Thursday, October 15, 2026
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MLR Manipulation: मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर…हत्या के प्रयास की धारा जोड़ने वाली राय देने वाला डॉक्टर तलब; आरोपी को अंतरिम जमानत, मामला समझें

पृष्ठभूमि और विरोधाभास

  • सरकारी अस्पताल की शुरुआती रिपोर्ट: शिकायतकर्ता पंकज के साथ कथित मारपीट के बाद उसे एलएनजीपी सरकारी अस्पताल, कुरुक्षेत्र ले जाया गया। सरकारी डॉक्टर की रिपोर्ट (MLR) में सिरदर्द, छाती में दर्द, कंधे और पेट में दर्द की शिकायतें दर्ज थीं, लेकिन दाएं घुटने पर एक छोटी खरोंच (2×2 सेमी) के अलावा शरीर पर “ताजा चोट का कोई बाहरी निशान नहीं” पाया गया था।
  • निजी अस्पताल की मेडिकल राय: बाद में शिकायतकर्ता ‘श्री बालाजी आरोग्यम अस्पताल, कुरुक्षेत्र’ में भर्ती हुआ। 4 फरवरी 2026 को पुलिस के आवेदन पर वहां के मेडिकल अफसर ने राय दी कि मरीज के फेफड़े में हवा/गैस भर गई थी (Pneumothorax) और सर्जरी न होने पर यह चोट “जीवन के लिए खतरनाक” (Dangerous to life) थी। इसी राय के आधार पर पुलिस ने मामले में धारा 109(1) BNS (IPC 307 – हत्या का प्रयास) जोड़ दी।
  • आरोपी की हिरासत: याचिकाकर्ता 4 जनवरी 2026 से जेल में बंद था और उसने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गंभीर धाराएं जोड़े जाने को चुनौती दी थी।

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) के एक मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत देते हुए डॉक्टर की मेडिकल राय पर गंभीर संदेह जताया है।

न्यायमूर्ति एन. एस. शेखावत की एकल पीठ ने कुरुक्षेत्र के आरोग्यम अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए यह निर्देश जारी किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि गंभीर धारा जोड़ने के लिए जिस मेडिकल राय का सहारा लिया गया, उसमें डॉक्टर द्वारा हेरफेर (Manipulation) किया गया प्रतीत होता है। उच्च न्यायालय ने संबंधित डॉक्टर को अस्पताल के पूरे रिकॉर्ड के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश करने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणी

मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए अदालत ने कहा: “आरोग्यम अस्पताल, कुरुक्षेत्र के मेडिकल ऑफिसर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि वर्तमान मामले में मेडिकल रिकॉर्ड के साथ-साथ दी गई राय में उस डॉक्टर द्वारा हेरफेर (Manipulated) किया गया है जिसने यह राय प्रस्तुत की थी।”

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परस्पर विरोधी मेडिकल रिपोर्ट

  • शुरुआती घटना और सरकारी अस्पताल की MLR: अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता पंकज ने बैंक से लौटते समय मारपीट का आरोप लगाया था। एलएनजेपी (सरकारी) अस्पताल, कुरुक्षेत्र की मेडिको-लीगल रिपोर्ट (MLR) में सिरदर्द, सीने में दर्द और कंधे के दर्द की शिकायत तो दर्ज थी, लेकिन डॉक्टर ने स्पष्ट लिखा था कि “शरीर पर ताजी चोट का कोई बाहरी निशान नहीं है” (दाहिने घुटने पर मात्र 2×2 सेमी की खरोंच को छोड़कर)।
  • निजी अस्पताल की राय और धारा 307/109(1) जुड़ना: बाद में शिकायतकर्ता को ‘श्री बालाजी आरोग्यम अस्पताल, कुरुक्षेत्र’ में भर्ती कराया गया। 4 फरवरी 2026 को पुलिस आवेदन पर निजी अस्पताल के डॉक्टर ने राय दी कि मरीज के दाहिने फेफड़े में हवा भर गई थी (न्यूमोथोरैक्स) और यह चोट बिना सर्जिकल प्रक्रिया के “जीवन के लिए खतरनाक” (Dangerous to Life) थी। इस मेडिकल राय के आधार पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) [आईपीसी की धारा 307 – हत्या का प्रयास] जोड़ दी।

हाईकोर्ट का रुख और निर्देश

सरकारी अस्पताल की एमएलआर और निजी अस्पताल की मेडिकल राय के बीच भारी अंतर और संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया:

  1. डॉक्टर को रिकॉर्ड सहित तलब किया: अदालत ने कृष्णा गेट थाना (थानेसर) के एसएचओ को निर्देश दिया कि वे संबंधित डॉक्टर को आरोग्यम अस्पताल के मूल व पूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई पर अदालत के समक्ष पेश करें।
  2. अंतरिम जमानत मंजूर: याचिकाकर्ता, जो 4 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में था, को संबंधित ट्रायल कोर्ट/ड्यूटी मजिस्ट्रेट/सीजेएम की संतुष्टि के अनुसार जमानत और मुचलका भरने की शर्त पर अंतरिम जमानत (Interim Bail) पर रिहा करने का आदेश दिया गया।

हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश

  • डॉक्टर की पेशी के आदेश: हाईकोर्ट ने कुरुक्षेत्र के कृष्णा गेट थाना प्रभारी (SHO) को निर्देश दिया है कि आरोग्यम अस्पताल के संबंधित डॉक्टर को पूरे मेडिकल रिकॉर्ड के साथ 1 सितंबर 2026 को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश किया जाए।
  • अंतरिम जमानत स्वीकृत: मेडिकल राय में संभावित हेरफेर को देखते हुए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट/ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर बेल बॉन्ड भरने पर interim bail देने का आदेश दिया।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत ने अपने आदेश में कहा: “आरोग्यम अस्पताल, कुरुक्षेत्र के मेडिकल ऑफिसर द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि वर्तमान मामले में मेडिकल रिकॉर्ड के साथ-साथ राय में उस डॉक्टर द्वारा हेरफेर (Manipulated) किया गया है, जिसने अपनी राय दी थी।”

अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को तय की गई है।

MLR Manipulation: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतपंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत (Justice N.S. Shekhawat)
मामला/धाराएंBNS की धारा 109(1) [पुराने IPC की धारा 307 – हत्या का प्रयास] व अन्य
मुख्य निर्देशआरोपी को अंतरिम जमानत; संबंधित डॉक्टर को 1 सितंबर 2026 को रिकॉर्ड सहित तलब किया।
संबंधित अस्पतालआरोग्यम अस्पताल, कुरुक्षेत्र (Aarogyam Hospital, Kurukshetra)
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