Saturday, August 29, 2026
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Subhash Chandra Nclt Case: ₹22,000 करोड़ से घटकर ₹6.25 करोड़ रह गई Essel Group के सुभाष चंद्रा की देनदारी; यहां लटके बैंक

अहम बिंदु(Key Indicators)

  • व्यक्तिगत गारंटी का मामला: सुभाष चंद्रा ने विवेक इन्फ्राकॉन (Vivek Infracon) को दिए गए ₹170 करोड़ के लोन के लिए पर्सनल गारंटी (Personal Guarantee) दी थी। लोन डिफॉल्ट होने पर इंडियाबुल्स (सम्मान कैपिटल) ने 2022 में IBC की धारा 95 के तहत दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे 2024 में स्वीकार किया गया था।
  • बेंच में विभाजन और तीसरे सदस्य की राय: इससे पहले, न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने के पक्ष में थे, जबकि तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने प्लान में गंभीर कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया था। NCLT अध्यक्ष ने मामला तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा के पास भेजा।
  • तीसरे सदस्य का निष्कर्ष: न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि IBC की धारा 114 के तहत रीपेment प्लान को मंजूरी दी जानी चाहिए। धारा 115 के तहत यह प्लान उन सभी लेनदारों पर बाध्यकारी होगा जिन्होंने इसके खिलाफ वोट दिया था या अनुपस्थित रहे थे।
  • नेटवर्थ का विवाद: LIC हाउसिंग फाइनेंस (जिसका ₹1,322.39 करोड़ का दावा था और उसे केवल ₹38.09 लाख मिल रहे हैं) सहित कई बैंकों ने इसका कड़ा विरोध किया। बैंकों ने दलील दी कि 2017-18 में चंद्रा की नेटवर्थ ₹40,000 करोड़ से अधिक बताई गई थी, जो अब घटाकर ₹31.79 करोड़ दिखाई गई है।
  • अपात्र दावों की छंटनी: NCLT ने संकल्प पेशेवर (Resolution Professional) को अनिल कुमार (960 व्यक्तियों की ओर से) और सुनील जैन (300 व्यक्तियों की ओर से) द्वारा बिना उचित दस्तावेजों के दाखिल दावों को हटाने का निर्देश दिया है। इसके बाद ₹6.25 करोड़ की राशि को शेष पात्र लेनदारों में पुनर्वितरित किया जाएगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के बहुमत के फैसले के बाद एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा की लगभग ₹22,006.57 करोड़ की पर्सनल गारंटी देनदारी घटकर केवल ₹6.25 करोड़ रह गई है।

NCLT के दो सदस्यीय मूल बेंच के बीच आए बंटे हुए फैसले (Split Verdict) के बाद नियुक्त तीसरे सदस्य (न्यायिक सदस्य) नीलेश शर्मा ने 25 अगस्त को इस योजना के पक्ष में फैसला सुनाया। इस रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) के तहत कर्जदाताओं को उनके मूल दावों का मात्र 0.028% ही वापस मिलेगा, जिसका सीधा अर्थ है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को 99.97% (लगभग ₹22,000 करोड़) का भारी हेयरकट (Haircut) झेलना पड़ेगा।

₹6.50 करोड़ का रिपेमेंट प्लान: कैसे बंटेगा पैसा?

  • कुल स्वीकृत दावे: विभिन्न वित्तीय और वाणिज्यिक कर्जदाताओं के कुल स्वीकृत दावे लगभग ₹22,006.57 करोड़ थे।
  • प्रस्तावित राशि: सुभाष चंद्रा ने कुल ₹6.50 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव रखा, जिसमें से ₹6.25 करोड़ पात्र कर्जदाताओं में आनुपातिक रूप से (Pro-rata) बांटे जाएंगे और शेष ₹25 लाख दिवाला समाधान प्रक्रिया की लागत (Insolvency Resolution Process Costs) के लिए रखे गए हैं।
  • धारा 114 के तहत मंजूरी: तीसरे सदस्य ने माना कि व्यक्तिगत गारंटर द्वारा प्रस्तुत यह पुनर्भुगतान योजना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की धारा 114 के तहत अनुमोदित किए जाने योग्य है।

