At A Glance | एक नजर में
- अदालत का आदेश: पब को ग्राहक से वसूले गए ₹128 के सर्विस चार्ज को 8% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹2,000 का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में ₹1,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
- विवाद की वजह: बेंगलुरु निवासी आरएस रुद्रेश से मार्च 2026 में नागराभावी स्थित ‘Sherlock’s Pub’ में जबरन 7.5% सर्विस चार्ज (₹128) वसूला गया था।
- CCPA दिशानिर्देश: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के नियमों के अनुसार सर्विस चार्ज पूरी तरह से ऐच्छिक (Voluntary) है और कोई भी प्रतिष्ठान ग्राहक को इसे देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
- समय-सीमा: उपभोक्ता आयोग ने पब को आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। तय समय में भुगतान न करने पर 10% वार्षिक ब्याज देना होगा।
बेंगलुरु: होटल, रेस्टोरेंट और पबों द्वारा बिलों में अनिवार्य रूप से ‘सर्विस चार्ज’ जोड़ने की प्रथा, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशानिर्देशों के खुले उल्लंघन, और बिलिंग में उपभोक्ता की स्वतंत्र सहमति की अनदेखी पर बेंगलुरु शहरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने दो-टूक व्यवस्था दी है कि कोई भी प्रतिष्ठान उपभोक्ता पर सर्विस चार्ज थोप नहीं सकता और न ही इसे देने से इनकार करने पर भोजन या डाइनिंग सेवा देने से मना कर सकता है।
आयोग की प्रभारी अध्यक्ष वी. अनुराधा और सदस्य एच. जनार्दन की पीठ ने 25 सितंबर 2026 को पारित आदेश में नागरभावी स्थित शरलॉक पब (Sherlock’s Pub, Nagarabhavi) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया। आयोग ने पब प्रबंधन को पीड़ित ग्राहक को वसूले गए ₹128 का सर्विस चार्ज 8% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने, मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹2,000 मुआवजा और ₹1,000 मुकदमा खर्च 45 दिनों के भीतर अदा करने का निर्देश दिया।
उपभोक्ता आयोग के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘प्रबंधन की सुविचारित नीति के तहत जबरन वसूली, कोई बिलिंग त्रुटि नहीं’ उपभोक्ता आयोग ने पब के बचाव और आचरण का विश्लेषण करते हुए दर्ज किया:
*”विपरीत पक्ष (शरलॉक पब) का आचरण किसी अनजाने में हुई बिलिंग त्रुटि (Inadvertent billing error) का परिणाम नहीं था, बल्कि यह प्रबंधन की एक घोषित नीति के तहत किया गया था।
यह स्पष्ट रूप से उपभोक्ता की पसंद और मर्जी की परवाह किए बिना अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज थोपने की एक व्यवस्थित और संस्थागत कार्यप्रणाली (Systematic practice) को दर्शाता है।”*
2. सीसीपीए (CCPA) दिशानिर्देशों का उल्लंघन:
- आयोग ने दोहराया कि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट ग्राहक को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
- प्रतिष्ठानों का यह अनिवार्य विधिक कर्तव्य है कि वे उपभोक्ता को सूचित करें कि सर्विस चार्ज देना पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary), वैकल्पिक (Optional) और उपभोक्ता के अपने विवेक (Entirely at discretion) पर निर्भर है।
3. सर्विस चार्ज न देने पर सेवा से इनकार करना गैर-कानूनी:
- शिकायतकर्ता को यह धमकी देना कि यदि वह 7.5% सर्विस चार्ज देने पर सहमत नहीं होगा तो उसे डाइनिंग सेवाएं नहीं दी जाएंगी, उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर हनन और सेवा में प्रत्यक्ष कमी है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: ₹128 का सर्विस चार्ज और विधिक संघर्ष
- 24 मार्च 2026 की घटना:
- बेंगलुरु निवासी आर.एस. रुद्रेश अपने एक मित्र के साथ नागरभावी स्थित शरलॉक पब में भोजन और डाइनिंग के लिए गए थे।
- ऑर्डर के समय आपत्ति:
- मेन्यू कार्ड पर 7.5% सर्विस चार्ज का उल्लेख देखकर रुद्रेश ने ऑर्डर देते समय ही कर्मचारियों और मैनेजर के सामने आपत्ति दर्ज कराई।
