Monday, September 7, 2026
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NCW Child Marriage Advisory: बाल विवाह पर लगाएं रोक वरना…सिर्फ माता-पिता ही नहीं, पंडित और टेंट वाले पर भी होगी FIR

NCW Child Marriage Advisory: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने अक्षय तृतीया के अवसर पर देश के कुछ हिस्सों में होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए एक राष्ट्रव्यापी एडवाइजरी जारी की है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) के बावजूद कई क्षेत्रों में यह प्रथा जारी है। अक्षय तृतीया के दौरान पारंपरिक मान्यताओं और सामूहिक विवाहों के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है, जिसे रोकने के लिए आयोग ने कमर कस ली है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कौन-कौन आएगा कानून की गिरफ्त में?

आयोग ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक संज्ञेय (Cognisable) और गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है। कानूनी कार्रवाई केवल माता-पिता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति को आरोपी बनाया जाएगा। इसमें दूल्हा (यदि वह वयस्क है), माता-पिता और अभिभावक, पंडित/काजी (विवाह संपन्न कराने वाले),
इवेंट ऑर्गनाइजर और टेंट वाले, वेन्यू प्रोवाइडर (मैरिज हॉल या समुदाय भवन के मालिक)।

सजा और जुर्माना (Penalties)

कानून के उल्लंघन पर दोषियों को निम्नलिखित सजा हो सकती है। इसमें 2 साल तक का कठोर कारावास, 1 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड।

प्रशासन के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देश

  • NCW ने जिला स्तर पर अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है।
  • जिला मजिस्ट्रेट (DM) और SP: उन्हें हाई अलर्ट पर रहने और संदिग्ध मामलों का पता चलते ही तुरंत FIR दर्ज करने को कहा गया है।
  • आयु सत्यापन (Age Verification): सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि कोई भी नाबालिग शादी के बंधन में न बंधे।
  • हेल्पलाइन: 1098 (Childline) और 112 (Emergency) को सक्रिय करने और कंट्रोल रूम के माध्यम से त्वरित हस्तक्षेप (Intervention) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

एडवाइजरी के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मुख्य चिंतालड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण पर खतरा।
विशेष अवसरअक्षय तृतीया के दौरान होने वाले सामूहिक विवाहों पर नजर।
गोपनीयतासंदिग्ध मामलों की सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
जागरूकतासंवेदनशील जिलों में स्थानीय निकायों और NGOs के साथ मिलकर अभियान चलाना।

सुरक्षा और अधिकार सर्वोपरि

राष्ट्रीय महिला आयोग का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि बच्चों, विशेषकर छोटी लड़कियों के अधिकारों और गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आयोग ने राज्य महिला आयोगों से भी ‘विजिलेंट मॉनिटर्स’ के रूप में कार्य करने का आग्रह किया है। सामूहिक सामाजिक प्रयासों और सख्त कानून के मेल से ही इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

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