया है।
जस्टिस आर.आई. छागला (Justice RI Chagla) और जस्टिस फरहान दुबाश (Justice Farhan Dubash) की पीठ मुंबई विश्वविद्यालय की इस दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ ‘महात्मा गांधी मिशन लॉ कॉलेज’, ‘एग्नेल स्कूल ऑफ लॉ’ और ‘गोखले एजुकेशन सोसाइटी’ समेत कई कॉलेजों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।कॉलेजों ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि वे प्रवेश प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए “विरोध के साथ” (Under Protest) विश्वविद्यालय द्वारा लगाया गया ₹10 लाख का जुर्माना और 50% सीटों की कटौती स्वीकार कर दस्तावेज बीसीआई पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
मुख्य विवाद क्या है? (Background of the Dispute)
- अचानक दंडात्मक कार्रवाई: शैक्षिक सत्र 2026-27 के प्रवेश चक्र से ठीक पहले (20 जुलाई 2026 को) मुंबई विश्वविद्यालय ने शिक्षकों और प्राचार्यों की ‘गैर-मंजूरी’ (Non-approval of Faculty) का हवाला देते हुए कॉलेजों पर प्रति संस्थान ₹10 लाख का जुर्माना और संस्वीकृत सीटों में 50% की कटौती लागू कर दी।
- बीसीआई पोर्टल की 31 जुलाई की डेडलाइन: बीसीआई ने संबद्धता आवेदनों को अपलोड करने के लिए 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा तय की है। इसके बाद बिना संबद्धता रिपोर्ट के कॉलेजों में 2026-27 सत्र के लिए दाखिले जोखिम में पड़ जाते।
अदालत में दोनों पक्षों के तर्क (Arguments in Court)
| पक्ष | मुख्य तर्क / पक्ष |
| लॉ कॉलेजों के वकील | • सभी शिक्षक/प्राचार्य बीसीआई के Legal Education Rules के तहत पूरी तरह योग्य हैं। • विश्वविद्यालय ने देरी अपनी सुस्त प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण की और दोष कॉलेजों पर मढ़ दिया। • बीसीआई के नियम बार के अनुभवी वकीलों और सेवानिवृत्त जजों को पढ़ाने की अनुमति देते हैं, जो यूजीसी नियमों से अधिक प्रासंगिक हैं। |
| मुंबई विश्वविद्यालय के वकील | • कॉलेजों ने संबद्धता के समय शपथ पत्र दिया था कि वे निर्धारित योग्यता वाले शिक्षक ही नियुक्त करेंगे। • कई सालों से ऑल-इंडिया विज्ञापन नहीं निकाले गए और न ही सही चयन समितियां गठित की गईं। • कॉलेज शिक्षकों को कम समेकित वेतन देकर शिक्षा की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रहे हैं। |
बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख और अंतरिम व्यवस्था
- विश्वविद्यालय की खिंचाई: पीठ ने सवाल उठाया कि जब कॉलेजों ने दिसंबर 2025 में संबद्धता निरंतरा की मांग की थी, तो विश्वविद्यालय ने बीसीआई की 31 जुलाई की डेडलाइन से महज कुछ दिन पहले (20 जुलाई) यह दंडात्मक आदेश क्यों जारी किया?
- ‘अंडर प्रोटेस्ट’ भुगतान की अनुमति: कोर्ट ने कॉलेजों के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि वे बीसीआई पोर्टल पर 31 जुलाई की अंतिम तिथि तक आवेदन दर्ज करने के लिए विरोध के साथ जुर्माना राशि जमा करेंगे और अस्थायी रूप से 50% सीट कटौती स्वीकार करेंगे ताकि विश्वविद्यालय तुरंत अंतरिम संबद्धता (Conditional Affiliation) जारी कर सके।
- अगले सप्ताह होगी मुख्य वैधता पर सुनवाई: हाई कोर्ट अगले सप्ताह इस बात पर गहराई से सुनवाई करेगा कि क्या विश्वविद्यालय द्वारा ₹10 लाख का जुर्माना और 50% सीटों की कटौती कानूनन वैध है या नहीं।

