केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | CJI सूर्याकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना |
| मुख्य मुद्दा | जांच में सहयोग न करने पर अग्रिम जमानत रद्द करने और हिरासती पूछताछ की मांग |
| कानूनी सिद्धांत | संविधान का अनुच्छेद 20(3) [Right against Self-Incrimination/Right to Silence] बनाम धारा 438 CrPC/BNSS। |
| अदालत का फैसला | सीलबंद रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक बरकरार। |
TMC Abhisekh Banerjee PA: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय से जुड़े कथित सालबोनी भूमि घोटाला (Salboni Land-Grabbing Case) मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
यह मामला उस समय गरमा गया जब पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने शिकायत दर्ज कराई कि अग्रिम जमानत मिलने के बावजूद आरोपी सुमित रॉय जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और अधिकारियों के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान यदि किसी अभियुक्त को मौन रहने का मौलिक अधिकार (Right to Silence) प्रदान करता है, तो वहीं जांच एजेंसियों को निष्पक्ष जांच के लिए गिरफ्तारी करने का अधिकार भी देता है।
TMC Abhisekh Banerjee PA: सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां एवं बहस
- ‘मौन का अधिकार बनाम गिरफ्तारी का अधिकार’
- सुमित रॉय के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल संकरनारायणन ने तर्क दिया कि सवाल न पूछना या चुप रहना संविधान के तहत उनका मौलिक अधिकार है।
- इस पर पीठ (चीफ जस्टिस सूर्याकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “आपका मौन रहने का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित है, लेकिन संविधान जांच एजेंसी के गिरफ्तारी के अधिकार को भी सुरक्षित रखता है।”
- ‘यह सिर्फ हिमशैल का सिरा (Tip of the Iceberg) है’
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपते हुए कहा कि यह धोखाधड़ी बहुत बड़े पैमाने पर की गई है। उन्होंने कहा कि आरोपी जांच अधिकारी के सामने सिर्फ उपस्थिति दर्ज करा रहा है, लेकिन वास्तविक पूछताछ में कोई सहयोग नहीं कर रहा, इसलिए उसकी हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) आवश्यक है।
- राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
- बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि घटना के 5 साल बाद चुनाव परिणाम आने के बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जो राजनीतिक द्वेष को दर्शाती है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश SG ने इस बात पर जोर दिया कि उस समय की राज्य सरकार के प्रभाव के कारण एफआईआर दर्ज कर पाना संभव नहीं था।
TMC Abhisekh Banerjee PA: मामले की पृष्ठभूमि (Background)
- मामला: पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी में फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीनों के अवैध हस्तांतरण/कब्जे का आरोप है।
- कलकत्ता हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट: कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद रॉय ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
- अंतरिम राहत: सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त को सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें रोजाना जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।
- वर्तमान स्थिति: कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में दी गई सामग्री की समीक्षा करने का निर्णय लिया है और तब तक के लिए सुमित रॉय की अंतरिम सुरक्षा जारी रखी है।

