Saturday, August 29, 2026
HomeLaworder HindiMisuse of powers-I: CJI सूर्य कांत; राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश...

Misuse of powers-I: CJI सूर्य कांत; राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ हो रही जांच, मीडिया में तय नहीं हो सकते आरोप

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • उचित स्तर पर जांच: CJI सूर्यकांत ने बताया कि जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उठाए गए मुद्दों को उचित स्तर पर परखा जा रहा है। ट्रांसफर, पद पर बने रहने या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला सक्षम प्राधिकारी (Competency Authority) द्वारा ही लिया जाएगा।
  • प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत (Opportunity of Hearing): CJI ने स्पष्ट किया कि जस्टिस शर्मा का पक्ष सुने बिना और मामले की पूरी जांच किए बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
  • मीडिया दावे बनाम न्यायिक प्रक्रिया: मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि “सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों का फैसला मीडिया में चल रहे दावों के आधार पर करने की अनुमति नहीं दे सकता।” सार्वजनिक मंचों पर ऐसे मामलों का निर्णय नहीं हो सकता।
  • नियमित मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी: CJI ने जानकारी दी कि कॉलेजियम देश के उच्च न्यायालयों में नियमित मुख्य न्यायाधीशों (Regular Chief Justices) की नियुक्ति प्रक्रिया पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि कार्यवाहक CJ संजीव प्रकाश शर्मा 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

नई दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा लिखे गए शिकायती पत्रों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जस्टिस मेहता द्वारा उठाई गई चिंताओं का संज्ञान ले लिया है और मामले की जांच “उचित स्तर” पर की जा रही है।

हालांकि, सीजेआई ने जोर देकर कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ आरोपों का निपटारा केवल स्थापित संस्थागत तंत्र (Institutional Mechanism) के जरिए ही हो सकता है, मीडिया या सार्वजनिक बहस के माध्यम से नहीं।

सीजेआई सूर्य कांत की मुख्य बातें

  • संस्थागत प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर: सीजेआई ने कहा कि पत्रों की सामग्री पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं सुनाया जा सकता। जस्टिस शर्मा को अपना पक्ष रखने (Opportunity of Hearing) का पूरा मौका दिए बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
  • मीडिया रिपोर्ट निष्कर्ष नहीं: मीडिया में सामने आए जस्टिस मेहता के आरोपों को अपने आप में जस्टिस शर्मा के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
  • सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर बने रहने, तबादले या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला सक्षम प्राधिकारी द्वारा जस्टिस मेहता द्वारा पेश सामग्री और जस्टिस शर्मा के जवाब पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
  • मीडिया ट्रायल पर रोक: सीजेआई ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों को मीडिया में चलने वाले दावों-प्रतिदावों के आधार पर तय करने की अनुमति नहीं दे सकता।

नियमित मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कोलेजियम कर रहा काम

सीजेआई ने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम विभिन्न उच्च न्यायालयों में नियमित मुख्य न्यायाधीशों (Regular Chief Justices) की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस एस.पी. शर्मा 26 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

Also Read; Misuse of powers: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को जस्टिस संदीप मेहता तुरंत हटाने की मांग क्यों कर रहे हैं? पत्र में हो रहा खुलासा

विवाद की पृष्ठभूमि

  • जस्टिस संदीप मेहता के पत्र: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता (जिनका मूल कैडर राजस्थान हाईकोर्ट है) ने 2 अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त 2026 को CJI को पत्रों की एक श्रृंखला लिखी थी।
  • गंभीर आरोप: पत्रों में हाईकोर्ट के साथी जजों और अन्य स्रोतों से मिले इनपुट के आधार पर जस्टिस शर्मा पर “घोर कुप्रशासन” (Gross Maladministration), “गंभीर रूप से संदेहास्पद गतिविधियों” और साथी जजों को धमकाने के आरोप लगाए गए थे तथा उन्हें तुरंत हटाकर नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया गया था।
  • सार्वजनिक खुलासा: इन आंतरिक गोपनीय पत्रों की सामग्री मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सार्वजनिक हो गई, जिसके बाद सीजेआई को यह आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

CJI सूर्यकांत का मुख्य बयान

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा: “मामले से संबंधित सामग्री और जस्टिस शर्मा के जवाब पर विचार करने के बाद ही कोई प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट किसी न्यायाधीश के खिलाफ व्यक्तिगत शिकायतों को मीडिया की बहस के जरिए तय करने की इजाजत नहीं दे सकता। संस्थागत मर्यादा और निष्पक्ष जांच ही सर्वोपरि है।”

Misuse of powers-I: एट ए ग्लान्स (At a Glance of CJI’s Response)

विवरणजानकारी
मामलाराजस्थान HC के कार्यवाहक CJ संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ शिकायतें
शिकायतकर्तान्यायमूर्ति संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta, सुप्रीम कोर्ट)
प्रतिक्रिया देने वालेभारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant)
मुख्य संदेशमीडिया ट्रायल से फैसला नहीं होगा; स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन होगा।
वर्तमान स्थितिसक्षम स्तर पर सामग्री और पक्षों के रुख का परीक्षण जारी।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
33 ° C
33 °
33 °
70 %
0kmh
93 %
Sat
36 °
Sun
36 °
Mon
33 °
Tue
32 °
Wed
30 °

Recent Comments