मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- प्रोफेशनल बेल बॉन्डपर्सन मॉडल: जो आरोपी पारंपरिक ज़मानतदार ढूंढने में असमर्थ हैं, उनके लिए पंजीकृत व लाइसेंस प्राप्त एजेंसियां/व्यक्ति ज़मानतदार बन सकेंगे। राज्य प्राधिकरण इनकी सेवा फीस की अधिकतम सीमा तय करेंगे।
- भौतिक सत्यापन में बदलाव: वर्तमान में जांच अधिकारी (IO) ज़मानतदार का भौतिक सत्यापन करता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि जिला अदालतों में इसके लिए समर्पित कर्मचारी हों, जो कम से कम दो स्वतंत्र गवाहों को साथ रखकर सत्यापन करें।
- जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) का इस्तेमाल: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को जियो-फेंसिंग तकनीक के इस्तेमाल पर दिशानिर्देश बनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि आरोपी के भौगोलिक सीमाओं से बाहर न जाने की निगरानी की जा सके।
- न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण: न्यायिक अकादमियों को निर्देश दिया गया है कि वे जजों को सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं (विशेष रूप से वित्तीय लाचारी और न्याय तक पहुंच) के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दें।
Bail System: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत प्रणाली (Bail System) और ज़मानतदारों (Sureties) के सत्यापन तंत्र में सुधार के लिए कई ऐतिहासिक सुझाव दिए हैं। न्यायालय ने पारंपरिक ज़मानतदार जुटाने में असमर्थ आरोपियों के लिए ‘प्रोफेशनल बेल बॉन्ड्सपर्सन’ (Professional Bail Bondspersons) की व्यवस्था शुरू करने, जिला अदालतों में ज़मानत सत्यापन हेतु समर्पित कर्मचारियों की तैनाती और देश भर में एक साझा ‘श्योरिटी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम’ (SIMS) विकसित करने का प्रस्ताव रखा है।
पीठ और संदर्भ
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) के तहत वाणिज्यिक मात्रा के मामलों में विदेशी नागरिकों से जुड़े फर्जी ज़मानतदारों (Fake Sureties) की समस्या पर विचार करते हुए ये सिफारिशें दीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये संबंधित प्राधिकरणों और नीति-निर्माताओं के विचारार्थ सुझाव हैं, जो अदालत द्वारा जारी अनिवार्य निर्देशों से अलग हैं।
प्रमुख सुधार सुझाव
- प्रोफेशनल बेल बॉन्ड्सपर्सन (लाइसेंसशुदा ज़मानतदार):
- शीर्ष अदालत ने उन आरोपियों के लिए पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त ज़मानतदारों की प्रणाली पर विचार करने का सुझाव दिया जो पारंपरिक ज़मानतदार की व्यवस्था नहीं कर पाते।
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा द्वारा तैयार किए गए मसौदा नियमों के तहत राज्य स्तर पर नियामक प्राधिकरण (State Regulatory Authorities) लाइसेंस जारी कर सकते हैं और अधिकतम सेवा शुल्क तय कर सकते हैं।
- अदालत ने कार्यपालिका को ज़मानत के निगमीकरण (Corporatization of Bail) के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का आकलन कर निर्णय लेने को कहा।
- ज़मानतदारों के भौतिक सत्यापन के लिए समर्पित स्टाफ:
- वर्तमान में जांच अधिकारी (IO) द्वारा किए जाने वाले भौतिक सत्यापन के स्थान पर प्रत्येक जिला अदालत में ज़मानत सत्यापन के लिए समर्पित मानव संसाधन (Dedicated Personnel) उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया।
- सत्यापन के दौरान कम से कम दो स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- श्योरिटी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (SIMS):
- सभी राज्यों में ज़मानतदारों के डेटा, पते और पूर्व में दी गई ज़मानतों के प्रभावी रिकॉर्ड और प्रबंधन के लिए एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी डिजिटल पोर्टल विकसित करने की सिफारिश की गई।
- जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) तकनीक का उपयोग:
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को ज़मानत की शर्तों (जैसे भौगोलिक सीमाओं से बाहर न जाना) की निगरानी के लिए जियो-फेंसिंग तकनीक के उपयोग हेतु दिशानिर्देश तैयार करने का सुझाव दिया गया।
- आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication):
- केंद्र सरकार से कहा गया कि वह गुड गवर्नेंस रूल्स, 2020 के तहत ज़मानतदारों के सत्यापन के लिए आधार प्रमाणीकरण की सुविधा हेतु यूआईडीएआई (UIDAI) से संपर्क करने पर विचार करे।
- हालांकि, अदालत ने रियल-टाइम सत्यापन के लिए वाहन, भूमि रजिस्ट्री और अन्य डेटाबेस को सीधे सार्वजनिक/ऑनलाइन उपलब्ध कराने के व्यापक सुझाव को अत्यधिक विस्तृत मानते हुए खारिज कर दिया।
- सदाचार बंधपत्र (Bond for Good Behaviour):
