Sunday, August 16, 2026
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Skeletal Remains for Proof: मौत के सबूत के लिए बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई…ओडिशा के केंदुझर की हृदयविदारक घटना जरूर पढ़ें

Skeletal Remains for Proof: ओडिशा के केंदुझर जिले से दिल को झकझोर देने वाली इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और बैंकिंग नियमों की जटिलताओं पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

50 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा को अपनी मृत बहन के खाते से मात्र 19,402 रुपये निकालने के लिए उसकी अस्थियों और कंकाल के अवशेषों को बोरे में भरकर बैंक ले जाना पड़ा। यह घटना ओडिशा के एक बैंक की है। जीतू मुंडा, जो कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के गृह जिले के रहने वाले हैं, ने अपनी बहन कला मुंडा की मृत्यु के बाद उनके बैंक खाते में जमा राशि पर दावा किया था।

घटना की पृष्ठभूमि: मजबूरी और अज्ञानता

  • मृत्यु और दफन: जीतू की 56 वर्षीय बहन कला मुंडा की मृत्यु 26 जनवरी को हुई थी और आदिवासी परंपराओं के अनुसार उन्हें घर के पास ही दफनाया गया था।
  • बैंक की मांग: जब जीतू बैंक पैसे निकालने पहुंचे, तो बैंक अधिकारियों ने डेथ सर्टिफिकेट और लीगल हेयर सर्टिफिकेट (कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र) की मांग की, क्योंकि जीतू खाते में ‘नॉमिनी’ (Nominee) नहीं थे।
  • अंतिम कदम: औपचारिक प्रक्रियाओं की समझ न होने के कारण, जीतू ने अपनी बहन के शव को जमीन से खोदकर निकाला और उसके कंकाल को एक बोरे में भरकर बैंक पहुँच गए ताकि यह साबित कर सकें कि उनकी बहन वास्तव में मर चुकी है।

बैंकिंग नियमों का पेच (The Banking Bottleneck)

  • बैंक अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा कि वे केवल नियमों का पालन कर रहे थे।
  • नॉमिनी का अभाव: चूंकि जीतू नॉमिनी नहीं थे, इसलिए नियमानुसार ‘थर्ड-पार्टी विड्रॉल’ (तीसरे पक्ष द्वारा निकासी) के लिए कानूनी दस्तावेजों की आवश्यकता अनिवार्य थी।
  • पहचान का संकट: बैंक स्टाफ के अनुसार, बिना दस्तावेजी सबूत के वे किसी को भी खाते का पैसा नहीं सौंप सकते थे, चाहे स्थिति कितनी भी भावुक क्यों न हो।

प्रशासनिक कार्रवाई और राहत

  • वीडियो वायरल होने और घटना के मीडिया में आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाई।
  • दस्तावेजों का त्वरित निपटारा: प्रशासन ने मंगलवार को तुरंत मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी करवाया।
  • भुगतान: बैंक ने प्रमाण पत्र मिलते ही मंगलवार दोपहर को 19,402 रुपये जारी कर दिए।
  • अतिरिक्त सहायता: मानवीय आधार पर और जीतू की दयनीय स्थिति को देखते हुए, प्रशासन ने ‘जिला रेड क्रॉस फंड’ से उन्हें 30,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान की।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
स्थानमल्लपासी शाखा, ग्रामीण बैंक।
राशि₹19,402 (खाते से) + ₹30,000 (प्रशासनिक सहायता)।
मुख्य समस्यामृतक के खाते में नॉमिनी का न होना और दस्तावेजों की कमी।
प्रशासनिक प्रतिक्रियासोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद तुरंत सहायता।

डिजिटल इंडिया और ग्रामीण हकीकत

यह घटना हमें याद दिलाती है कि ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में भी देश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले आदिवासियों के लिए कागजी कार्रवाई और बैंकिंग प्रक्रियाएं कितनी दुर्गम हैं। जीतू मुंडा का अपनी बहन के अवशेषों को बैंक ले जाना सिस्टम की उस विफलता को दर्शाता है, जहाँ एक अनपढ़ व्यक्ति के लिए ‘नियम’ उसकी संवेदनाओं और गरिमा से बड़े हो जाते हैं।

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