Counsel Vacancy: देश में आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में होने वाली देरी पर गंभीर रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है।
सरकारें गर्मी की छुट्टियों का उपयोग रिक्त पदों को भरने के लिए करे
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने एक एनडीपीएस (NDPS) मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने देश भर की अदालतों में सरकारी वकीलों (Public Prosecutors – PPs) की भारी कमी पर चिंता जताते हुए राज्यों को निर्देश दिया है कि वे इस गर्मी की छुट्टियों (Summer Vacation) का उपयोग रिक्त पदों को भरने के लिए करें। न्यायालय ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सरकारें अक्सर अदालती कार्यवाही में देरी का ठीकरा न्यायपालिका पर फोड़ती हैं, जबकि असल प्रशासनिक कमियां उनकी अपनी तरफ से होती हैं।
जस्टिस नागरत्ना ने राज्यों की शिथिलता पर तीखे सवाल
राज्य सरकारें खुद कुछ नहीं कर रही हैं और बस हर जगह यही रट लगा रखी है कि आपराधिक न्याय में देरी हो रही है, देरी हो रही है। आखिर इस समस्या की जड़ कहां है? प्रत्येक राज्य में अभियोजन निदेशालय (Directorate of Prosecution) इन मामलों पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है? आप समय पर सरकारी वकीलों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित नहीं कर रहे हैं, जबकि लोग नियुक्त होने का इंतजार कर रहे हैं।
हाई कोर्ट और स्टेट काउंसल्स को नसीहत
- अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका सरकारी वकीलों की नियुक्ति के संबंध में व्यावहारिक सुझाव और रूपरेखा दे सकती है, लेकिन उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की अंतिम जिम्मेदारी कार्यपालिका की ही है।
- पीठ ने अदालत में मौजूद विभिन्न राज्यों के सरकारी वकीलों (State Counsels) को सीधे निर्देश दिए।
- मंत्रालयों को सलाह दें: सभी स्टेट काउंसिल अपने-अपने राज्यों के कानून मंत्री (Law Minister), एडवोकेट जनरल (AG) और अभियोजन निदेशक के सामने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं।
- छुट्टियों का सही इस्तेमाल: अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें इस ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Holidays) के समय का उपयोग प्रशासनिक स्तर पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को तेज करने और प्रभावी सुझावों को लागू करने के लिए करें, ताकि कोर्ट खुलते ही नए वकीलों की तैनाती की जा सके।
क्यों महत्वपूर्ण है सरकारी वकीलों की मौजूदगी?
कानूनी प्रासंगिकता: किसी भी आपराधिक मुकदमे (Criminal Trial) में सरकारी वकील राज्य का प्रतिनिधित्व करता है और पीड़ितों की तरफ से न्याय की गुहार लगाता है। यदि कोर्ट रूम में लोक अभियोजक (PP) ही मौजूद नहीं होगा, तो न तो गवाहों के बयान दर्ज हो सकते हैं और न ही बहस आगे बढ़ सकती है। इसके कारण मुकदमे सालों-साल खिंचते चले जाते हैं और आरोपियों को बिना दोषसिद्धि के लंबे समय तक जेल में सड़ना पड़ता है।
केस मैट्रिक्स (Case Analysis at a Glance)
| प्रशासनिक विंग | सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्देश |
| सुनवाई करने वाली पीठ | जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान। |
| मूल समस्या | सरकारी वकीलों (PPs) की कमी और समय पर भर्ती परीक्षाओं का न होना। |
| राज्यों को निर्देश | समर वेकेशन (गर्मियों की छुट्टियों) के भीतर रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जाए। |
| संबद्ध मामला | अदालत ने यह सख्त टिप्पणियां एक एनडीपीएस (मादक पदार्थ) मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कीं। |
निष्कर्ष (Takeaway)
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप देश की निचली अदालतों (District & Sessions Courts) के लिए बेहद जरूरी है, जहां बुनियादी ढांचे और वकीलों की कमी के कारण लाखों आपराधिक मामले लंबित पड़े हैं। केवल ‘अदालतों में पेंडेंसी’ का रोना रोने के बजाय यदि सरकारें अभियोजन विंग (Prosecution Wing) को मजबूत करें और समय पर नियुक्तियां सुनिश्चित करें, तो मुकदमों की रफ्तार को दोगुना किया जा सकता है।

