Saturday, September 26, 2026
HomeLaworder Hindiसर्वोच्च बलिदान: सुप्रीम कोर्ट ने शौर्य चक्र विजेता की विधवा को ₹10...

सर्वोच्च बलिदान: सुप्रीम कोर्ट ने शौर्य चक्र विजेता की विधवा को ₹10 लाख का अतिरिक्त भुगतान करने का दिया आदेश…15 अगस्त से पहले यह अहम फैसला

केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (August 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन एवं न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (सुप्रीम कोर्ट)
याचिकाकर्ताकुलदीप कौर (दिवंगत मोहन सिंह, शौर्य चक्र विजेता की पत्नी)
संबंधित संवैधानिक प्रावधानArticle 142 (पूर्ण न्याय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियां)
मुख्य कानूनी सिद्धांतदेश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों/कर्मचारियों के परिवारों को पेंशन लाभ देने में तकनीकी देरी या कानूनी सीमाओं को आड़े नहीं आने दिया जाना चाहिए।
अदालत का अंतिम आदेश1. 2000 में पति की मृत्यु की तिथि से ही असाधारण पेंशन का लाभ लागू।
2. केंद्र सरकार को 4 सप्ताह में ₹10 लाख जारी करने के निर्देश।

सर्वोच्च बलिदान: शीर्ष अदालत ने भारत-चीन सीमा पर सड़क निर्माण के दौरान अपने सहयोगियों की जान बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (GREF) के कर्मचारी की विधवा को ₹10 लाख की अतिरिक्त राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए वर्ष 2000 में पति की मृत्यु की तिथि से ही असाधारण पारिवारिक पेंशन (Extraordinary Family Pension) का लाभ विधवा को प्रदान किया। कोर्ट ने यह राहत तब भी दी, जब याचिकाकर्ता के वकील ने पहले हाई कोर्ट में बकाए (Arrears) के दावे को रिट याचिका दायर करने से तीन साल पहले तक ही सीमित रखा था।

न्यायालय ने कहा, आवेदक के पति द्वारा दिया गया सर्वोच्च बलिदान कर्तव्य के दौरान था और इसकी पहचान के रूप में सरकार ने अगले ही वर्ष उन्हें मरणोपरांत ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया था। ‘शौर्य चक्र’ हमारे देश का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। इस मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए और अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, हम तीन साल की सीमा को हटाकर मृत्यु की तिथि से ही लाभ का विस्तार करते हैं।

घटना और शौर्य चक्र पुरस्कार की पृष्ठभूमि

  1. सीमावर्ती सड़क निर्माण के दौरान बलिदान (2000)
    • दिवंगत मोहन सिंह जीआरईएफ (GREF) में ओवरसियर के रूप में कार्यरत थे और अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण 57 किमी लंबी हैलियांग-मेटंगलियांग-छगलौहागम सड़क निर्माण के प्रभारी थे।
    • 10 जुलाई 2000 को एक खतरनाक चट्टानी स्थान पर काम के दौरान एक विशाल चट्टान पहाड़ी से नीचे गिरती दिखी। मोहन सिंह ने तुरंत बुलडोजर और कंप्रेसर ऑपरेटरों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए सचेत किया।
    • उपकरणों को बचाते समय और साथी मजदूरों की जान बचाते हुए वह स्वयं चट्टान की चपेट में आ गए और लगभग 70 मीटर गहरी घाटी में गिर गए, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
  2. शौर्य चक्र से सम्मान (2001)
    • उनकी अदम्य वीरता और बलिदान के सम्मान में भारत सरकार ने 19 अक्टूबर 2001 को उन्हें मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया था।

कानूनी लड़ाई और हाई कोर्ट का फैसला

  1. असाधारण पेंशन की मांग अस्वीकार होना
    • मृतक की पत्नी कुलदीप कौर को प्रारंभ में सामान्य पारिवारिक पेंशन दी जा रही थी। जब उन्होंने असाधारण पारिवारिक पेंशन की मांग की, तो सरकार ने यह कहकर मना कर दिया कि उन्हें वर्कमेन कॉम्पेन्सेशन एक्ट, 1923 के तहत ₹1,84,170 मिल चुके हैं।
  2. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख
    • पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले को कैटेगरी ‘C’ के तहत मानते हुए असाधारण पेंशन देने का आदेश दिया। हालांकि, डिविजन बेंच ने पेंशन के बकाए (Arrears) को रिट याचिका दायर करने से केवल तीन साल पहले तक ही सीमित कर दिया था।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट का मानवीय व संवैधानिक रुख

  • अनुच्छेद 142 के तहत शक्ति का प्रयोग
    • सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के तीन साल की सीमा वाले आदेश को रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि शौर्य चक्र विजेता के परिवार को अपने हक के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर नहीं काटने चाहिए और देरी की वजह से न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
  • मुआवजे का समायोजन और ₹10 लाख का अंतिम आदेश
    • भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को सूचित किया कि सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद कौर को ₹14,28,200 और एरियर जारी कर दिए हैं।
    • कोर्ट ने 13 जुलाई 2000 से 12 जुलाई 2015 तक की अवधि के लिए ₹10,00,000 की समेकित/एकमुश्त राशि तय की और केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह 4 सप्ताह के भीतर (5 अगस्त 2026 से) इस राशि का भुगतान कुलदीप कौर को करे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
27.2 ° C
27.2 °
27.2 °
86 %
9.5kmh
98 %
Sat
30 °
Sun
34 °
Mon
30 °
Tue
31 °
Wed
32 °

Recent Comments