Sunday, October 4, 2026
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Condition Of Default Bail: UAPA मामलों में BNSS लागू होने के बाद भी डिफ़ॉल्ट जमानत की अवधि 180 दिन ही रहेगी, 90 दिन नहीं…सभी समझ लें

Condition Of Default Bail: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह एवं न्यायमूर्ति विकास महाजन (Delhi High Court)
संबंधित कानूनUAPA Act (Section 43D), CrPC (Sec 167) vs BNSS (Sec 187)
मुख्य सिद्धांतनए आपराधिक कानूनों (BNSS) के लागू होने के बावजूद UAPA के तहत विशेष धाराओं में चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा 180 दिन ही रहेगी।
अंतिम आदेशयाचिकाकर्ता की डिफ़ॉल्ट जमानत अर्जी खारिज।

Condition Of Default Bail: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के लागू होने के बावजूद गैर-कानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत (Default Bail) की अवधि 180 दिन ही बनी रहेगी, इसे घटाकर 90 दिन नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह (Justice Prathiba M Singh) और न्यायमूर्ति विकास महाजन (Justice Vikas Mahajan) की खंडपीठ ने नवंबर 2025 के लाल किला आतंकी विस्फोट मामले के आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश की डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।

Condition Of Default Bail: अदालत के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत

  • विधान की मंशा (Legislative Intent):“UAPA में हिरासत की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने का स्पष्ट उद्देश्य आतंकवाद जैसे जघन्य अपराधों की जांच के लिए लंबा समय देना है। केवल BNSS के लागू होने से विधायिका के इस स्पष्ट उद्देश्य को निष्फल नहीं किया जा सकता।”
  • साधारण खंड अधिनियम (General Clauses Act) का अनुप्रयोग
    • आरोपी ने तर्क दिया था कि UAPA की धारा 43D(2) पुरानी CrPC की धारा 167 का हवाला देती है। चूंकि BNSS लागू होने के बाद संसद ने UAPA में संशोधन कर BNSS की धारा 187 को शामिल नहीं किया, इसलिए आरोपी 90 दिनों में डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार है।
    • कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 8(1) का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि पुराने कानून (CrPC Sec 167) के स्थान पर नए कानून (BNSS Sec 187) का संदर्भ स्वतः लागू माना जाएगा (Legislation by Reference)।

Condition Of Default Bail: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • आरोपी: जासिर बिलाल वानी (नवंबर 2025 लाल किला ब्लास्ट केस का आरोपी)।
  • याचिका: वानी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल न करने पर डिफ़ॉल्ट जमानत की मांग की थी।
  • NIA का रुख: राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से बहस करते हुए वकीलों ने तर्क दिया कि UAPA एक विशेष कानून है जो आतंकवाद से निपटने के लिए बनाया गया है और इसके तहत जांच एजेंसियों को 180 दिनों तक की हिरासत का विशेष अधिकार प्राप्त है।

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