मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- वर्चुअल उपस्थिति पर रोक: एडवोकेट नेदुम्परा को अगले आदेश तक केरल की किसी भी अदालत की कार्यवाही में ऑनलाइन या वर्चुअल माध्यम से भाग लेने से रोक दिया गया है।
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियमों का उल्लंघन: कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार चेतावनी के बावजूद Electronic Audio-Video Linkage Rules (Kerala), 2025 के नियम 3(9) का उल्लंघन कर वीडियो रिकॉर्ड और शेयर किए गए।
- आपराधिक अवमानना का मामला: यूट्यूब और X (ट्विटर) पर “You be the judge. Cameras can’t lie. Denial of Justice to MSMEs” जैसे शीर्षकों के साथ वीडियो पोस्ट करना अवमानना अधिनियम की धारा 2(c)(i) के तहत क्रिमिनल कंटेंप्ट माना गया।
- अगली सुनवाई की तिथि: कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 तय की है।
Digital Media: केरल हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता मैथ्यूज जे. नेदुम्परा (Advocate Mathews J. Nedumpara) के खिलाफ बिना अनुमति अदालती कार्यवाही को रिकॉर्ड कर अपने यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड करने के मामले में अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की है।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने रजिस्ट्रार की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें राज्य की किसी भी अदालत में ऑनलाइन/वर्चुअल मोड (Virtual Conference) के माध्यम से पेश होने से अंतरिम रूप से प्रतिबंधित कर दिया है।
मुख्य बिंदु और अदालती निर्देश
- वर्चुअल उपस्थिति पर तत्काल रोक: पीठ ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक एडवोकेट नेदुम्परा केरल के उच्च न्यायालय या किसी भी जिला अदालत में ऑनलाइन माध्यम से कार्यवाही में भाग नहीं ले सकेंगे।
- नियमों का स्पष्ट उल्लंघन: रजिस्ट्री की रिपोर्ट में बताया गया कि बार-बार चेतावनी के बावजूद नेदुम्परा ने इलेक्ट्रॉनिक ऑडियो-वीडियो लिंकेज रूल्स (केरल), 2025 के नियम 3(9) का उल्लंघन करते हुए अदालती कार्यवाही को अनधिकृत रूप से रिकॉर्ड और प्रसारित किया।
- आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt): हाईकोर्ट ने कहा कि यू-ट्यूब और ‘X’ (ट्विटर) पर जारी किए गए वीडियो के शीर्षक— “You be the judge. Cameras can’t lie. Denial of Justice to MSMEs” — अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(c)(i) के तहत आपराधिक अवमानना के दायरे में आते हैं।
- 1 सप्ताह का कारण बताओ नोटिस: कोर्ट ने कहा कि चूंकि वे एक अधिवक्ता हैं, इसलिए तुरंत औपचारिक नियम (Rule) जारी न करते हुए एक सप्ताह के भीतर उन्हें नोटिस तामील करने का निर्देश दिया गया है।
नियम 3(9) क्या कहता है?
केरल के इलेक्ट्रॉनिक ऑडियो-वीडियो लिंकेज रूल्स, 2025 का नियम 3(9) यह स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है कि हाईकोर्ट या किसी भी संबंधित कोर्ट/फोरम की लिखित अनुमति के बिना वर्चुअल कार्यवाही के किसी भी हिस्से की रिकॉर्डिंग, ब्रॉडकास्टिंग, फोटोग्राफी, प्रकाशन या शेयरिंग नहीं की जा सकती।
मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण
केरल हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें बताया गया कि एडवोकेट मैथ्यूज जे. नेदुम्परा अदालती कार्यवाहियों को बिना अनुमति रिकॉर्ड कर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर रहे हैं।
नियम 3(9) का उल्लंघन केरल के इलेक्ट्रॉनिक ऑडियो-वीडियो लिंकेज रूल्स, 2025 का नियम 3(9) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि हाईकोर्ट या संबंधित अदालत की लिखित अनुमति के बिना किसी भी अदालती कार्यवाही की ब्रॉडकास्टिंग, फोटोग्राफी, पब्लिशिंग या रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
पीठ की सख्त टिप्पणी और निर्देश मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने कहा: चूंकि कथित अवमाननाकर्ता एक वकील हैं, इसलिए हम इस स्तर पर औपचारिक रूप से नियम जारी नहीं कर रहे हैं। हालांकि, एक सप्ताह के भीतर नोटिस तामील करने का निर्देश दिया जाता है। अगले आदेश तक कथित अवमाननाकर्ता को केरल की किसी भी अदालत की वर्चुअल कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
अदालत ने कंप्यूटर सेक्शन और आईटी निदेशक को तुरंत इस आदेश पर अनुपालन सुनिश्चित करने और आदेश की प्रति सभी जिला न्यायालयों व जजों को भेजने का निर्देश दिया है।
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Division Bench) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. |
| मामला/केस संख्या | Suo Motu Proceedings v. Adv. Mathews J. Nedumpara [Cont.Cas.(Crl.) No. 8 of 2026] |
| मुख्य उल्लंघन | नियम 3(9), इलेक्ट्रॉनिक ऑडियो-वीडियो लिंकेज रूल्स (केरल), 2025 |
| अगली सुनवाई | 7 सितंबर 2026 |

