Monday, August 24, 2026
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IPC Section 294: गाली देना अश्लीलता नहीं…बास्टर्ड जैसे शब्द आधुनिक दौर की बोलचाल का हिस्सा, यह रही सुप्रीम टिप्प्णी

IPC Section 294: सुप्रीम कोर्ट ने अश्लीलता (Obscenity) और अपशब्दों (Abusive Language) के बीच एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी अंतर स्पष्ट किया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दो आरोपियों की दोषसिद्धि (Conviction) को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि पारिवारिक संपत्ति विवाद के दौरान “बास्टर्ड” (Bastard) शब्द का इस्तेमाल करना अश्लीलता नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि केवल गाली-गलौज या ‘वल्गर’ भाषा का इस्तेमाल करना तब तक अश्लीलता के दायरे में नहीं आता, जब तक कि उसमें कोई यौन तत्व (Sexual Element) या कामुक विचार उत्तेजित करने वाली बात न हो।

अश्लीलता की नई परिभाषा (What defines Obscenity?)

  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईपीसी (अब भारतीय न्याय संहिता) में ‘अश्लील’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन इसके लिए कुछ मानक तय हैं।
  • यौन तत्व अनिवार्य: अश्लीलता का संबंध उस सामग्री या भाषा से है जो किसी व्यक्ति में यौन या कामुक विचार (Sexual and Lustful thoughts) पैदा करे।
  • गाली बनाम अश्लीलता: केवल अभद्र भाषा, अपशब्द या ‘प्रोफेनिटी’ (Profanities) का उपयोग करना, चाहे वह सुनने में कितना भी बुरा या असभ्य क्यों न लगे, कानूनी रूप से ‘अश्लील’ नहीं माना जा सकता।

बास्टर्ड शब्द पर कोर्ट की टिप्पणी

  • अदालत ने आधुनिक सामाजिक परिवेश का हवाला दिया।
  • आम बोलचाल: “केवल ‘बास्टर्ड’ शब्द का उपयोग किसी व्यक्ति की कामुक रुचि जगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। खास तौर पर तब, जब आधुनिक युग में गरमागरम बहस के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल आम हो गया है।”
  • अवैध सजा: कोर्ट ने माना कि आरोपियों को धारा 294(b) के तहत सजा देना कानूनन सही नहीं है क्योंकि उनके शब्दों में कोई यौन भावना शामिल नहीं थी।

अपूर्वा अरोड़ा केस का संदर्भ (Precedent from Apoorva Arora Case)

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के अपूर्वा अरोड़ा बनाम राज्य मामले के फैसले को दोहराया।
  • असभ्यता अश्लीलता नहीं: कोई व्यक्ति अपशब्दों से भरी भाषा को अरुचिकर (Distasteful), अप्रिय (Unpalatable), या अनुचित (Improper) मान सकता है, लेकिन यह उसे “अश्लील” बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • कानूनी मानक: Distasteful

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

विषयअदालत का निष्कर्ष
धारा 294(b) IPCयह धारा सार्वजनिक रूप से अश्लील गाने या शब्द बोलने पर सजा देती है।
अपशब्द (Abuse)गाली देना ‘असभ्यता’ हो सकती है, लेकिन ‘अश्लीलता’ नहीं।
पारिवारिक विवादगुस्से में बोले गए शब्द आमतौर पर अश्लीलता के दायरे से बाहर होते हैं।
नतीजाआरोपियों की सजा रद्द, वे अब इस आरोप से मुक्त हैं।

निष्कर्ष: अभिव्यक्ति और मर्यादा का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन हजारों मामलों में एक ‘नजीर’ बनेगा जहाँ आपसी झगड़ों में दी गई गालियों को ‘अश्लीलता’ बताकर पुलिस केस दर्ज कर लिया जाता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून को ‘असभ्यता’ और ‘अपराध’ के बीच के फर्क को समझना चाहिए।

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