मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति शेखर बी. सर्राफ एवं न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (Lucknow Bench) |
| याचिकाकर्ता | श्री ठाकुर राम जानकी सुग्रीवजी विराजमान मंदिर (सुग्रीव किला, अयोध्या) |
| विवादित राशि | ₹1.20,96,000 + 8% वार्षिक ब्याज |
| मुख्य आदेश | बकाया राशि सिविल कोर्ट के नाम बैंक FD में जमा करने का आदेश; सिविल कोर्ट को 1 साल में टाइटल सूट निपटाने का निर्देश। |
Sugrivji Virajman Mandir: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रशासन के रवैये पर कड़ी फटकार लगाते हुए राज्य सरकार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर से सटे ‘श्री ठाकुर राम जानकी सुग्रीव जी विराजमान मंदिर’ (सुग्रीव किला) से अधिग्रहित जमीन के एवज में बकाया ₹1.20 करोड़ (8% वार्षिक ब्याज के साथ) सिविल कोर्ट के नाम पर बैंक में जमा कराने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सर्राफ (Justice Shekhar B. Saraf) और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (Justice Abdhesh Kumar Chaudhary) की पीठ ने 11 अगस्त को यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट इस रिट याचिका में स्वामित्व/टाइटल विवाद (Title Dispute) का फैसला नहीं कर रहा है और इसका निस्तारण सिविल कोर्ट द्वारा किया जाएगा।
Sugrivji Virajman Mandir: अदालत की मुख्य टिप्पणियां
- राज्य सरकार के रवैये पर सवाल
- कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने मंदिर की जमीन का कब्जा लेने में जल्दबाजी दिखाई और बाद में अपना रुख बदलते हुए यह दावा करने लगे कि यह नजूल/सरकारी जमीन (Nazul Land) है और मंदिर को कोई भुगतान देय नहीं है।
- अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य प्राधिकारियों का ऐसा आचरण किसी भी स्थिति में “निष्पक्ष, उचित या तर्कसंगत” (Fair, Proper or Reasonable) नहीं कहा जा सकता।
- सिविल सूट में तेजी का निर्देश
- पीठ ने निर्देश दिया कि वर्ष 2024 में शुरू हुए लंबित टाइटल सूट (Title Suit) की सुनवाई में तेजी लाई जाए और सिविल कोर्ट इसे अधिमानतः 1 वर्ष के भीतर निस्तारित करे।
Sugrivji Virajman Mandir: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- जमीन का विवरण: मामला अयोध्या में सुग्रीव किला स्थित खसरा नंबर 246, खाता नंबर 44/2 की 1,512 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। मंदिर का दावा है कि 1858 के राजस्व बंदोबस्त से ही उसका स्वामित्व चला आ रहा है।
- बिक्री समझौता (22 दिसंबर 2023): 22 दिसंबर 2023 को ₹1.38 करोड़ (₹1.38,44,559) के कुल मूल्य में पंजीकृत बैनामा (Registered Sale Deed) निष्पादित किया गया था।
- इसमें से ₹17.48 लाख निर्माण लागत के रूप में मंदिर को चुका दिए गए थे।
- लेकिन भूमि मूल्य के ₹1.20,96,000 बकाया रखे गए थे।
- वादे से मुकरने का आरोप: मंदिर प्रबंधन के अनुसार, अधिकारियों ने 15 दिनों के भीतर आरटीजीएस (RTGS) के जरिए भुगतान का आश्वासन दिया था, जिसके भरोसे मंदिर ने तुरंत कब्जा सौंप दिया। लेकिन बाद में भुगतान रोक दिया गया।
- राज्य सरकार का तर्क: सरकार ने दावा किया कि मंदिर के पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं था और यह नजूल भूमि है। सरकार ने यह भी बताया कि उसने इस बैनामे को रद्द करने के लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
Sugrivji Virajman Mandir: उच्च न्यायालय का अंतिम निर्देश
हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार 22 दिसंबर 2023 के बैनामे के 15 दिन पूरे होने की तिथि से 8% वार्षिक ब्याज सहित बकाया राशि (₹1,20,96,000) को संबंधित सिविल कोर्ट के नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज-युक्त फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में जमा करे। इस राशि का अंतिम भुगतान सिविल सूट के फैसले पर निर्भर करेगा।

