Contempt Case: सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट संजय दुबे को उनकी बार-बार की जाने वाली याचिकाओं के लिए कड़ी फटकार लगाई।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| विवरण | कोर्ट का रुख |
| सीनियर एडवोकेट स्टेटस | यह एक सम्मान (Conferred) है, अधिकार नहीं जिसे मांगा जाए। |
| याचिकाकर्ता का आचरण | बार-बार ‘फालतू’ याचिकाएं दायर करने को अनुशासनहीनता माना गया। |
| सोशल मीडिया व्यवहार | जजों और सिस्टम पर सोशल मीडिया के जरिए हमले को ‘परजीवी’ कृत्य बताया गया। |
| डिग्री विवाद | दिल्ली के कई वकीलों की LLB डिग्री की प्रामाणिकता पर CBI जांच की संभावना। |
वकील के आचरण पर गंभीर टिप्पणी की
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा एक सम्मान है जिसे अदालत द्वारा प्रदान किया जाता है, न कि इसके लिए पीछे पड़ा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के खिलाफ बार-बार याचिकाएं और अवमानना (Contempt) मामले दायर करने वाले वकील को चेतावनी दी कि उनका आचरण उन्हें इस पद के लिए अयोग्य बनाता है। यह मामला कानूनी बिरादरी के लिए एक कड़ा संदेश है कि व्यावसायिक आचरण (Professional Conduct) और अदालती गरिमा का पालन करना किसी भी पद या सम्मान को पाने की पहली शर्त है।
कोर्ट की कड़ी फटकार: हम पदनाम रद्द कर देंगे
- जब वकील ने कहा कि वह तीसरी बार अदालत के पास आया है, तो चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बागची की पीठ ने गहरी नाराजगी जताई:
- CJI सूर्यकांत: “हो सकता है पूरी दुनिया सीनियर पदनाम के लिए पात्र हो, लेकिन आप तो कम से कम नहीं हैं। अगर हाई कोर्ट आपको सीनियर बनाता भी है, तो आपके व्यावसायिक आचरण को देखते हुए हम उसे रद्द कर देंगे।”
- जस्टिस बागची: उन्होंने वकील से पूछा कि क्या उनके पास अपनी वरिष्ठता सुनिश्चित करने के अलावा कोई और काम नहीं है? उन्होंने कहा, “सीनियर एडवोकेट का दर्जा मान्यता का विषय है, पीछा करने का नहीं।”
परजीवी’ और ‘कॉकरोच’: न्यायपालिका पर हमले पर गुस्सा
- CJI ने समाज के उन तत्वों पर कड़ा प्रहार किया जो सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका को निशाना बनाते हैं।
- कठोर शब्द: CJI ने सिस्टम पर हमला करने वालों को “समाज के परजीवी” (Parasites) कहा।
- सोशल मीडिया एक्टिविस्ट: उन्होंने कहा कि कुछ युवा जिन्हें रोजगार नहीं मिलता, वे सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करने लगते हैं। उन्होंने इन लोगों की तुलना “कॉकरोच” से की और वकीलों को सलाह दी कि वे इनके साथ हाथ न मिलाएं।
LLB डिग्री की CBI जांच की चेतावनी
- CJI ने एक बार फिर दोहराया कि वे दिल्ली के कई वकीलों की कानून की डिग्री की प्रामाणिकता पर संदेह करते हैं।
- निगरानी: “वे फेसबुक और यूट्यूब पर जो पोस्ट कर रहे हैं, क्या उन्हें लगता है कि हम देख नहीं रहे हैं? मुझे उनकी डिग्री की असलियत पर गंभीर संदेह है।”
- CBI जांच: उन्होंने कहा कि वह एक उपयुक्त मामले का इंतजार कर रहे हैं ताकि इन वकीलों की डिग्री की CBI जांच का आदेश दिया जा सके।
कार्यवाही का नतीजा
शुरुआत में, CJI ने एक आदेश लिखवाया जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता किसी भी सीनियर पदनाम के योग्य नहीं है। हालांकि, वकील द्वारा बार-बार माफी मांगने और यह कहने के बाद कि वह पेशे के प्रति गंभीर है, पीठ ने उस आदेश को वापस ले लिया। अंततः, वकील ने अपनी अर्जी वापस ले ली और मामला खारिज कर दिया गया।

