UPHAAR TRAGEDY: दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड के पीड़ितों की याद में द्वारका में ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए अंसल भाइयों द्वारा दिए गए 60 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
AVUT की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने जताई आपत्ति
यह जानकारी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक डेव ने सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच को दी। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से तीन हफ्ते में इस पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। AVUT की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति, जिन्होंने इस हादसे में अपने दो बच्चों को खोया था, ने दिल्ली सरकार के इस दावे पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “यह सुनकर हैरानी होती है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दिल्ली सरकार कह रही है कि 60 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, जबकि ट्रॉमा सेंटर का कोई नामोनिशान नहीं है। मैंने इस पर RTI भी डाली थी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और कोर्ट के आदेशों के सम्मान पर सवाल उठते हैं।” अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से तीन हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिससे यह साफ हो सके कि यह रकम कहां और कैसे खर्च की गई।
10 साल पहले जमा हुई थी रकम, अब तक नहीं बना ट्रॉमा सेंटर
- सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2015 को निर्देश दिया था कि द्वारका में ट्रॉमा सेंटर दो साल में बनकर तैयार हो जाना चाहिए। लेकिन अब तक इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
- AVUT (एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उफ्फर ट्रैजेडी) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था कि ट्रॉमा सेंटर क्यों नहीं बना।
- याचिका में कहा गया कि अंसल भाइयों ने 9 नवंबर 2015 को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के कार्यालय में 60 करोड़ रुपए जमा कराए थे। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अंसल भाइयों को मिली थी एक साल की सजा, 60 करोड़ का जुर्माना भी
- 13 जून 1997 को दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उफ्फर सिनेमा में भीषण आग लगी थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2015 में अंसल भाइयों—गोपाल और सुशील एंसल को लापरवाही से मौत का कारण बनने (IPC की धारा 304A), जान को खतरे में डालने (धारा 337) और गंभीर चोट पहुंचाने (धारा 338) जैसे आरोपों में दोषी ठहराया था।
- ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दो साल की सजा सुनाई थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2008 में घटाकर एक साल कर दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 5 मार्च 2014 को इस पर अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद तीन जजों की बेंच ने जुर्माना 100 करोड़ से घटाकर 60 करोड़ कर दिया, जिसे दोनों भाइयों को बराबर-बराबर देना था।
- AVUT ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह दोहराया कि 60 करोड़ रुपए दिल्ली सरकार को ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के लिए ही खर्च करने हैं।