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मामले की पृष्ठभूमि

  • 2022 में दिवाला कार्यवाही: सुभाष चंद्रा ने ‘विवेक इंफ्राकॉन’ को दिए गए ₹170 करोड़ के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटी दी थी। कर्ज के एनपीए (NPA) होने के बाद ‘इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस’ (अब सम्मौन कैपिटल – Sammaan Capital) ने 2022 में IBC की धारा 95 के तहत चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही शुरू की थी, जिसे 2024 में स्वीकार किया गया था।
  • दो जजों में मतभेद: मूल बेंच के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज योजना को मंजूरी देने के पक्ष में थे, जबकि तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने इसे गंभीर कानूनी व प्रक्रियात्मक कमियों से ग्रस्त बताते हुए खारिज कर दिया था। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत यह मामला तीसरे सदस्य के पास भेजा गया था।

बैंकों की आपत्तियां और तीसरे सदस्य का निष्कर्ष

सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के कई बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों (जैसे केनरा बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस आदि) ने योजना का कड़ा विरोध किया था:

  1. ‘माइक्रोस्कोपिक’ रिकवरी और नेटवर्थ में गिरावट: एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने तर्क दिया कि उसे ₹1,322.39 करोड़ के दावे के मुकाबले केवल ₹38.09 लाख मिलेंगे। बैंकों ने सीए (CA) प्रमाणपत्रों का हवाला देकर कहा कि 2017 और 2018 में चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति क्रमशः ₹45,888 करोड़ और ₹40,562 करोड़ आंकी गई थी, जो अब घटकर केवल ₹31.79 करोड़ बताई गई।
  2. वोटिंग में ‘सहयोगियों’ (Associates) की भागीदारी: बैंकों ने आरोप लगाया कि वीना इन्वेस्टमेंट्स, वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स, लेमोनेड कैपिटल जैसी संस्थाएं चंद्रा की करीबी हैं और उन्हें वोटिंग से बाहर रखा जाना चाहिए था।
    • NCLT का फैसला: तीसरे सदस्य ने माना कि केवल पारिवारिक या व्यावसायिक निकटता के आधार पर कानून में परिभाषित ‘सहयोगी’ का दायरा नहीं बढ़ाया जा सकता, इसलिए उनका मतदान वैध था।
  3. असमर्थित दावों को हटाने का निर्देश: अदालत ने पाया कि अनिल कुमार (960 व्यक्तियों की ओर से) और सुनील जैन (300 व्यक्तियों की ओर से) द्वारा प्रस्तुत दावों में सहायक दस्तावेजों का अभाव था। अदालत ने समाधान पेशेवर (RP) को इन 1,260 दावों को सूची से बाहर करने और शेष ₹6.25 करोड़ को वास्तविक पात्र कर्जदाताओं में पुनर्वितरित करने का निर्देश दिया।
  4. धारा 115 की बाध्यता: न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि IBC की धारा 115 के तहत स्वीकृत योजना उन सभी कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, जिन्होंने इसके खिलाफ मतदान किया था या अनुपस्थित रहे थे।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

तीसरे सदस्य के इस बहुमत वाले निष्कर्ष के बाद, मामले को औपचारिक आदेश पारित करने के लिए मूल बेंच के समक्ष रखा जाएगा। इस योजना के अंतिम रूप से लागू होने के बाद कोड के तहत सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी सभी देनदारियां समाप्त मानी जाएंगी।

NCLT के सदस्य नीलेश शर्मा की टिप्पणी

“मेरे विचार में, पर्सनल गारंटर द्वारा प्रस्तुत रीपेमेंट प्लान को दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 की धारा 114 के तहत मंजूरी दी जानी चाहिए। कथित ‘सहयोगी संस्थाओं’ (Associates) के वोटों को महज पारिवारिक या व्यावसायिक निकटता के आरोपों के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।”

यह मामला अब अंतिम औपचारिक आदेश पारित करने के लिए मूल पीठ के समक्ष रखा जाएगा।

Subhash Chandra Nclt Case: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित ट्रिब्यूनलनेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT)
फैसले का आधारधारा 419(5) के तहत 2-1 की बहुमत राय
याचिकाकर्ता (मूल लेनदार)इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (अब सम्मान कैपिटल)
मुख्य विवादविवेक इन्फ्राकॉन के ₹170 करोड़ के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर
कुल स्वीकृत दावे₹22,006.57 करोड़
स्वीकृत रीपेमेंट राशि₹6.25 करोड़ (अतिरिक्त ₹25 लाख इंसॉल्वेंसी खर्च के लिए)
रिकवरी दर (Haircut)0.028% रिकवरी (99.97% हेयरकट)
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