मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| चैलेंज किया गया नियम | Patna High Court Officers and Staff Rules, 2021 (13th & 14th Amendments) |
| मूल विवाद | रेगुलर मजदूर के 240 स्वीकृत पदों में से 40% पद जजों के घरेलू सहायकों को बिना विज्ञापन देने का प्रावधान। |
| उल्लिखित नजीर/फैसला | Renu v. District & Sessions Judge (2014) – सार्वजनिक विज्ञापन को अनिवार्य बनाने का फैसला। |
Contempt Petition: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पटना हाई कोर्ट के उस नियम के खिलाफ एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की गई है, जिसके तहत पटना हाई कोर्ट में स्वीकृत ‘रेगुलर मजदूर’ (Regular Mazdoor) के 40% पदों को जजों या मुख्य न्यायाधीश द्वारा अनुशंसित (Recommended) घरेलू सहायकों (Domestic Helps) से भरे जाने का प्रावधान किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन (Public Advertisement) या प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया (Competitive Process) के जजों के घरेलू सहायकों को नियमित सेवा में प्रवेश देने का यह नियम रेणु बनाम जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तीस हजारी (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सीधा उल्लंघन है।
Contempt Petition: रेणु (Renu) बनाम तीस हजारी कोर्ट फैसला (2014) और विवाद का कारण
- 2014 का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: Renu v. District & Sessions Judge मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हाई कोर्ट और अधीनस्थ अदालतों (Subordinate Courts) में रिक्त पदों पर नियुक्तियां केवल पारदर्शी चयन प्रक्रिया और कम से कम दो व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में सार्वजनिक विज्ञापन जारी करके ही की जानी चाहिए। बिना विज्ञापन की गई नियुक्तियों को कानूनन अमान्य (Void ab initio) माना गया था।
- संशोधित नियम 2021 (13वां और 14वां संशोधन):
- 24 जुलाई के संशोधन के तहत ‘पटना हाई कोर्ट जज डोमेस्टिक हेल्प (मॉडिफाइड) स्कीम, 2025’ के तहत 25% कोटा तय किया गया था।
- 13 अगस्त के संशोधन के जरिए इस कोटे को बढ़ाकर 40% कर दिया गया। पटना हाई कोर्ट में रेगुलर मजदूर के कुल 240 स्वीकृत पद हैं।
Contempt Petition: याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु
- मानकों में भेदभाव (Different Eligibility Criteria)
- 60% सामान्य कोटा: उम्मीदवारों को 8वीं से 12वीं के बीच पढ़ा-लिखा होना चाहिए, साइकिल चलाने का ज्ञान होना चाहिए, और उन्हें लिखित परीक्षा, स्किल टेस्ट तथा इंटरव्यू पास करना अनिवार्य है।
- 40% जज सिफारिश कोटा: इस कोटे के तहत आने वाले जजों के घरेलू सहायकों के लिए लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट जैसी शर्तों को हटा दिया गया है; उनके लिए केवल 8वीं पास होना अनिवार्य रखा गया है।
- प्रमोशन और वरिष्ठता पर असर: ‘रेगुलर मजदूर’ का पद आगे की पदोन्नतियों (Promotions) के लिए एक फीडर कैडर (Feeder Cadre) है। याचिका में कहा गया है कि प्रवेश स्तर (Entry Level) पर बिना पारदर्शिता के की गई नियुक्तियां आगे चलकर प्रतिस्पर्धी परीक्षा पास करके आए कर्मचारियों की वरिष्ठता (Seniority) और पदोन्नति के अवसरों को प्रभावित करेंगी।
- अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की मांग: याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले की अवहेलना करने के लिए बिहार के कानून सचिव बलराम दुबे और पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रूपेश देव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई (Contempt Action) शुरू करने की मांग की गई है।

