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SCAORA Elections: सुप्रीम कोर्ट में अब महिला वकीलों की भी चलेगी क्या…SC ने ‘पूर्ण न्याय’ के लिए अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल

SCAORA Elections: सुप्रीम कोर्ट ने SCAORA (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन) के आगामी चुनावों में महिला वकीलों के लिए आरक्षण का एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।

एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमालिया बागची की बेंच ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) दिव्या नागपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में तर्क दिया गया था कि 3,000 सदस्यों वाली इस महत्वपूर्ण संस्था में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा जा रहा है। अपनी असाधारण शक्तियों (अनुच्छेद 142) का उपयोग करते हुए, शीर्ष अदालत ने नेतृत्व के पदों पर महिलाओं की ‘नगण्य’ भागीदारी को समाप्त करने की दिशा में यह कदम उठाया है।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
आरक्षण का स्वरूपसचिव, संयुक्त कोषाध्यक्ष और दो कार्यकारी पदों पर केवल महिलाएं ही लड़ सकेंगी।
संवैधानिक आधारअनुच्छेद 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश।
ऐतिहासिक संदर्भदिसंबर 2023 में स्टेट बार काउंसिलों में 30% आरक्षण का आदेश पहले ही दिया जा चुका है।
उद्देश्यन्यायपालिका और संबंधित संस्थाओं में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका सुनिश्चित करना।

कौन से पद हुए आरक्षित?

अदालत ने 2026-2028 के कार्यकाल के लिए होने वाले चुनावों में इन पदों को महिलाओं के लिए सुरक्षित कर दिया है। इनमें सचिव (Secretary) के लिए एक पद, संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Treasurer) के लिए एक पद, कार्यकारी सदस्य (Executive Members) के लिए 2 पद हैँ।

अनुच्छेद 142 का प्रयोग: “कंप्लीट जस्टिस”

  • सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लिया, जो उसे किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” प्रदान करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की विशेष शक्ति देता है।
  • विवाद: 8 अप्रैल को जारी चुनाव नोटिस में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं था, जिसे याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी।
  • ज़रूरत: वर्तमान कार्यकारी समिति पूरी तरह से पुरुषों (All-male) की है। कोर्ट ने माना कि नेतृत्व के पदों पर लैंगिक विविधता (Gender Diversity) लाना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें

  • एडवोकेट दिव्या नागपाल ने अपनी याचिका में कई गंभीर बिंदु उठाए थे।
  • ऐतिहासिक बहिष्कार: SCAORA के इतिहास में महिला पदाधिकारियों की संख्या नगण्य रही है।
  • न्यूनतम 33% आरक्षण: याचिका में मांग की गई थी कि कार्यकारी निकाय में कम से कम 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों।
  • तत्काल राहत: चूंकि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, इसलिए याचिकाकर्ता ने चुनाव पर रोक लगाने या आरक्षण के साथ चुनाव कराने की मांग की थी।

बार में महिला सशक्तिकरण

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बार काउंसिल चुनावों के बाद अब बार एसोसिएशनों में भी महिलाओं के लिए दरवाजे खोल रहा है। यह आदेश न केवल SCAORA के लिए बल्कि देश भर की अन्य कानूनी संस्थाओं के लिए भी एक मिसाल बनेगा, जहाँ नेतृत्व के पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है।

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