- गृह मंत्रालय को BNSS, 2023 की धारा 129 के तहत आने वाले कानूनों की सूची में NDPS Act को शामिल करने पर विचार करने को कहा गया, जिससे कार्यपालक मजिस्ट्रेट अपराधियों से सदाचार बंधपत्र निष्पादित करवा सकें।
- न्यायाधीशों का प्रशिक्षण:
- न्यायिक अकादमियों को निर्देश दिया गया कि वे न्यायाधीशों को सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं, वित्तीय असुरक्षा और ज़मानत तक न्याय की पहुंच के अंतर्संबंधों पर विशेष प्रशिक्षण दें।
निर्देशों का क्रियान्वयन
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की प्रतियां आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई (Follow-up action) हेतु केंद्रीय विधि एवं न्याय विभाग, सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और उच्च न्यायालयों के महापंजीयकों (Registrars General) को भेजने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए बिंदुवार दिशानिर्देश
- प्रोफेशनल बेल बॉन्ड्सपर्सन (Professional Bail Bondspersons):
- ऐसे आरोपी जो अपनी आर्थिक स्थिति या गैर-स्थानीय (Non-local) होने के कारण पारंपरिक जमानती (Sureties) नहीं ला पाते, उनके लिए लाइसेंस प्राप्त ‘प्रोफेशनल बेल बॉन्ड्सपर्सन’ की व्यवस्था शुरू की जा सकती है।
- इसके तहत राज्य स्तर पर एक ‘Bail Bondsperson Regulatory Authority’ बनाने का सुझाव दिया गया है, जो फीस और नियमों को तय करेगी। अदालत ने सरकार को बेल सिस्टम के कॉर्पोरेटाइजेशन के प्रभाव का अध्ययन करने की सलाह दी है।
- जिला अदालतों में जमानती सत्यापन के लिए समर्पित स्टाफ:
- वर्तमान में जमानतदारों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) केवल पुलिस जांच अधिकारी (IO) करते हैं।
- कोर्ट ने सुझाव दिया कि जिला अदालतों में जमानतियों के सत्यापन के लिए अलग से मानव संसाधन (Dedicated Personnel) प्रदान किया जाना चाहिए, जो कम से कम दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में सत्यापन करें।
- श्योरिटी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (SIMS):
- फर्जी और फर्जी दस्तावेजों पर बार-बार जमानतदार बनने वाले लोगों को पकड़ने के लिए राज्यों के बीच एक साझा डेटाबेस SIMS बनाने का सुझाव दिया गया है, जिससे पूरे देश में जमानतियों का रिकॉर्ड रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सके।
- जमानतियों का आधार (Aadhaar) सत्यापन:
- अदालत ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार ‘गुड गवर्नेंस रूल्स 2020’ के तहत UIDAI से आधार ऑथेंटिकेशन की अनुमति मांगने पर विचार करे, ताकि जमानतदार की पहचान तुरंत सत्यापित हो सके। (हालांकि, कोर्ट ने वाहन रजिस्ट्रेशन, भू-अभिलेख आदि डेटाबेस की सीधी ऑनलाइन पहुंच देने का विचार खारिज कर दिया।)
- जमानत की शर्तों के लिए जियो-फेेंसिंग (Geo-Fencing Technology):
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को जियो-फेेंसिंग तकनीक के उपयोग पर दिशा-निर्देश बनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरोपी जमानत की भौगोलिक शर्तों का उल्लंघन न करे।
- न्यायाधीशों के लिए सामाजिक-आर्थिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण:
- ज्यूडिशियल अकादमियों को निर्देश दिया गया है कि वे न्यायिक अधिकारियों को आरोपियों की वित्तीय लाचारी (Financial Vulnerability) और जमानतदार न मिलने से न्याय तक पहुंच में आने वाली बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु प्रशिक्षण दें।
सुप्रीम कोर्ट के अन्य प्रमुख सुझाव
- डिजिटल डेटाबेस (SIMS): एक राष्ट्रीय ‘सुरेटी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम’ (SIMS) विकसित किया जाए ताकि एक ही व्यक्ति बार-बार अलग-अलग अदालतों में फर्जी दस्तावेज़ लगाकर ज़मानतदार न बन सके।
- आधार प्रमाणीकरण: केंद्र सरकार UIDAI के नियमों (Aadhaar Authentication for Good Governance Rules, 2020) के तहत ज़मानतदारों के सत्यापन के लिए आधार प्रमाणीकरण की सुविधा लागू करने का आवेदन करे।
- सदाचार के लिए बॉन्ड (BNSS धारा 129): गृह मंत्रालय को सुझाव दिया गया कि एनडीपीएस कानून (NDPS Act) को BNSS, 2023 की धारा 129 की सूची में शामिल किया जाए, जिससे एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आदतन अपराधियों से सदाचार (Good Behaviour) का बॉन्ड भरवा सकें।
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति संजय करोल एवं न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह |
| मूल विषय | NDPS मामलों में फर्जी जमानतियों की समस्या और जमानत प्रणाली में सुधार |
| निर्देश | फैसले की प्रतियां केंद्रीय विधि मंत्रालय, सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और हाईकोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी गईं। |

