Legal Twist: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक असाधारण मामले में अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) के आदेश पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट जस्टिस कीर्ति सिंह ने पति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लुधियाना की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को स्थगित (Stay) कर दिया है, जिसमें पति को ₹5,000 मासिक देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने माना कि यदि पत्नी पर पति की हत्या के प्रयास का गंभीर आपराधिक मामला चल रहा है, तो ऐसी स्थिति में भरण-पोषण का आदेश न्यायिक समीक्षा का विषय है।
रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना (The Gruesome Allegation)
- पति के वकील ने अदालत को उस रात की खौफनाक कहानी बताई।
- तारीख: 13 और 14 मई की दरमियानी रात।
- आरोप: जब पति बिस्तर पर सोने ही वाला था, पत्नी ने कथित तौर पर उस पर ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल दिया और आग लगा दी।
- चोटें: इस हमले में पति 45 प्रतिशत तक झुलस गया और उसे चार महीने से अधिक समय तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
आरोपी पत्नी का ‘फरार’ होना और कानूनी दांवपेच
- अदालत को बताया गया कि पत्नी का आचरण कानून के प्रति सम्मानजनक नहीं रहा है।
- अग्रिम जमानत खारिज: हत्या के प्रयास (धारा 307 IPC/अब BNSS) के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
- फरार: आरोपी महिला करीब एक साल तक पुलिस की पकड़ से बाहर (Absconding) रही।
- रणनीति: पति के वकील ने तर्क दिया कि हत्या के प्रयास के ट्रायल में देरी करने के लिए पत्नी ने धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण का यह केस दायर किया था।
हाई कोर्ट का फैसला: न्याय का संतुलन
- आमतौर पर, अदालतों का रुख पत्नियों को मेंटेनेंस दिलाने के प्रति उदार होता है, लेकिन इस मामले के तथ्यों ने कोर्ट को हस्तक्षेप करने पर मजबूर किया।
- आदेश पर रोक: कोर्ट ने 25 अगस्त, 2025 के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें पति को पैसे देने को कहा गया था।
- नोटिस जारी: अदालत ने पत्नी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 25 मई, 2026 को तय की गई है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| अदालत | पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट। |
| विवाद | हत्या के प्रयास की आरोपी पत्नी द्वारा मेंटेनेंस की मांग। |
| निचली अदालत का आदेश | ₹5,000 प्रति माह देने का निर्देश (अब स्टे)। |
| पति की स्थिति | 45% झुलसा हुआ, लंबी बीमारी के बाद रिकवरी। |
| कानूनी धारा | धारा 125 CrPC (अब BNSS की संबंधित धारा)। |
अधिकारों का दुरुपयोग नहीं?
यह मामला कानून के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है: क्या कोई व्यक्ति उस व्यक्ति से वित्तीय सहायता (Maintenance) मांग सकता है जिसकी जान लेने का उस पर आरोप है? पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का यह ‘स्टे ऑर्डर’ संकेत देता है कि भरण-पोषण का अधिकार ‘पूर्ण’ (Absolute) नहीं है और इसे आपराधिक आचरण और नैतिकता की कसौटी पर परखा जा सकता है।

