Tuesday, August 18, 2026
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LLB Exam: लॉ यूनिवर्सिटी ने छात्रों को पूरक परीक्षा में बैठने से रोका…फिर यह आदेश कानूनी छात्र को राहत प्रदान की, पढ़ें पूरी खबर

LLB Exam: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के छात्र को पूरक परीक्षाओं (Supplementary Exams) में बैठने से रोकने वाले आदेश को रद्द कर दिया।

BA LLB छात्र से जुड़ा है मामला

दरअसल, डॉ. अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों का हवाला देकर पूरक परीक्षा को लेकर आदेश निकाला था। हाईकोर्ट जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने 12 मई, 2026 को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य को अचानक लागू किए गए नियमों की वेदी पर नहीं चढ़ाया जा सकता। यह मामला एक BA LLB छात्र से जुड़ा है, जिसने 2017 से 2022 के दौरान अपनी पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन उसके चार पेपर अभी भी बाकी थे। जब उसने पूरक परीक्षा के लिए आवेदन करना चाहा, तो विश्वविद्यालय ने उसे अयोग्य घोषित कर दिया।

विवाद का मुख्य कारण: UGC गाइडलाइन्स का अचानक क्रियान्वयन

  • नियम क्या था? UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार, छात्र अपनी नियमित पढ़ाई पूरी होने के केवल दो साल बाद तक ही पूरक परीक्षा दे सकते हैं।
  • विश्वविद्यालय का रुख: यूनिवर्सिटी ने 22 अप्रैल, 2026 को एक निर्देश जारी किया कि 2018-19 से पहले प्रवेश लेने वाले छात्र अब परीक्षा नहीं दे पाएंगे।
  • छात्र का तर्क: जब उसने 2017 में प्रवेश लिया था, तब ऐसी कोई समय सीमा या प्रयासों की संख्या (Number of attempts) का उल्लेख नहीं था। अचानक परीक्षा से ठीक पहले ऐसा नियम लागू करना अपूरणीय क्षति के समान है।

मद्रास हाई कोर्ट के प्रमुख अवलोकन

  • अदालत ने छात्र की दलीलों को वाजिब मानते हुए विश्वविद्यालय को फटकार लगाई।
  • समानता का अधिकार: कोर्ट ने पाया कि 29 अप्रैल को इसी तरह के अन्य मामलों में छात्रों को राहत दी गई थी, इसलिए इस छात्र को भी परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • पोर्टल खोलने का आदेश: जस्टिस गौरी ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वे तुरंत अपना ऑनलाइन पोर्टल खोलें ताकि छात्र अपनी परीक्षा फीस जमा कर सके।
  • परीक्षा अनुसूची: छात्र को 13 मई, 2026 से 5 जून, 2026 तक होने वाली परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी गई है।

विकलांग छात्रों के अधिकारों पर एक और फैसला

  • इसी दौरान मद्रास उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश, जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने विकलांग छात्रों के कल्याण को लेकर एक ऐतिहासिक टिप्पणी की।
  • शुल्क माफी (Fee Waiver): 40% विकलांगता वाले छात्र को फीस में छूट दी जाए, भले ही उसने ‘दिव्यांग कोटे’ के तहत प्रवेश न लिया हो।
  • कोटा बनाम कल्याण: कोर्ट ने कहा कि विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए ‘आरक्षण’ और ‘कल्याणकारी उपाय’ (जैसे फीस माफी) दोनों की आवश्यकता होती है। इन्हें आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निर्देश / टिप्पणी
याचिकाकर्ताBA LLB छात्र (चार पेपर पेंडिंग)।
यूनिवर्सिटी का तर्कUGC नियमों के तहत दो साल से अधिक समय बीत जाने पर परीक्षा नहीं दे सकते।
हाई कोर्ट का आदेशपोर्टल खोलें और छात्र को 13 मई से होने वाली परीक्षा में बैठने दें।
सिद्धांतपाठ्यक्रम की शुरुआत में जो नियम थे, वही छात्र पर लागू होंगे।

छात्रों के लिए बड़ी राहत

मद्रास उच्च न्यायालय के ये दोनों फैसले शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के अधिकारों को मजबूती प्रदान करते हैं। अदालत ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक नियम या UGC की गाइडलाइन्स छात्रों के करियर को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित करने के लिए होनी चाहिए। विशेष रूप से, जब किसी छात्र ने अपना कीमती समय किसी कोर्स में लगाया हो, तो उसे डिग्री पूरी करने का उचित अवसर मिलना ही चाहिए।

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