Thursday, October 15, 2026
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Process of Arrest: क्या किसी को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए मजाक बन गया है?; जल्दबाजी में गिरफ्तारी पर पुलिस को फटकार, अनोखा केस पढ़ें

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • BNSS की धारा 35(3) का उल्लंघन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत पुलिस को 7 साल तक की सजा वाले मामलों में तुरंत गिरफ्तार करने के बजाय आरोपी को उपस्थिति का नोटिस देना होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक आरोपी जांच में सहयोग करने में विफल न हो, तब तक गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
  • 2 दिन पहले गिरफ्तारी पर सवाल: आरोपी को पुलिस ने 27 अगस्त 2026 को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का आधिकारिक नोटिस भेजा था। लेकिन पुलिस ने 25 अगस्त की सुबह ही उसे उसके घर से हिरासत में ले लिया।
  • 16 साल पुराना सिविल विवाद: याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मामला दो परिवारों के बीच 16 साल से लंबित एक सिविल वसीयत विवाद से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कसूर केवल यह था कि वह उस विवादित वसीयत में बतौर गवाह/हस्ताक्षरकर्ता मौजूद था।
  • जांच अधिकारी (IO) को भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी: हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी को 27 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है कि क्यों न नागरिकों की स्वतंत्रता छीनने के इस गैर-कानूनी कृत्य के लिए उस पर भारी जुर्माना (Exemplary Costs) लगाया जाए।

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु पुलिस द्वारा जांच में पेश होने के लिए दी गई तारीख से दो दिन पहले ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने इस कार्रवाई को प्रथम दृष्टया अवैध करार देते हुए आरोपी को हिरासत से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने ‘व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन’ के जांच अधिकारी (IO) को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया और पूछा कि कानून के खिलाफ जाकर नागरिक की स्वतंत्रता छीनने के लिए उन पर भारी हर्जाना (Exemplary Costs) क्यों न लगाया जाए।

उच्च न्यायालय की तीखी और मौखिक टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने पुलिस की मनमानी कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा: “जब आपने नोटिस जारी कर उसे 27 अगस्त को पेश होने के लिए कहा था, तो आपने उसे 25 अगस्त को ही कैसे उठा लिया? क्या यहां पुलिस के लिए किसी को भी गिरफ्तार करना एक मजाक बन गया है? मैं हर रोज ऐसे मामले देख रहा हूं।”

पीठ ने अपने आदेश में आगे दर्ज किया: “जैसा कि यह अदालत बार-बार देख रही है, नागरिकों को बिना किसी तुक या कारण के गिरफ्तार किया जा रहा है। यह मामला ऐसी ही अवैध गिरफ्तारी का एक क्लासिक उदाहरण (Classic Illustration) है। जब BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया गया था, तो गिरफ्तारी केवल तभी हो सकती थी जब व्यक्ति जांच में सहयोग करने में विफल रहता।”

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मामले की पृष्ठभूमि और BNSS की धारा 35(3) का उल्लंघन

  • 27 अगस्त की तारीख, 25 को ही उठा लिया: व्हाइटफील्ड पुलिस ने जालसाजी (Forgery) के एक मामले में आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर 27 अगस्त 2026 को जांच के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
  • तय तारीख से पहले गिरफ्तारी: 27 अगस्त की तारीख आने से पहले ही पुलिस 25 अगस्त की सुबह आरोपी के घर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।
  • धारा 35(3) का वैधानिक प्रावधान: 7 साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस को सीधे गिरफ्तार करने के बजाय पेशी के लिए औपचारिक नोटिस जारी करना अनिवार्य है। गिरफ्तारी केवल तभी संभव है जब व्यक्ति नोटिस की शर्तों का उल्लंघन करे या सहयोग न करे।

याचिकाकर्ता और अभियोजन पक्ष के तर्क

  • याचिकाकर्ता की दलील: आरोपी के वकील अंगद कामथ ने अदालत को बताया कि पूरा विवाद दो परिवारों के बीच 16 वर्षों से चल रहे एक दीवानी मुकदमे (Civil Litigation) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पर केवल एक वसीयत (Will) पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने का आरोप है, जिसे दूसरा पक्ष जाली बता रहा है।
  • राज्य अभियोजन का पक्ष: राज्य लोक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीशा ने दलील दी कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338 (मूल्यवान प्रतिभूति/वसीयत की जालसाजी) लागू की गई है, और धारा 35(3) का नोटिस जारी ही नहीं किया जाना चाहिए था।
  • अदालत का पलटवार: अदालत ने कहा कि जब एक बार पुलिस ने औपचारिक नोटिस देकर 27 तारीख तय कर दी, तो उसके बाद तय तारीख से पहले हिरासत में लेना पूरी तरह गैर-कानूनी और शक्ति का दुरुपयोग है।

कर्नाटक हाईकोर्ट की सख्त मौखिक टिप्पणी

न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई के दौरान बेंगलुरु पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए: “जब आप उसे 27 अगस्त को आने का नोटिस देते हैं, तो उसे 25 अगस्त को कैसे उठा सकते हैं? क्या यहां पुलिस के लिए किसी को गिरफ्तार करना एक मज़ाक बन गया है? बिना किसी कारण नागरिकों को गिरफ्तार किया जा रहा है। आधिकारिक पुलिस नोटिस देने के बाद उसे हिरासत में कैसे लिया गया? यह क्या बकवास चल रही है?”

अदालत का निर्देश

  1. तत्काल रिहाई: अदालत ने निर्देश दिया कि जांच अधिकारी के इस अवैध कृत्य के तहत हिरासत में लिए गए याचिकाकर्ता को तुरंत प्रभाव से रिहा किया जाए।
  2. जांच अधिकारी (IO) की पेशी: व्हाइटफील्ड थाने के जांच अधिकारी को 27 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है।

Process of Arrest: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (Justice M. Nagaprasanna)
संबंधित कानूनBNSS, 2023 की धारा 35(3) (पुराना CrPC धारा 41A) और BNS धारा 338
घटना का विवरण27 अगस्त की पेशी का नोटिस देकर 25 अगस्त को ही घर से उठा लिया।
अदालत का निर्णययाचिकाकर्ता को तुरंत रिहा करने का आदेश; IO को अदालत में तलब किया।
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