मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- AI से बने फर्जी फैसलों का हवाला: जीएसटी (GST) विवाद से जुड़ी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने आया कि स्टेट टैक्स ऑफिसर ने अपने आदेश में ऐसे कानूनी फैसलों का हवाला दिया था, जो असल में वजूद में ही नहीं थे (Non-existent judgments) या जिनका उस मामले से कोई संबंध नहीं था।
- प्रोबेशनरी अधिकारी की बिना शर्त माफी: कर अधिकारी (देवांग अरविंदकुमार यादव) ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रोबेशन पर होने और अनुभव की कमी के कारण उन्होंने आदेश ड्राफ्ट करने के लिए AI का सहारा लिया था।
- राज्यव्यापी 18 अगस्त 2026 की गाइडलाइंस: इस घटना के बाद, एडिशनल कमिश्नर ऑफ स्टेट टैक्स ने 18 अगस्त 2026 को सभी टैक्स अधिकारियों के लिए गाइडलाइंस जारी कीं, जिन्हें हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शामिल किया है।
- पुराना आदेश रद्द: राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से शो-कॉज नोटिस जारी करने और मामले पर फिर से विचार करने की बात कहे जाने के बाद हाईकोर्ट ने फैज एंटरप्राइजेज के खिलाफ जारी आदेश को रद्द कर दिया।
अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य के कर अधिकारियों (Tax Authorities) को न्यायिक और अपीलीय आदेश पारित करते समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति ए. एस. सुपेहिया और न्यायमूर्ति वैभवी डी. नानावती की खंडपीठ ने 20 अगस्त को यह फैसला तब सुनाया, जब एक राज्य कर अधिकारी ने स्वीकार किया कि उसने आदेश का मसौदा तैयार करने में AI का उपयोग किया था, जिसके कारण आदेश में ऐसे अदालती फैसलों का उल्लेख हो गया जो अस्तित्व में ही नहीं थे या मामले से पूरी तरह अप्रासंगिक थे।अदालत ने चेतावनी दी है कि इन सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करने पर अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही की जाएगी [फैज एंटरप्राइजेज बनाम राज्य कर अधिकारी]।
उच्च न्यायालय का सख्त आदेश
पीठ ने 18 अगस्त 2026 को जारी प्रशासनिक निर्देशों को अपने आदेश में शामिल करते हुए कहा: “हम निर्देश देते हैं कि 18/08/2026 के जिन निर्देशों को हमने अपने आदेश में शामिल किया है, उनका पूरी निष्ठा से पालन किया जाए। हमारे द्वारा जारी निर्देशों के आलोक में इन निर्देशों का कोई भी उल्लंघन इस अदालत की अवमानना माना जाएगा।”
मामले की पृष्ठभूमि और अधिकारी की बिना शर्त माफी
- जीएसटी कार्यवाही को चुनौती: ‘फैज एंटरप्राइज’ नामक फर्म ने राज्य कर अधिकारियों द्वारा जीएसटी व्यवस्था के तहत शुरू की गई कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- फर्जी साइटेशन का खुलासा: 13 अगस्त की सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि राज्य कर अधिकारी ने अपने आदेश में ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दिया था जो या तो अस्तित्व में ही नहीं थे या उनके कानूनी सिद्धांत विवाद से मेल नहीं खाते थे। अदालत ने पाया कि आदेश पूरी तरह “AI द्वारा तैयार किए गए फर्जी केस लॉ” पर आधारित था।
- प्रोबेशनरी अधिकारी की माफी: राज्य कर अधिकारी देवांग अरविंदकुमार यादव ने हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने बताया कि वह प्रोबेशनरी अधिकारी हैं और अनुभव की कमी के कारण यह गलती हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि आदेश ड्राफ्ट करते समय उन्होंने AI का उपयोग किया था और बाद में उन्होंने ड्राफ्टिंग व न्यायनिर्णयन में AI के उपयोग पर प्रशिक्षण भी लिया है।
18 अगस्त के दिशा-निर्देश: टैक्स आदेशों में AI के उपयोग पर शर्तें
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य कर के अतिरिक्त आयुक्त ने राज्यव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए।
- केवल सहायक उपकरण: AI केवल निर्णयकर्ताओं की सहायता कर सकता है, यह अधिकारी के स्वतंत्र कानूनी विवेक (Application of Mind) का विकल्प नहीं हो सकता।
- प्राथमिक स्रोतों से सत्यापन अनिवार्य: AI द्वारा सुझाए गए किसी भी निर्णय, वैधानिक प्रावधान, नियम, परिपत्र (Circular) या अधिसूचना को आदेश में शामिल करने से पहले आधिकारिक प्राथमिक स्रोतों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना अनिवार्य होगा।
- मूल पैराग्राफ का मिलान: यदि AI टूल किसी फैसले के अनुपात (Ratio) को अपने शब्दों में लिखता है, तो कर अधिकारियों को मूल फैसले से उस पैराग्राफ को खोजना होगा और तभी उसका संदर्भ देना होगा। साथ ही यह भी जांचना होगा कि वह फैसला वर्तमान में भी वैध कानून (Good Law) है या नहीं।
कर अधिकारियों के लिए जारी AI गाइडलाइंस
- केवल सहायता के लिए: AI का उपयोग केवल सहायता (Assist) के लिए किया जा सकता है, यह अधिकारी के ‘स्वतंत्र दिमाग’ (Independent Application of Mind) का विकल्प नहीं हो सकता।
- प्राथमिक स्रोतों से सत्यापन: AI द्वारा सुझाए गए किसी भी कानून, धारा, सर्कुलर या अदालती फैसले का हवाला देने से पहले आधिकारिक प्राथमिक स्रोतों (Primary Official Sources) से उनका सत्यापन करना अनिवार्य है।
- मूल पेराग्राफ का मिलान: यदि AI किसी फैसले का सार (Ratio) बताता है, तो अधिकारियों को फैसले के मूल पैराग्राफ को खुद खोजकर पढ़ना होगा और उसके बाद ही उसका उल्लेख करना होगा।
- कानूनी स्थिति की जांच: अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI द्वारा बताया गया फैसला आज भी प्रभावी है या खारिज हो चुका है।
गुजरात हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
न्यायमूर्ति ए.एस. सुपेहिया और न्यायमूर्ति वैभवी डी. नानावटी की पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा: “हम निर्देश देते हैं कि 18/08/2026 के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। हमारे द्वारा जारी निर्देशों के आलोक में इन निर्देशों का कोई भी उल्लंघन इस न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा।”
अंतिम निर्णय
राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि वह फैज एंटरप्राइज के खिलाफ पारित विवादित आदेशों पर पुनर्विचार करेगी और एक नया कारण बताओ नोटिस जारी करेगी।तदनुसार, गुजरात उच्च न्यायालय ने विवादित आदेश को रद्द (Set Aside) कर दिया और मामले को नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।
Contempt of Court: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court) |
| पीठासीन पीठ | न्यायमूर्ति ए.एस. सुपेहिया एवं न्यायमूर्ति वैभवी डी. नानावटी |
| याचिकाकर्ता | फैज एंटरप्राइजेज (Faiz Enterprises) |
| मुख्य विवाद | टैक्स अधिकारी द्वारा आदेश में AI का इस्तेमाल कर गैर-मौजूद/फर्जी केस लॉ शामिल करना |
| अदालत का निर्णय | विवादित आदेश रद्द; राज्यव्यापी AI गाइडलाइंस लागू; उल्लंघन पर अवमानना की चेतावनी |

