Thursday, September 24, 2026
HomeHigh CourtCONTEMPT case: जजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर व्यक्ति को 3 दिन...

CONTEMPT case: जजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर व्यक्ति को 3 दिन की जेल…केरल हाईकोर्ट ने दी सजा

CONTEMPT case: केरल हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने और जजों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के मामले में सजा व जुर्माना लगाया।

डबल बेंच ने सुनाया फैसला

कोर्ट ने आरोपी को 3 दिन की साधारण कैद और ₹2000 जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर जो टिप्पणियां कीं, वे अदालत की स्वतंत्रता, ईमानदारी और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर करने के इरादे से की गई थीं। कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस राजा विजयाराघवन वी और जस्टिस जोबिन सेबास्टियन शामिल थे, ने एर्नाकुलम निवासी पी. के. सुरेश कुमार को कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर जजों के खिलाफ वैचारिक पक्षपात और ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट की थीं।

पोस्ट का मकसद अदालत की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर करना

कोर्ट ने कहा, “इन पोस्ट्स का मकसद साफ तौर पर अदालत की निष्पक्षता और ईमानदारी पर जनता का भरोसा कमजोर करना था। यह कहना कि फैसले राजनीतिक रूप से जुड़े वकीलों के कहने पर दिए गए, जजों की नीयत और ईमानदारी पर सीधा हमला है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियां लोगों को न्यायिक प्रक्रिया से दूर कर सकती हैं और जजों के संवैधानिक कर्तव्यों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आलोचना अगर तथ्यात्मक और संयमित हो तो स्वीकार्य है, लेकिन झूठ और दुर्भावना से भरी आलोचना बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

पहले भी माफी मांग चुका था आरोपी

कोर्ट ने बताया कि सुरेश कुमार ने इससे पहले भी एक अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने फिर से आपत्तिजनक पोस्ट्स कीं। कोर्ट ने कहा कि यह उसकी दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।

अगर जुर्माना नहीं भरा तो एक महीने की और जेल

कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर सुरेश कुमार ₹2000 का जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। कोर्ट ने उसकी एक दिन की सजा स्थगित करने की अपील भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, “उसके पिछले रिकॉर्ड और इस मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती।” कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया कि आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।

पहले मानी थी पोस्ट की जिम्मेदारी, बाद में पलटा

कोर्ट ने बताया कि अवमानना की सुनवाई के दौरान सुरेश कुमार ने पहले हलफनामे में माना था कि पोस्ट उसी ने की हैं और उन्हें सही ठहराने की कोशिश भी की। लेकिन बाद में उसने पलटते हुए कहा कि वह पोस्ट्स का लेखक नहीं है। कोर्ट ने कहा, “पहले पोस्ट्स की जिम्मेदारी लेना और फिर गवाही में उससे इनकार करना, यह दिखाता है कि आरोपी का बचाव झूठा और अस्थिर है। वह न तो अपने बयान पर कायम रहा और न ही उसे सही ठहराने की ईमानदार कोशिश की।”

पहले भी की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

इससे पहले भी सुरेश कुमार ने एक ऑनलाइन न्यूज पोर्टल के जरिए हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे। उस मामले में उसने माफी मांग ली थी, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया था। लेकिन अब दोबारा ऐसी हरकत करने पर कोर्ट ने उसे सजा सुनाई है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
23.9 ° C
23.9 °
23.9 °
94 %
8.1kmh
100 %
Thu
24 °
Fri
26 °
Sat
29 °
Sun
32 °
Mon
31 °

Recent Comments