Sunday, August 23, 2026
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Judicial Infrastructure Crisis: 3 महीने में एक पत्ता तक नहीं हिला…हिमाचल सरकार सुस्त हो चुकी है, यह रही अदालत की टिप्पणी

Judicial Infrastructure Crisis: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की न्यायिक बुनियादी संरचना (Judicial Infrastructure) में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की ‘सुस्ती’ पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अदालतों के निर्माण और पदों को भरने के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। अदालत ने सरकार के आश्वासनों को “खोखले वादे” करार देते हुए कहा कि राज्य मशीनरी अदालती आदेशों को लागू करने में पूरी तरह विफल रही है।

“खोखले वादे और टालमटोल” (Hollow Promises)

  • हाई कोर्ट एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य में पर्याप्त न्यायिक ढांचे की कमी का मुद्दा उठाया गया था।
  • कोर्ट की फटकार: बेंच ने नोट किया कि 34 नई अदालतें बनाने और न्यायिक पदों के सृजन के आदेश दिए गए थे, लेकिन पिछले तीन महीनों में “एक पत्ता भी नहीं हिला” है।
  • अजीब प्रस्ताव: कोर्ट इस बात पर भी हैरान था कि सरकार उन सब-डिविजनों में अदालतें बनाने का प्रस्ताव दे रही है जहाँ कोई मांग ही नहीं है, जबकि मुख्य प्रस्ताव कैबिनेट में लंबित पड़े हैं।

नशे के खिलाफ जंग और ‘स्पेशल कोर्ट’ का अभाव

  • अदालत ने राज्य के ‘नशा मुक्त हिमाचल’ के दावों और हकीकत के बीच के अंतर को उजागर किया।
  • NDPS मामलों की पेंडेंसी: कोर्ट ने चिंता जताई कि केंद्र सरकार बार-बार ‘स्पेशल कोर्ट’ बनाने का आग्रह कर रही है, लेकिन राज्य सरकार बुनियादी ढांचा देने में विफल रही है।
  • हकीकत: “बिना आवश्यक बुनियादी ढांचे के विशेष अदालतें नहीं बनाई जा सकतीं… राज्य अपेक्षाओं पर खरा उतरने में विफल रहा है,” बेंच ने टिप्पणी की।

बजट पर मांगा जवाब (Budgetary Allocation)

  • कोर्ट ने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं।
  • वित्त सचिव को निर्देश: वित्त सचिव (प्रिंसिपल सेक्रेटरी) को निर्देश दिया गया है कि वे न्यायपालिका के लिए बजटीय आवंटन का पूरा विवरण रिकॉर्ड पर रखें।
  • तुलना: कोर्ट यह देखना चाहता है कि पिछले वर्ष की तुलना में बजट में कोई बढ़ोतरी की गई है या नहीं।

Key Penalties and Deadlines

विषयविवरण
जुर्माना राशि₹10,00,000 (10 लाख रुपये)
जमा करने का स्थानहाई कोर्ट रजिस्ट्री
मुख्य कारणन्यायिक बुनियादी ढांचे के विस्तार में “रोड़े अटकाना” (Stonewalling)।
अगली सुनवाई4 मई, 2026

कोर्ट की सख्त चेतावनी (Harsh Orders Warning)

बेंच ने साफ कर दिया है कि यह केवल शुरुआत है। “यदि आगे सक्रिय कदम नहीं उठाए गए… तो यह अदालत राज्य की अक्षमता को देखते हुए और भी कठोर आदेश पारित करने के लिए मजबूर होगी।”

निष्कर्ष: न्याय में देरी, यानी न्याय का हनन

हिमाचल हाई कोर्ट का यह कड़ा कदम दर्शाता है कि न्यायपालिका अब बुनियादी सुविधाओं के अभाव को और सहन करने के मूड में नहीं है। जजों की कमी और अदालतों की कमी सीधे तौर पर आम जनता के लंबित मामलों (Pendency) को प्रभावित करती है। 10 लाख का यह जुर्माना सरकार के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है।

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