केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति आलोक अराधे |
| मामला | Matrimony.com Limited v. FreeElective Network Private Limited |
| विवादित नाम | ‘Jodi365’ (FreeElective) बनाम ‘Jodii’ (Matrimony.com) |
| मुख्य बिंदु | ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) और पासिंग-ऑफ (Passing Off); सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता/समझौते की सलाह दी। |
Jodi Matrimony: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वैवाहिक सेवा प्रदाता कंपनी Matrimony.com की उस याचिका पर हस्तक्षेप करने से अनिच्छा जताई, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने कंपनी को अपने मैचमेकिंग ऐप के लिए ‘Jodii’ नाम का उपयोग करने से रोक दिया था [Matrimony.com Limited बनाम FreeElective Network Private Limited]। हालांकि, याचिका को सीधे खारिज करने के बजाय, शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का मौका दिया।
पीठ और अदालत का रुख
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए दोनों कंपनियों को आपस में समझौता करने की सलाह दी।
सुनवाई के दौरान Matrimony.com ने प्रस्ताव रखा कि वह अपने कारोबार को अचानक बंद होने और मौजूदा उपयोगकर्ताओं को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए अपने ऐप का नाम बदलकर ‘Jodi Matrimony’ करने को तैयार है। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करने को कहा और स्पष्ट किया कि यदि वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो अदालत मामले पर दोबारा विचार करेगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
- विवाद की शुरुआत: यह विवाद तब शुरू हुआ जब Matrimony.com ने अक्टूबर 2021 में ‘Jodii’ नाम से अपना मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।
- ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा: ‘Jodi365’ मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म का संचालन करने वाली कंपनी FreeElective Network Private Limited ने इसे लेकर लीगल नोटिस भेजा और बाद में मद्रास उच्च न्यायालय में ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग-ऑफ (Passing-off) का मुकदमा दायर किया।
- FreeElective का दावा: कंपनी 2009 से ‘Jodi365’ का लगातार उपयोग कर रही है और 2010 में इसे कंपोजिट डिवाइस मार्क के रूप में पंजीकृत कराया था। उसका आरोप था कि समान सेवाओं के लिए ध्वनि साम्य (Phonetically similar) वाले ‘Jodii’ नाम का उपयोग करने से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा होगा।
- Matrimony.com का तर्क: कंपनी का कहना था कि ‘Jodi’ शब्द का अर्थ युगल या जोड़ा होता है, जो वैवाहिक सेवाओं का एक सामान्य वर्णनात्मक (Descriptive) शब्द है और इस पर किसी एक का एकाधिकार नहीं हो सकता।
मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला
- एकल पीठ का रुख: जुलाई 2022 में उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने FreeElective का मुकदमा खारिज कर दिया था और माना था कि समग्र ‘Jodi365’ मार्क विशिष्ट हो सकता है, लेकिन ‘Jodi’ शब्द सामान्य व वर्णनात्मक है।
- खंडपीठ का फैसला (11 अगस्त 2026): न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को पलट दिया। अदालत ने Matrimony.com को ‘Jodii’ या इसके समान किसी भी नाम का उपयोग करने से रोक दिया और उल्लंघनकारी सामग्री को नष्ट करने के लिए सौंपने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दलीलें और स्थिति
- Matrimony.com की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने दलील दी कि FreeElective का पंजीकरण क्लास 45 (वैवाहिक सेवाओं) के तहत नहीं, बल्कि क्लास 35, 38 और 41 में है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ‘Jodi’ शब्द को अलग से ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत कराने की अपनी लंबित अर्जी पर आगे दबाव नहीं बनाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम. लाल भी Matrimony.com की ओर से पेश हुए।
- FreeElective की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका का विरोध किया और 2009 से इसके निरंतर उपयोग तथा उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होने के प्रमाणों का हवाला दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जब उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप न करने का संकेत दिया, तो वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने कहा कि यदि याचिका खारिज हो जाती है तो समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। इस पर पीठ ने याचिका को खारिज करने के बजाय लंबित रखा ताकि दोनों पक्ष आपस में बैठकर समझौते की संभावना तलाश सकें।
सुप्रीम कोर्ट में दलीलें और मुख्य घटनाक्रम
- ‘Jodi Matrimony’ नाम बदलने की पेशकश
- Matrimony.com की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने अदालत के समक्ष प्रस्ताव रखा कि ऐप को अचानक बंद करने से मौजूदा उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ेगा। इसलिए कंपनी अपने ऐप का नाम बदलकर ‘Jodi Matrimony’ करने को तैयार है।
- पीठ ने दोनों कंपनियों को इस प्रस्ताव पर बातचीत करने और सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का निर्देश दिया।
- ट्रेडमार्क उल्लंघन और एकाधिकार का विवाद
- FreeElective (Jodi365) का रुख: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि कंपनी 2009 से ‘Jodi365’ नाम का उपयोग कर रही है। Matrimony.com द्वारा ध्वन्यात्मक रूप से समान (Phonetically Similar) ‘Jodii’ नाम का उपयोग करने से उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा हो रहा था।
- Matrimony.com का रुख: तर्क दिया गया कि ‘जोड़ी’ (Jodi) शब्द भारतीय भाषाओं में “जोड़े/दंपति” के लिए एक सामान्य और वर्णनात्मक (Descriptive) शब्द है, इसलिए इस पर कोई कंपनी एकाधिकार का दावा नहीं कर सकती।
- मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का फैसला
- इससे पहले 11 अगस्त 2026 को मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ (Justices P Velmurugan & K Govindarajan Thilakavadi) ने सिंगल जज के फैसले को पलटते हुए Matrimony.com को ‘Jodii’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था और इस नाम से जुड़ी सामग्री को नष्ट करने का आदेश दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है, लेकिन समझौते की गुंजाइश को देखते हुए याचिका को लंबित (Pending) रखा है।