- उन्होंने प्रबंधन को सीसीपीए के दिशानिर्देशों का हवाला दिया कि किसी भी ग्राहक से जबरन सर्विस चार्ज नहीं वसूला जा सकता।
- मैनेजर की हठधर्मिता और बाध्यता:
- पब मैनेजर ने कथित तौर पर स्पष्ट कहा कि 7.5% सर्विस चार्ज प्रबंधन के निर्देशों के तहत अनिवार्य है और बिल में जुड़ेगा ही। यह भी कहा गया कि यदि वे चार्ज नहीं देंगे तो उन्हें डाइनिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।
- विवश होकर ग्राहक ने ₹1,887 के कुल बिल का भुगतान किया, जिसमें ₹128 का 7.5% सर्विस चार्ज शामिल था।
- कानूनी नोटिस और एकतरफा कार्यवाही:
- ग्राहक ने 10 अप्रैल 2026 को पब को कानूनी नोटिस भेजकर सर्विस चार्ज वापस करने और हर्जाने की मांग की, परंतु पब ने कोई जवाब नहीं दिया।
- जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा नोटिस तामील होने के बावजूद पब का कोई प्रतिनिधि आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
- आयोग ने पब की अनुपस्थिति (Ex-parte) में शिकायतकर्ता के पेश किए गए बिल और दस्तावेजी साक्ष्यों को निर्विवाद पाते हुए फैसला सुनाया।
उपभोक्ता आयोग द्वारा जारी आदेश
- सर्विस चार्ज की वापसी: शरलॉक पब ₹128 की वसूली गई राशि शिकायतकर्ता को 8% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे।
- मुआवजा: उपभोक्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए ₹2,000 का मुआवजा अदा किया जाए।
- वाद-व्यय: शिकायतकर्ता को कानूनी खर्च के रूप में ₹1,000 का भुगतान किया जाए।
- डिफ़ॉल्ट क्लॉज: आदेश प्राप्ति के 45 दिनों के भीतर भुगतान न करने पर, चूक की तिथि से पूरी वसूली तक ₹128 की राशि पर 10% वार्षिक ब्याज देय होगा।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: आर.एस. रुद्रेश बनाम शरलॉक पब [उपभोक्ता शिकायत – बेंगलुरु शहरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग]
- पीठ: वी. अनुराधा (प्रभारी अध्यक्ष) एवं एच. जनार्दन (सदस्य)
- आदेश की तिथि: 25 सितंबर 2026
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- शिकायतकर्ता की ओर से: अधिवक्ता एस. सुमंत
- विपरीत पक्ष: अनुपस्थित (एकतरफा कार्यवाही)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक नियम:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019):
- धारा 2(11) (सेवा में कमी – Deficiency in Service)
- धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार – Unfair Trade Practice)
- धारा 35 एवं 39 (उपभोक्ता आयोग का क्षेत्राधिकार एवं अनुतोष प्रदान करने की शक्ति)
- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) दिशानिर्देश, 2022 (होटल और रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज लगाने की रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश)
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019):
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- उपभोक्ता संप्रभुता का सिद्धांत — ‘खाद्य पदार्थों के मूल्य में प्रतिष्ठान के संचालन और सेवा का खर्च पहले से समाहित होता है; टिप या सर्विस चार्ज केवल उपभोक्ता की स्वेच्छा पर निर्भर करता है, इसे अनिवार्य शुल्क के रूप में बिल में जोड़ना अवैध है।’
- अंतिम परिणाम: शिकायत पूर्णतः स्वीकृत; पब को ₹128 ब्याज सहित लौटाने और कुल ₹3,000 मुआवजा व कानूनी खर्च अदा करने का आदेश।
Service Charge:Key Indicators | मुख्य बिंदु
| संकेत बिंदु | विवरण |
| उपभोक्ता आयोग | बेंगलुरु अर्बन जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग |
| पीठ के सदस्य | प्रभारी अध्यक्ष वी. अनुराधा और सदस्य एच. जनार्दन |
| शिकायतकर्ता | आरएस रुद्रेश (बेंगलुरु निवासी) |
| अनाधिकृत शुल्क | ₹128 (कुल बिल राशि ₹1,887 पर 7.5% का सर्विस चार्ज) |
| कुल जुर्माना/मुआवजा | ₹3,000 (₹2,000 हर्जाना + ₹1,000 कानूनी खर्च) + ₹128 का रिफंड (8% ब्याज के साथ) |

