NDPS Act Ruling: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने NDPS एक्ट (नशीली दवाएं और साइकोट्रोपिक पदार्थ अधिनियम) के तहत एक महत्वपूर्ण कानूनी बारीकी को स्पष्ट किया है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने नशीली कफ सिरप बेचने के आरोपी चार लोगों (एक महिला सहित) की 15 साल की सजा को बरकरार रखते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि किसी महिला के पर्स, बैग या थैले की तलाशी को धारा 50 के तहत “व्यक्तिगत तलाशी” (Personal Search) नहीं माना जा सकता।
धारा 50 बनाम पर्स की तलाशी (Section 50 Explained)
- NDPS एक्ट की धारा 50 आरोपी को यह अधिकार देती है कि उसकी व्यक्तिगत तलाशी किसी राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) या मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ली जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि महिला के पर्स की तलाशी लेते समय इस नियम का पालन नहीं हुआ।
- कोर्ट का स्पष्टीकरण: “पर्स या बैग आरोपी के शरीर का हिस्सा नहीं है। इसे शरीर से अलग किया जा सकता है। चूंकि तलाशी में शरीर को छुआ नहीं गया, इसलिए यह ‘पर्सनल सर्च’ के दायरे में नहीं आता।”
- सुप्रीम कोर्ट का हवाला: बेंच ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि बैग, ब्रीफकेस या कंटेनर ‘स्वतंत्र वस्तुएं’ हैं। इन्हें केवल इसलिए “व्यक्ति” (Person) नहीं माना जा सकता क्योंकि कोई उन्हें पकड़े हुए है।
सार्वजनिक स्थान और धारा 43 (Public Place Recovery)
- धारा 43: क्योंकि यह बरामदगी एक सार्वजनिक स्थान (बिलासपुर के शोभा विहार में एक सांस्कृतिक मंच के पास) से हुई थी, इसलिए यहाँ धारा 43 लागू होती है।
- नतीजा: सार्वजनिक स्थान पर तलाशी के दौरान धारा 42 (जो निजी स्थानों के लिए है) की कठिन प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य नहीं था।
मामला और सजा (The Case Details)
- घटना: 13 सितंबर, 2023 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर दबिश दी और आरोपियों से 175 बोतल नशीली कफ सिरप (कोडीन युक्त) बरामद की।
- निचली अदालत का फैसला: जनवरी 2025 में स्पेशल जज (NDPS) ने आरोपियों को 15 साल के कठोर कारावास और 1.5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
- हाई कोर्ट का निष्कर्ष: कोर्ट ने पाया कि कफ सिरप की मात्रा ‘कमर्शियल क्वांटिटी’ थी और पुलिस ने बरामदगी के बाद सुरक्षित अभिरक्षा (Safe Custody) के नियमों का पालन किया था।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| विषय | अदालत का निर्णय |
| वस्तु | महिला का पर्स और बोरे (Bags/Sacks)। |
| कानूनी दर्जा | इसे “पर्सनल सर्च” नहीं माना गया। |
| धारा 50 का उल्लंघन | कोर्ट ने कहा कि नियम के उल्लंघन का दावा “गलत और निराधार” है। |
| देरी का तर्क | सैंपल्स को लैब भेजने में हुई देरी से केस पर असर नहीं पड़ता, यदि कस्टडी सुरक्षित साबित हो। |
| नतीजा | अपील खारिज; आरोपियों को पूरी सजा काटनी होगी। |
निष्कर्ष: गरिमा बनाम कानूनी प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 50 का उद्देश्य व्यक्ति की गरिमा और निजता (Dignity and Privacy) की रक्षा करना है जब उसके ‘शरीर’ की तलाशी ली जा रही हो। सामान या बैग की तलाशी एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें शरीर की गरिमा का उल्लंघन नहीं होता, इसलिए इसके लिए धारा 50 की सख्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा का लाभ नहीं लिया जा सकता।
HIGH COURT OF CHHATTISGARH AT BILASPUR
Hon’ble Shri Ramesh Sinha, Chief Justice
Hon’ble Shri Ravindra Kumar Agrawal , Judge
CRA No. 559 of 2025
Smt. Sneha Goyal W/o Ram Goyal,
Versus
State of Chhattisgarh Through The Station House Officer, Police Station – Torwa, District – Bilaspur Chhattisgarh
CRA No. 460 of 2025
Pushpendra Nirmalkar S/o Omprakash Nirmalkar, Amar Jangde S/o Santosh Jangde
Versus State of Chhattisgarh Through- Station House Officer, Police Station, Torva, District- Bilaspur (C.G.)
CRA No. 829 of 2025
Deva Rajak S/o Dharamlal Rajak
Versus
State of Chhattisgarh Through – Police Station Torva, District Bilaspur(C.G.)
(In CRA No.559/2025)

