Thursday, October 15, 2026
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Bride-Groom Match: दुल्हन असली थी, यह लुटेरी दुल्हन का मामला नहीं; मैरिज ब्यूरो संचालिका को नियमित जमानत देने की याचिका पर फैसला यहां पढ़ें

गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष (Key Findings)

  • ‘लुटेरी दुल्हन’ मामला नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “लुटेरी दुल्हन” गिरोह में फर्जी शादियां कराकर शादी के तुरंत बाद नकदी और आभूषण लेकर दुल्हन भाग जाती है। इस मामले में भले ही महिला बदल गई हो, लेकिन शादी असली थी और दुल्हन भागी नहीं थी।
  • आरोपी की सीमित भूमिका: अदालत ने पाया कि आरोपी की भूमिका शिकायतकर्ता के भतीजे की शादी तय कराने तक ही सीमित थी।
  • जांच पूरी व चार्जशीट दाखिल: हाईकोर्ट ने नोट किया कि मामले में पुलिस जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और आरोपी से अब कोई अतिरिक्त रिकवरी (Baramadgi) नहीं की जानी है।
  • मुकदमे में समय लगेगा: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक अपराध साबित न हो जाए, आरोपी को निर्दोष माना जाता है। चूंकि मुकदमे के निपटारे में समय लगेगा, इसलिए आगे हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है।

अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने एक मैरिज ब्यूरो के जरिए धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार महिला को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी द्वारा कराई गई शादी “वास्तविक” (Real) थी और वह किसी “लुटेरी दुल्हन” गिरोह का हिस्सा नहीं है।

न्यायमूर्ति एच. डी. सुथार की एकल पीठ ने 27 मार्च 2026 से हिरासत में बंद कविता सोनी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है, आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल हो चुका है और आरोपी से अब कोई नई बरामदगी बाकी नहीं है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां

अदालत ने शादी की प्रकृति और आरोपी की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा: “शादी वास्तविक है और आरोपी ने विवाह संपन्न कराया था; भले ही यह किसी दूसरी महिला से हुआ हो, लेकिन शादी असली है। वह ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह की सदस्य नहीं है।”

पीठ ने आगे रेखांकित किया: “यदि अभियोजन पक्ष के आरोपों को जस का तस मान भी लिया जाए, तो आवेदक की भूमिका केवल शिकायतकर्ता के भतीजे के विवाह का वादा करने या उसे संपन्न कराने तक ही सीमित थी।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि आरोपी का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, फिर भी कानून की नजर में जब तक अपराध साबित न हो जाए, तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है। चूंकि मुकदमे के निस्तारण में समय लगेगा, इसलिए हिरासत को अनिश्चितकाल तक जारी रखने का कोई ठोस आधार नहीं है।

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मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

  • मैरिज ब्यूरो का संचालन: अभियोजन के अनुसार, कविता सोनी और उनके पति मनहर ‘दिव्य शक्ति’ नाम से एक मैरिज ब्यूरो चलाते थे। शिकायतकर्ता ने अपने भतीजे की शादी के लिए रिश्ते की तलाश में इस ब्यूरो से संपर्क किया था।
  • रुपये लेने और धोखाधड़ी का आरोप: साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में आईपीसी के तहत आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
  • शिकायतकर्ता का दावा: शिकायतकर्ता का आरोप था कि शुरुआत में तय की गई युवती के बजाय भतीजे का विवाह किसी अन्य महिला से करा दिया गया और लड़की पक्ष को देने के नाम पर ली गई राशि (कुल ₹5.10 लाख का कथित लेन-देन) परिजनों को नहीं सौंपी गई।
  • ठगी का आरोप: अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अपने भतीजे की शादी के लिए “दिव्य शक्ति” नामक मैरिज ब्यूरो चलाने वाली कविता सोनी और उनके पति से संपर्क किया था।
  • पैसे लेने का दावा: शिकायतकर्ता का आरोप था कि मैरिज ब्यूरो ने ₹2.10 लाख (कुल कथित लेन-देन ₹5.10 लाख) लिए, लेकिन भतीजे की शादी उस महिला से कराने के बजाय किसी “दूसरी महिला” से करा दी, जिसके लिए सहमति बनी थी। साथ ही दुल्हन के परिवार को देने के लिए लिए गए पैसे भी आगे नहीं दिए।
  • पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और धोखाधड़ी (Cheating) की धाराओं में मामला दर्ज कर मार्च में महिला को गिरफ्तार किया था।

जमानत की शर्तें

  • जांच पूरी: उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया कि पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी है।
  • निजी मुचलका: अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के जमानत संबंधी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कविता सोनी को ₹25,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक स्थानीय जमानत पर नियमित जमानत (Regular Bail) पर रिहा करने का आदेश दिया।

गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति एच. डी. सुथार ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा: “शादी असली है और आरोपी ने शादी करवाई है; भले ही यह किसी दूसरी महिला के साथ हुई हो, लेकिन यह असली है… वह किसी लुटेरी दुल्हन गैंग की सदस्य नहीं है। यदि हम आरोपों को जैसा है वैसा भी स्वीकार कर लें, तो आवेदक की भूमिका केवल शादी का वादा करने या कराने तक ही सीमित थी।”

Bride-Groom Match: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतगुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति एच. डी. सुथार (Justice HD Suthar)
संबंधित थाना/जिलाहिम्मतनगर ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन, साबरकांठा
आरोपी की संस्था‘दिव्य शक्ति’ मैरिज ब्यूरो (संचालक: कविता सोनी व उनके पति)
अदालत का फैसला₹25,000 के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर।
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