मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- स्पेशलाइज्ड पैनल: इनकम टैक्स, कस्टम्स, GST, PMLA जैसे विशेष कानूनों का अनुभव रखने वाले वकीलों को विशेष पैनलों में शामिल किया जाएगा।
- कोई निश्चित केस गारंटी नहीं: पैनल में शामिल होने मात्र से न्यूनतम केस मिलने का कोई अधिकार या गारंटी नहीं मिलेगी; मुकदमों का आवंटन पूरी तरह विधि कार्य विभाग के विवेक पर निर्भर होगा।
- केस ट्रांसफर पर रोक: पैनल वकील बिना लिखित अनुमति के अपना केस या ब्रीफ किसी अन्य अधिवक्ता को नहीं सौंप सकते।
- गोपनीयता और पेशेवर आचरण: वकीलों को मंत्रालयों और विभागों के दस्तावेजों की पूर्ण गोपनीयता बनाए रखनी होगी।
Directions To Empanel Lawyers: केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, जिला व अधीनस्थ अदालतों, न्यायाधिकरणों (Tribunals) और अन्य मंचों पर भारत सरकार (Union of India) का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकीलों को पैनल में शामिल (Empanelment) करने हेतु विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
विधि एवं न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग (Department of Legal Affairs) द्वारा 20 अगस्त को जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, सरकारी सेवा के दौरान 10 वर्ष का कानूनी कार्य अनुभव रखने वाले वकीलों को भी उनकी विशेषज्ञता के आधार पर पैनल में शामिल करने पर विचार किया जा सकेगा।
पैनल वकील के लिए अनिवार्य योग्यताएं
- शैक्षणिक व पेशेवर डिग्री: भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/कॉलेज से कानून में स्नातक (LL.B.) डिग्री।
- बार काउंसिल में पंजीकरण: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत राज्य बार काउंसिल में विधिवत नामांकित होना अनिवार्य।
- AIBE और प्रैक्टिस प्रमाण पत्र: अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) उत्तीर्ण होना और एक वैध सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (Certificate of Practice) होना आवश्यक है।
- विशेष कानूनों में विशेषज्ञता: आयकर, सीमा शुल्क (Customs), जीएसटी (GST), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA/MLA) आदि जैसे विशेष कानूनों में अनुभव रखने वाले वकीलों को विशेष पैनल के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है।
- सरकारी सेवा का अनुभव: सरकारी सेवा में 10 वर्ष का कानूनी अनुभव रखने वाले अधिवक्ताओं को भी उनके विशेषज्ञता क्षेत्र के अनुसार पैनल में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया
- इच्छुक वकीलों को कानूनी मामलों के विभाग के उप सचिव (Deputy Secretary) को निर्धारित प्रारूप में आवेदन भेजना होगा।
- आवेदन के साथ स्व-सत्यापित शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पूर्व पैनल आदेश (यदि कोई हो), तय फीस संरचना का पालन करने का वचन पत्र (Undertaking), और किसी भी आपराधिक दोषसिद्धि या पेशेवर अयोग्यता से मुक्त होने का घोषणा पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
कार्यकाल, पेशेवर फीस और अयोग्यता
- 3 साल का कार्यकाल: पैनल का कार्यकाल 3 वर्ष या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) के लिए होगा। पैनल में शामिल वकीलों के कामकाज और प्रदर्शन की हर साल समीक्षा (Annual Review) की जाएगी।
- अयोग्यता की शर्तें: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24A के तहत दोषी पाए जाने, बार काउंसिल द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने, या पूर्व में भारत सरकार के हितों के प्रतिकूल काम करने पर वकील को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
- व्यावसायिक फीस: पैनल वकीलों की फीस कानूनी मामलों के विभाग द्वारा समय-समय पर संशोधित अनुमोदित शुल्क अनुसूची (Fee Schedule) के अनुसार देय होगी।
पैनल से हटाना (De-empanelment) और इस्तीफा
- हटाने के आधार: सरकार के निर्देशों के विरुद्ध काम करने, केस फाइलें (Briefs) वापस न करने, अदालती शुल्क/धनराशि का गबन करने, अदालत की अवमानना, पेशेवर कदाचार, या किसी अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने पर सरकार किसी भी समय वकील को पैनल से हटा सकती है।
- इस्तीफे का नियम: पैनल वकील को इस्तीफा देने के लिए केंद्र सरकार को कम से कम एक महीने का लिखित अग्रिम नोटिस देना होगा (सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से इसे शिथिल किया जा सकता है)।
