केस अवलोकन (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति शालिनी सिंह नागपाल (Justice Shalini Singh Nagpal) |
| याचिकाकर्ता | गगनदीप सिंह (बी.फार्मा छात्र, गुरदासपुर) |
| प्रतिवादी | पंजाब सरकार व पुलिस अधिकारी |
| कानूनी धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 (आपराधिक धमकी), 356 और 111 |
| अगली सुनवाई | 15 सितंबर 2026 |
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के बेटे उदयवीर सिंह रंधावा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर कथित धमकी भरी टिप्पणी करने के मामले में 25 वर्षीय छात्र के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) पर पंजाब पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) तलब की है।
न्यायमूर्ति शालिनी सिंह नागपाल की एकल पीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है।
यह है मुख्य बिंदु
- लगभग 1 साल से जांच लंबित: याचिकाकर्ता गगनदीप सिंह ने दलील दी कि अगस्त 2025 में दर्ज हुई इस एफआईआर के लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो जांच पूरी कर सकी है और न ही कोर्ट में चालान (चार्जशीट) पेश कर पाई है।
- डिलीटेड कमेंट और साक्ष्यों का अभाव: याचिका में कहा गया है कि जिस इंस्टाग्राम पोस्ट पर कथित कमेंट की बात कही गई है, वह मूल पोस्ट और कमेंट पेज एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा बहुत पहले ही डिलीट कर दिए गए थे। ऐसे में संदर्भ, प्रामाणिकता और प्रेषक की पहचान सिद्ध करने के लिए कोई प्राथमिक डिजिटल साक्ष्य मौजूद नहीं है।
- कैरियर और पढ़ाई पर प्रभाव: बी. फार्मा (B. Pharmacy) का छात्र होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के कारण याचिकाकर्ता ने अदालत से निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
- मूल प्राथमिकी (FIR): बटाला के कोटली सूरत मल्ली थाने में 2 अगस्त 2025 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 (आपराधिक धमकी), 356 (मानहानि) और धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
- शिकायत का आधार: शिकायतकर्ता उदयवीर सिंह रंधावा के अनुसार, 31 जुलाई 2025 को उनके इंस्टाग्राम पेज पर एक दुर्भावनापूर्ण और धमकी भरा कमेंट पोस्ट किया गया था।
- याचिकाकर्ता का रुख: याचिकाकर्ता ने किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी करने से साफ इनकार किया है। उसने बताया कि जांच एजेंसी ने न तो उसके मोबाइल फोन की कोई फोरेंसिक जांच कराई है और न ही उसके फोन से कोई मूल संदेश बरामद किया है।
अदालती कार्यवाही और निर्देश
याचिकाकर्ता के वकील दिनेश महाजन ने पीठ के समक्ष दलील दी:
- बिना किसी पुख्ता डिजिटल साक्ष्य के एक युवा छात्र के खिलाफ लंबे समय तक जांच लंबित रखना उसके मौलिक अधिकारों और भविष्य के अवसरों को प्रभावित कर रहा है।
- याचिकाकर्ता ने 7 अगस्त 2026 को पंजाब के ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के निदेशक को भी निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिवेदन दिया था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पंजाब सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) कुंवरबीर सिंह ने नोटिस स्वीकार करते हुए अदालत को बताया कि मामले की जांच चल रही है और स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने हेतु समय मांगा।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को समय देते हुए मामले को 15 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता के तर्क
- इंस्टाग्राम कमेंट और डिलीट हुई पोस्ट का विवाद
- कथित घटना: 31 जुलाई 2025 को उदयवीर रंधावा के इंस्टाग्राम पेज पर एक कमेंट किया गया था, जिसे शिकायतकर्ता ने आपत्तिजनक और धमकी भरा बताया। 2 अगस्त 2025 को बटाला के कोटली सूरत मल्ही थाने में BNS की धारा 351, 356 और 111 के तहत मामला दर्ज किया गया।
- याचिकाकर्ता का रुख: बी.फार्मा (B.Pharm) के छात्र गगनदीप सिंह ने किसी भी धमकी भरे कमेंट से इनकार किया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पेज एडमिन द्वारा मूल पोस्ट डिलीट किए जाने के कारण कथित कमेंट का सटीक शब्द, संदर्भ, लेखकत्व (Authorship) और सत्यता साबित नहीं की जा सकती।
- फॉरेंसिक जांच और निष्पक्ष जांच की मांग
- याचिकाकर्ता के वकील दिनेश महाजन ने तर्क दिया कि पुलिस ने न तो गगनदीप का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा और न ही कोई मूल डिजिटल साक्ष्य (Original Electronic Evidence) बरामद किया है।
- प्राथमिकी दर्ज हुए लगभग एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच अधूरी है और कोर्ट में चालान (Challan) पेश नहीं किया गया है, जिससे छात्र का करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।
- याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से निष्पक्ष जांच के लिए समयबद्ध निर्देश देने या किसी स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।
- राज्य सरकार का जवाब
- राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त अधिवक्ता सामान्य कुंवरबीर सिंह ने नोटिस स्वीकार करते हुए अदालत को सूचित किया कि जांच जारी है और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

