नियम की मुख्य विशेषताएं
- प्रधान पीठ बरकरार: साझा उच्च न्यायालय (High Court of J&K and Ladakh) की मुख्य/प्रधान पीठ (Principal Seat) उसी स्थान पर बनी रहेगी जहाँ वह इस नियम के लागू होने से ठीक पहले थी।
- लद्दाख में सिटिंग की सुविधा: यह नियम हाईकोर्ट के जजों और डिवीजन बेंचों को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के भीतर किसी भी निर्दिष्ट स्थान पर बैठकर सुनवाई करने का अधिकार देता है।
- मुख्य न्यायाधीश और एलजी का अधिकार: लद्दाख में सिटिंग की व्यवस्था हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice), लद्दाख के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) की मंजूरी से करेंगे।
- श्रीनगर या जम्मू में सुनवाई का विकल्प: परिस्थितियों के आधार पर, मुख्य न्यायाधीश के पास यह अधिकार होगा कि वे लद्दाख से जुड़े किसी भी मामले या श्रेणी के मामलों की सुनवाई श्रीनगर या जम्मू में करने का निर्देश दे सकें।
- लागू होने की प्रक्रिया: यह नियम पूरे लद्दाख क्षेत्र में लागू होगा और लद्दाख के प्रशासक/उपराज्यपाल द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करने की तिथि से प्रभाव में आएगा।
नई दिल्ली/लेह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में ‘जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय’ की एक सिटिंग बेंच (Sitting Bench) स्थापित करने के प्रावधान वाला एक ऐतिहासिक विनियम प्रख्यापित (Promulgate) किया है।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित ‘केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लद्दाख में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की पीठ की बैठक) विनियम, 2026’ (विनियम संख्या 10/2026) का उद्देश्य लद्दाख क्षेत्र के नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच को सुगम बनाना और साझा उच्च न्यायालय के कामकाज को गति देना है।
संवैधानिक एवं कानूनी आधार
यह विनियम भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति) के तहत ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019’ की धारा 58(2) के साथ पठित शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया है।
विनियम के मुख्य प्रावधान
- लद्दाख में बेंच की बैठक: नए विनियम के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और खंडपीठों (Division Benches) को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के भीतर किसी भी स्थान या स्थानों पर बैठकर मामलों की सुनवाई करने का अधिकार मिल गया है। यह व्यवस्था लद्दाख के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) की मंजूरी से मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय की जाएगी।
- प्रधान पीठ यथावत रहेगी: साझा उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ (Principal Seat) अपने पूर्ववर्ती स्थान पर ही बनी रहेगी, जहां वह इस विनियम के लागू होने से ठीक पहले स्थित थी।
- मुख्य न्यायाधीश का विवेकाधिकार: विनियम मुख्य न्यायाधीश को यह विवेकाधिकार देता है कि वे परिस्थितियों के अनुसार लद्दाख से जुड़े किसी भी मामले या मामलों के वर्ग की सुनवाई श्रीनगर या जम्मू में करने का निर्देश दे सकते हैं।
- लागू होने की तिथि: यह विनियम संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पर लागू होगा और लद्दाख के प्रशासक/उपराज्यपाल द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करने की तारीख से प्रभावी होगा।
पृष्ठभूमि
वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने के बाद लद्दाख को बिना विधानसभा वाला एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, जबकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय (High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh) की व्यवस्था रखी गई थी। लद्दाख में समर्पित बेंच की व्यवस्था होने से स्थानीय वादकारियों (Litigants) को मामलों की सुनवाई के लिए श्रीनगर या जम्मू जाने की कठिनाइयों से बड़ी राहत मिलेगी।
Bench Create: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Regulation)
| विवरण | जानकारी |
| नियम का नाम | केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (लद्दाख में उच्च न्यायालय की बैंच की बैठक) नियम, 2026 |
| संविधान/कानून के तहत अधिकार | संविधान का अनुच्छेद 240, सहपठित जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 58(2) |
| अधिसूचना तिथि | 27 अगस्त 2026 |
| मुख्य प्रावधान | लद्दाख क्षेत्र में हाईकोर्ट की बैंच की सिटिंग और जजों की सुनवाई की सुविधा |

