Thursday, October 1, 2026
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Sikh wedding ceremony: सुप्रीम कोर्ट का आदेश…4 महीने में बनाएं नियम, दर्ज हों आनंद कारज शादियां

Sikh wedding ceremony: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे चार महीने के भीतर “आनंद कारज” (सिख विवाह समारोह) की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के नियम नोटिफाई करें।

सिखा विवाह समाराेह पर अदालत की टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि सेक्युलर ढांचे में कानून को ऐसा रास्ता देना चाहिए, जिससे आनंद कारज विवाह भी दूसरे विवाहों की तरह दर्ज और प्रमाणित हो सकें। अदालत ने टिप्पणी की, “संविधान का वादा केवल अधिकारों की घोषणा से पूरा नहीं होता, बल्कि उन संस्थाओं से होता है जो उन अधिकारों को उपयोगी बनाती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि “केवल इस आधार पर किसी आवेदन को ठुकराया नहीं जा सकता कि धारा 6 के तहत नियम अभी तक नोटिफाई नहीं हुए।”

आधा-अधूरा वादा

बेंच ने 4 सितंबर के आदेश में कहा – “कानून आनंद कारज विवाह को मान्यता तो देता है, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन सिस्टम नहीं है। यानी वादा आधा ही पूरा हुआ। अब जरूरी है कि ‘राइट्स से रिकॉर्ड’ तक का रास्ता साफ, समान और न्यायपूर्ण बने।” कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सिख समुदाय की आनंद कारज शादियां अब पूरे देश में बिना भेदभाव दर्ज होंगी और राज्यों को इसके नियम जल्द से जल्द लागू करने होंगे।

1909 का आनंद विवाह कानून और 2012 का संशोधन

  • 1909 का आनंद विवाह अधिनियम सिखों की आनंद कारज शादी को वैध मान्यता देता है।
  • 2012 संशोधन के बाद इसमें धारा 6 जोड़ी गई, जिससे राज्यों पर यह जिम्मेदारी डाली गई कि वे विवाह रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था करें।
  • नियम न बनने पर शादी की वैधता पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन रजिस्ट्रेशन सुविधा नागरिकों के लिए समान रूप से जरूरी है।

कोर्ट की मुख्य बातें

  • कुछ राज्यों और UTs ने नियम बना दिए हैं, लेकिन कई जगह अब तक नोटिफाई नहीं हुए।
  • हर राज्य पर ये “सकारात्मक जिम्मेदारी” है कि रजिस्ट्रेशन व्यवस्था बनाए।
  • ये जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर नहीं है कि वहां लाभार्थियों की संख्या कितनी है।
    -जहां आम विवाह रजिस्ट्रेशन सिस्टम है, वहां आनंद कारज शादी भी उसी आधार पर दर्ज होनी चाहिए और अगर पक्षकार चाहें तो ये उल्लेख भी किया जाए कि विवाह आनंद रीति से हुआ।

अंतरिम व्यवस्था और खास निर्देश

  • जब तक नियम नहीं बनते, हर राज्य और UT मौजूदा विवाह रजिस्ट्रेशन सिस्टम में आनंद कारज शादियों को दर्ज करेगा।
  • गोवा में सभी सिविल रजिस्ट्रेशन दफ्तर आवेदन स्वीकार करेंगे।
  • केंद्र सरकार 4 महीने में गोवा पर अधिसूचना जारी करे और वहां नियम बनाए जाएं।
  • सिक्किम में भी मौजूदा नियमों के तहत बिना भेदभाव आनंद कारज विवाह दर्ज होंगे।
  • केंद्र सरकार 6 महीने में कंपाइल्ड स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी और 2 महीने में मॉडल नियम सभी राज्यों-UTs को भेजेगी।

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