मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- मां की याचिका: विचाराधीन कैदी की मां ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पालायमकोट्टई सेंट्रल जेल के अधिकारी उनके बेटे को उसकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत मूंछें काटने और सिर मुंडवाने (Tonsure) के लिए मजबूर कर रहे हैं।
- संवैधानिक और कानूनी अधिकार: याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), कैदी के सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया।
- राज्य सरकार का रुख: तमिलनाडु सरकार के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि कैदी को उसके बाल कटवाने के लिए जबरन मजबूर नहीं किया जा रहा है।
- जेल नियमों की व्याख्या:
- नियम 213(3): इसके तहत धार्मिक मान्यताओं के कारण बाल बढ़ाने वाले कैदियों को राहत मिलती है, बशर्ते स्वच्छता प्रभावित न हो।
- नियम 306 और स्वच्छता अपवाद: राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल मेडिकल आधार या अन्य कैदियों की स्वच्छता (Hygiene) बनाए रखने की स्थिति में ही नियम 213(3) के तहत आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
चेन्नई/मदुरै: मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक कारणों से बाल बढ़ा रहे किसी भी विचाराधीन कैदी (Undertrial Prisoner) को जेल में जबरन बाल कटवाने या सिर मुंडवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने जेल अधिकारियों को ‘तमिलनाडु जेल नियम, 2024’ (Tamil Nadu Prison Rules, 2024) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति ए. डी. जगदीश चंदीरा और न्यायमूर्ति बी. मुरुगेसन की खंडपीठ ने कैदी की मां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि और मां की याचिका
- जेल में जबरन बाल काटने का आरोप: याचिकाकर्ता महिला का बेटा तिरुनेलवेली स्थित पलायमकोट्टई केंद्रीय जेल (Central Prison, Palayamkottai) में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद है।
- धार्मिक आस्था का हवाला: महिला ने याचिका में कहा कि उसका बेटा अपनी धार्मिक मान्यताओं और मन्नत के तहत बाल बढ़ा रहा था, लेकिन जेल अधिकारी उसे जबरन मूंछें काटने और सिर मुंडवाने (Tonsure) के लिए मजबूर कर रहे थे।
- संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: याचिका में 13 अगस्त को अधिकारियों को दिए गए प्रतिवेदन का उल्लेख करते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और गरिमापूर्ण जीवन व धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया गया था।
तमिलनाडु जेल नियमों के तहत राज्य सरकार का रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील डी. वेंकटेश ने अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट की:
- सामान्य स्थिति में बाध्यता नहीं: राज्य ने अदालत को आश्वासन दिया कि विचाराधीन कैदी को सामान्य तौर पर बाल काटने के लिए विवश नहीं किया जा रहा है और न ही किया जाएगा।
- स्वच्छता और मेडिकल आधार: राज्य ने बताया कि तमिलनाडु जेल नियम, 2024 के नियम 213 और 306 के तहत कैदियों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य है। यदि बाल या नाखून बढ़ने से अन्य कैदियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो केवल चिकित्सा/स्वच्छता आधार पर ही नियम 213(3) के तहत आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
उच्च न्यायालय का अंतिम निर्देश
मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया: “राज्य सरकार के वकील के इस बयान को दर्ज करते हुए कि कैदी को बाल कटवाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, प्रतिवादियों (जेल अधिकारियों) को तमिलनाडु जेल नियम, 2024 के नियम 213(3) का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया जाता है।” इस निर्देश के साथ अदालत ने बिना किसी शुल्क (Costs) के रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
मद्रास हाईकोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति ए. डी. जगदीशा चंदिरा और न्यायमूर्ति बी. मुरुगेसन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया: “प्रतिवादियों (जेल अधिकारियों) को तमिलनाडु जेल नियम, 2024 के नियम 213(3) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाता है। चूंकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कैदी को जबरन बाल कटवाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, इसलिए इस रिट याचिका को निस्तारित किया जाता है।”
Undertrial Prisoner: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| पीठासीन पीठ | न्यायमूर्ति ए. डी. जगदीशा चंदिरा एवं न्यायमूर्ति बी. मुरुगेसन |
| संबंधित जेल | सेंट्रल जेल, पालायमकोट्टई (तिरुनेलवेली, तमिलनाडु) |
| संबंधित कानून/नियम | तमिलनाडु जेल नियम, 2024 (नियम 213(3) एवं नियम 306) |
| अदालत का फैसला | कैदी को बाल कटवाने के लिए मजबूर न करने का निर्देश जारी; याचिका निस्तारित। |