- गोपनीयता और मामलों का आवंटन: पैनल वकील पूर्व अनुमति के बिना अपने केस किसी अन्य वकील को स्थानांतरित (Transfer/Delegate) नहीं कर सकते और उन्हें मंत्रालय के रिकॉर्ड की पूर्ण गोपनीयता बनाए रखनी होगी।
- अधिकार या गारंटी नहीं: मामलों का आवंटन पूरी तरह कानूनी मामलों के विभाग के विवेकाधिकार पर रहेगा; पैनल में शामिल होने से न्यूनतम मामलों के आवंटन का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
आवेदन, फीस और हटाने (De-empanelment) की शर्तें
- आवेदन प्रक्रिया: आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, शपथ पत्र और पेशेवर ट्रैक रिकॉर्ड के साथ आवेदन उप सचिव (विधि कार्य विभाग) को भेजना होगा।
- फीस ढांचा: वकीलों को मिलने वाला शुल्क विधि कार्य विभाग द्वारा समय-समय पर संशोधित अनुमोदित फीस अनुसूची (Fee Schedule) के अनुसार तय होगा।
- अयोग्यता और पैनल से हटाना:
- एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24A के तहत अयोग्य ठहराए गए या बार काउंसिल द्वारा अनुशासित वकीलों को शामिल नहीं किया जाएगा।
- कोर्ट की अवमानना, पैसे का दुरुपयोग, पेशेवर दुराचार, या सरकार के हितों के खिलाफ काम करने पर किसी भी समय पैनल से हटाया जा सकता है।
- इस्तीफा देने का नियम: पैनल वकील को पद छोड़ने के लिए कम से कम 1 महीने का अग्रिम लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा।
मुख्य पात्रता शर्तें और चयन प्रक्रिया
- अनिवार्य शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यताएं
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से मान्यता प्राप्त संस्थान से कानून में स्नातक (LL.B.)।
- राज्य बार काउंसिल के साथ एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत वैध नामांकन।
- ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास होना और वैध प्रैक्टिस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य।
- विशेषज्ञता और सरकारी सेवा अनुभव
- आयकर (Income Tax), सीमा शुल्क (Customs), GST, और PMLA जैसे विशेष कानूनों में अनुभव रखने वाले वकीलों को विशेष ट्रिब्यूनल और अदालती पैनल में प्राथमिकता दी जाएगी।
- सरकारी सेवा के दौरान 10 वर्षों का कानूनी कार्य अनुभव रखने वाले वकीलों के नाम पर भी उनकी विशेषज्ञता के आधार पर विचार किया जा सकता है।
- आवेदन प्रक्रिया
- वकीलों को निर्धारित प्रारूप में उप सचिव, विधि कार्य विभाग को आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
- आवेदन पत्र के साथ स्वयं-सत्यापित प्रमाणपत्र, पूर्व पैनल आदेश, पेशेवर शुल्क अनुसूची के पालन का वचन पत्र (Undertaking) और किसी आपराधिक मामले या अनुशासनात्मक कार्रवाई में दोषी न पाए जाने का घोषणा पत्र जमा करना होगा।
कार्यकाल, फीस और डी-पैनल (De-empanelment) के नियम
| पहलू | नियम व शर्तें |
| कार्यकाल (Tenure) | 3 वर्ष (या अगले आदेश तक जो भी पहले हो)। प्रदर्शन की वार्षिक समीक्षा की जाएगी। |
| अयोग्यता (Disqualification) | एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24A के तहत अयोग्य ठहराया गया व्यक्ति, बार काउंसिल द्वारा निलंबित वकील, या जिसने पूर्व में केंद्र सरकार के हितों के विरुद्ध काम किया हो। |
| केस हस्तांतरण पर पाबंदी | पैनल वकील बिना पूर्व लिखित अनुमति के अपना केस/ब्रीफ किसी अन्य वकील को स्थानांतरित या सौंप नहीं सकते। |
| त्यागपत्र (Resignation) | पैनल से हटने के लिए केंद्र सरकार को कम से कम 1 महीने का लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा। |
| पैनल से हटाया जाना (Removal) | सरकार के निर्देशों के खिलाफ काम करने, कोर्ट फीस या पैसों का गबन करने, अदालत की अवमानना (Contempt), या आपराधिक दोषसिद्धि होने पर सरकार कभी भी पैनल से हटा सकती है। |
केस अवलोकन (Case Snapshot)
| नियम/मापदंड | विवरण जानकारी |
| जारीकर्ता प्राधिकरण | विधि कार्य विभाग, कानून एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार |
| कार्यान्वयन का दायरा | सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, जिला अदालतें और विभिन्न ट्रिब्यूनल |
| पैनल कार्यकाल | 3 वर्ष (प्रतिवर्ष प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी) |
| न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता | BCI से मान्यता प्राप्त लॉ डिग्री, राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण और AIBE उत्तीर्ण |
| विशेष अनुभव | सरकारी सेवा में 10 वर्ष का कानूनी अनुभव रखने वालों को विशेषज्ञता के आधार पर प्राथमिकता |

