Thursday, October 8, 2026
HomeHigh CourtPrivacy Rights: दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर करने वाली याचिका पर ...

Privacy Rights: दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर करने वाली याचिका पर रजिस्ट्री से मांगा स्पष्टीकरण; कहा-याचिका को कैसे स्वीकार और सूचीबद्ध किया

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • पीड़िता की पहचान की गोपनीयता (Privacy Rights): सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, बलात्कार या यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के नाम और पहचान को किसी भी अदालती दस्तावेज में सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है।
  • रजिस्ट्री की लापरवाही पर सवाल: जस्टिस शहज़ाद अज़ीम ने इस बात पर कड़ा संज्ञान लिया कि बार-बार जारी परिपत्रों (Circulars) के बावजूद रजिस्ट्री ने पीड़िता का नाम उजागर करने वाली याचिका को बिना आपत्ति (Scrutiny) दर्ज कैसे कर लिया।
  • याचिका वापस ली गई: मामले की सुनवाई के दौरान वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

Privacy Rights: जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख हाइकोर्ट ने एक याचिका में दुष्कर्म पीड़िता/शिकायतकर्ता की पहचान और नाम उजागर किए जाने की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अपनी रजिस्ट्री (Registry) से औपचारिक स्पष्टीकरण तलब किया है।

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि रजिस्ट्री यह स्पष्ट करे कि इस संबंध में पहले से जारी स्पष्ट निर्देशों और परिपत्रों (Circulars) के बावजूद ऐसी याचिका को कैसे स्वीकार और सूचीबद्ध किया गया।

मामले के तीन अहम बातें

  • पहचान उजागर करने पर सख्त रुख: न्यायमूर्ति शाहजाद अजीम की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी संख्या 2 (दुष्कर्म पीड़िता/शिकायतकर्ता) का नाम याचिका में सीधे तौर पर दर्ज किया था।
  • रजिस्ट्री से जवाब तलब: अदालत ने कहा कि यौन अपराधों की पीड़िताओं की पहचान गुप्त रखने से संबंधित कई वैधानिक नियमों और समय-समय पर जारी अदालती सर्कुलरों के बावजूद रजिस्ट्री द्वारा याचिका को स्वीकार करना गंभीर प्रक्रियात्मक चूक है।
  • याचिका वापस ली गई: 18 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान संक्षिप्त बहस के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण

यह मामला न्यायमूर्ति शहज़ाद अज़ीम की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई के दौरान पाया गया कि याचिकाकर्ता ने उत्तरदाता संख्या 2 (पीड़िता/शिकायतकर्ता) के असली नाम का खुलासा याचिका की फाइलों में कर रखा था।

न्यायाधीश ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी संख्या 2 (पीड़िता/शिकायतकर्ता) के नाम का खुलासा किया है, रजिस्ट्री से यह स्पष्टीकरण मांगना आवश्यक हो जाता है कि इस संबंध में समय-समय पर जारी किए गए बार-बार के निर्देशों/सर्कुलरों के बावजूद इस याचिका को कैसे स्वीकार किया गया।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों (Niharika Infrastructure व State of Punjab v. Gurmit Singh) के अनुसार, यौन अपराधों की पीड़िताओं की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उनकी पहचान छिपाना (Anonymity) अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को भविष्य में ऐसे मामलों की गहन जांच करने के सख्त संकेत दिए हैं।

उच्च न्यायालय की टिप्पणी

न्यायमूर्ति शाहजाद अजीम ने अपने आदेश में दर्ज किया: इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी संख्या 2 (पीड़िता/शिकायतकर्ता) के नाम का खुलासा किया है, रजिस्ट्री से यह स्पष्टीकरण मांगना आवश्यक हो जाता है कि इस संबंध में समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों और परिपत्रों के बावजूद इस याचिका को कैसे स्वीकार (Entertain) किया गया। अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए रजिस्ट्री से इस चूक पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

हाईकोर्ट का रुख

  1. पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामला
    • याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में प्रतिवादी नंबर 2 (यौन उत्पीड़न पीड़िता/शिकायतकर्ता) का असली नाम और पहचान उजागर कर दी थी।
    • कानून के अनुसार (BNS / IPC और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत) किसी भी यौन अपराध की पीड़िता का नाम, पता या पहचान सार्वजनिक करना या अदालती दस्तावेजों में उजागर करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
  2. हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
    • जस्टिस शहजाद अज़ीम ने आदेश में कहा: “इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी संख्या 2 (पीड़िता/शिकायतकर्ता) के नाम का खुलासा किया है, रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगना आवश्यक हो जाता है कि इस संबंध में समय-समय पर जारी किए गए बार-बार के निर्देशों/परिपत्रों के बावजूद इस याचिका को कैसे स्वीकार किया गया।”
  3. याचिका वापस ली गई
    • 18 अगस्त को पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान, कुछ देर बहस के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

केस अवलोकन (Case Snapshot)

पहलूविवरण
अदालतजम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (High Court of J&K and Ladakh)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति शहजाद अज़ीम (Justice Shahzad Azeem)
मुख्य मुद्दाअदालती रिकॉर्ड/याचिका में रेप पीड़िता का नाम उजागर करने पर रजिस्ट्री से जवाब-तलब
संबंधित कानूनBNS की धारा 72 / IPC की धारा 228A (रेप पीड़िता की पहचान छिपाना अनिवार्य)

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
23 ° C
23 °
23 °
94 %
3.1kmh
26 %
Thu
29 °
Fri
30 °
Sat
32 °
Sun
33 °
Mon
33 °

Recent Comments