Thursday, July 2, 2026
HomeHigh CourtBhojshala-Kamal Maula Mosque: देवी वाग्देवी सरस्वती का यह मंदिर है…मुस्लिम समुदाय के...

Bhojshala-Kamal Maula Mosque: देवी वाग्देवी सरस्वती का यह मंदिर है…मुस्लिम समुदाय के नमाज को अलग जमीन दें, यहां फैसला पढ़ें

Bhojshala-Kamal Maula Mosque: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने धार जिले के विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

यह रही अदालत की टिप्पणी

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा, हमने स्थल पर हिंदू पूजा की निरंतरता को देखा है, हालांकि इसे समय के साथ नियंत्रित किया गया है…हम यह पाते हैं कि इस स्थान का ऐतिहासिक साहित्य राजा भोज से संबंधित संस्कृत अध्ययन का केंद्र होने की पुष्टि करता है…यह धार में देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर के अस्तित्व को दर्शाता है…इसलिए, इस क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप भोजशाला माना जाता है जिसमें देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर है।

एएसआई (ASI) के 7 अप्रैल, 2003 के उस आदेश को रद्द किया

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस स्थल का धार्मिक स्वरूप मूल रूप से ‘भोजशाला’ है, जिसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में पहचाना गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक साहित्य और स्थापत्य साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि यह परिसर परमार वंश के राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। जस्टिस की पीठ ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एएसआई (ASI) के 7 अप्रैल, 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसने हिंदुओं की पूजा को प्रतिबंधित किया था और शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी थी।

कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

  • धार्मिक स्वरूप: कोर्ट ने माना कि यह स्थल माता सरस्वती का मंदिर है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, राजा भोज के काल में यहाँ संस्कृत विद्यालय और मंदिर स्थित था।
  • ASI का नियंत्रण: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) 1958 के अधिनियम के तहत स्मारक के समग्र प्रबंधन और संरक्षण पर अपना नियंत्रण जारी रखेगा।
  • सरस्वती प्रतिमा की वापसी: लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में रखी देवी सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में पहले से दी गई प्रस्तुतियों (Representations) पर विचार कर सकती है।

मुस्लिम समुदाय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

  • अदालत ने दोनों पक्षों के बीच “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया।
  • भूमि आवंटन: यदि मुस्लिम समुदाय या उनका कोई आधिकारिक निकाय आवेदन करता है, तो राज्य सरकार मस्जिद के निर्माण के लिए धार जिले के भीतर किसी उपयुक्त स्थान पर भूमि आवंटित करने पर विचार कर सकती है।
  • इसमें नमाज की सुविधा और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त जगह शामिल हो सकती है।

ऐतिहासिक विवाद और दलीलें

  • हिंदू पक्ष: दलील दी गई कि वर्तमान संरचना में एक पूर्व-मौजूद हिंदू धार्मिक स्थल के पुरातात्विक और शिलालेख-आधारित प्रमाण मौजूद हैं।
  • मुस्लिम पक्ष: तर्क दिया गया कि खिलजी काल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड किसी मंदिर को नष्ट करने का उल्लेख नहीं करते और 1935 के रियासतकालीन आदेश (Alaan) के तहत उन्हें नमाज का हक है।
  • जैन पक्ष: जैन समुदाय ने भी दावा किया था कि ब्रिटिश संग्रहालय की मूर्ति वास्तव में जैन देवी अंबिका की है और इसकी वास्तुकला माउंट आबू के मंदिरों जैसी है।
  • सरकार का रुख: सरकारी वकील ने 1935 के आदेश को अवैध बताया क्योंकि यह स्थल 1904 के अधिनियम के तहत पहले से ही संरक्षित घोषित था।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का फैसला / निर्देश
स्थल का स्वरूपभोजशाला को वाग्देवी सरस्वती का मंदिर माना गया।
2003 का आदेशरद्द किया गया (जो नमाज और पूजा के लिए दिन तय करता था)।
प्रबंधनASI ही स्मारक का संरक्षक और प्रबंधक रहेगा।
वैकल्पिक मस्जिदसरकार धार में मस्जिद के लिए अलग भूमि देने पर विचार करे।

कानूनी और ऐतिहासिक न्याय

हाई कोर्ट का यह फैसला वैज्ञानिक सर्वेक्षण और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। अदालत ने जहाँ एक ओर ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर मंदिर के अस्तित्व को मान्यता दी है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए मुस्लिम समुदाय को अलग स्थान पर मस्जिद के लिए जमीन देने का विकल्प भी सुझाया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
35.5 ° C
35.5 °
35.5 °
43 %
4.4kmh
67 %
Thu
35 °
Fri
38 °
Sat
40 °
Sun
40 °
Mon
40 °

Recent Comments