Use of Vehicle: मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति संजय करोल एवं न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह |
| याचिकाकर्ता | कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CONCOR) |
| संबंधित कानून | Motor Vehicles Act, 1988 (Section 2(28), 2(34), 39 & 166) |
| मुख्य निर्णय | 1. बंद परिसर/फैक्ट्री के विशेष वाहन (जैसे रीच स्टैकर) MV Act के तहत ‘मोटर वाहन’ नहीं हैं। 2. कस्टम बॉन्डेड ICD ‘सार्वजनिक स्थान’ की श्रेणी में नहीं आता। |
Use of Vehicle: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल बंद परिसरों (जैसे- कस्टम बॉन्डेड डिपो, फैक्ट्रियां या बंदरगाह) के भीतर इस्तेमाल होने वाले विशेष प्रकार के वाहन—जैसे रीच स्टैकर (Reach Stackers)—मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MV Act) की धारा 2(28) के तहत ‘मोटर वाहन’ (Motor Vehicle) की श्रेणी में नहीं आते हैं।
इसके साथ ही, अदालत ने यह भी माना है कि कस्टम-बॉन्डेड इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) MV Act की धारा 2(34) के तहत ‘सार्वजनिक स्थान’ (Public Place) नहीं हैं।
न्यायमूर्ति संजय करोल (Justice Sanjay Karol) और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह (Justice N Kotiswar Singh) की पीठ ने कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CONCOR) द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के 2019 के फैसले को रद्द कर दिया और मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), साकेत के फैसले को बहाल कर दिया।
Use of Vehicle: अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत और निष्कर्ष
- ‘रीच स्टैकर’ क्यों नहीं है मोटर वाहन? (Section 2(28))
- यद्यपि रीच स्टैकर में इंजन, रबर टायर और चेसिस होते हैं, लेकिन इसका निर्माण और अनुकूलन (Adaptation) केवल बंद परिसरों के भीतर भारी कंटेनरों को उठाने व स्थानांतरित करने जैसे विशेष कार्यों के लिए किया गया है।
- धारा 2(28) का दूसरा हिस्सा स्पष्ट रूप से उन वाहनों को मोटर वाहन की परिभाषा से बाहर (Exclude) रखता है जो केवल फैक्ट्रियों या बंद परिसरों में उपयोग के लिए अनुकूलित होते हैं। केवल रबर टायर होने से कोई वाहन सार्वजनिक सड़क पर चलने योग्य नहीं मान लिया जाता।
- ICD ‘सार्वजनिक स्थान’ (Public Place) नहीं है (Section 2(34))
- ‘सार्वजनिक स्थान’ वह मार्ग या जगह है जहाँ आम जनता को आवाजाही का अधिकार (Right of Access) होता है।
- सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 7 के तहत अधिसूचित ICD (जैसे तुगलकाबाद ICD) एक प्रतिबंधित क्षेत्र है जहाँ केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। इसलिए, ICD के भीतर की सड़कें सार्वजनिक स्थान नहीं हैं।
- पंजीकरण (Registration) की बाध्यता (Section 39)
- MV Act की धारा 39 के तहत वाहनों का अनिवार्य पंजीकरण केवल उन्हीं वाहनों पर लागू होता है जो कानूनन ‘मोटर वाहन’ की श्रेणी में आते हैं। चूंकि रीच स्टैकर मोटर वाहन नहीं है, इसलिए इसके लिए धारा 39 के तहत पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।
“केवल इसलिए कि किसी वाहन में रबर टायर और चेसिस हैं, यह निष्कर्ष निकालना कि वह सार्वजनिक सड़कों पर चलने के लिए उपयुक्त है, पूरे मामले को बेहद सरलीकृत रूप से देखना होगा।” — सर्वोच्च न्यायालय
Use of Vehicle: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- घटना (2013): ऋषि रंजन मिश्रा नाम का व्यक्ति तुगलकाबाद (नई दिल्ली) स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) में गया था, जहाँ एक रीच स्टैकर ने उसे टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में पीड़ित को 90% शारीरिक विकलांगता आई।
- MACT का रुख: पीड़ित ने ₹75 लाख के मुआवजे के लिए MACT (साकेत) में याचिका दायर की। ट्रिब्यूनल ने माना कि रीच स्टैकर ‘मोटर वाहन’ नहीं है और ICD ‘सार्वजनिक स्थान’ नहीं है, इसलिए MV Act के तहत दावा योग्य नहीं है।
- दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय: हाई कोर्ट के सिंगल जज ने ट्रिब्यूनल का फैसला पलटते हुए रीच स्टैकर को मोटर वाहन माना था, जिसे CONCOR ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
Use of Vehicle: सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों को बहाल कर दिया।
विशेष स्पष्टीकरण
- अदालत ने साफ किया कि ICD को ‘सार्वजनिक स्थान’ न मानने का मतलब यह नहीं है कि ICD के भीतर किसी सामान्य वाहन (जैसे ट्रक/कार जो सड़कों पर चलते हैं) से दुर्घटना होने पर पीड़ित मुआवजा नहीं मांग सकता। यदि सड़क पर चलने वाला सामान्य वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र में जाकर दुर्घटना करता है, तो उस पर MV Act के तहत मुआवजे का दावा लागू रहेगा।
- पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि यदि पीड़ित (ऋषि रंजन मिश्रा) को पहले ही मुआवजे की कोई राशि दी जा चुकी है, तो उसकी वसूली (Recovery) नहीं की जाएगी।

