हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष (Key Findings)
- सड़क के गलत साइड पर बाइक: हाईकोर्ट ने दुर्घटना स्थल के ‘रफ स्केच’ की जांच की, जिससे साबित हुआ कि वैन सही लेन में थी, जबकि गोपाल अपनी बाइक को गलत साइड (Wrong Side) पर चला रहा था।
- बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइविंग: कोर्ट ने नोट किया कि 19 वर्षीय मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। यद्यपि लर्नर लाइसेंस का दावा किया गया, लेकिन उसका कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।
- “उत्साह” का कारक: पीठ ने कहा कि आधी रात के समय 19 साल का एक युवक अपनी प्रेमिका को पीछे बैठाकर गाड़ी चला रहा था। ऐसी स्थिति में राइडर का रोमांचित या अति-उत्साहित (Exuberant) होना स्वाभाविक है, जो ध्यान भटकने और गलत दिशा में गाड़ी चलाने का कारण बना।
- FIR पर संदेह: कोर्ट ने दुर्घटना की प्राथमिकी (FIR) पर संदेह जताया और कहा कि चश्मदीद गवाहों के बयान दावे को मजबूत करने के लिए बनाए गए प्रतीत होते हैं।
चेन्नई/मदुरै: मद्रास हाईकोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना मुआवजे के मामले में फैसला सुनाते हुए 19 वर्षीय मृतक बाइक सवार को दुर्घटना के लिए 25% जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने टिप्पणी की कि युवा सवार की बाइक पर पीछे उसकी प्रेमिका बैठी थी, और ऐसी स्थिति में किसी भी सवार का “उत्साहित” (Exuberant) होना स्वाभाविक है।
न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति एम. डी. सुमति की खंडपीठ ने पाया कि मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह सड़क की गलत दिशा (Wrong Side) में बाइक चला रहा था। अदालत ने मृतक की 25% अंशदायी लापरवाही (Contributory Negligence) तय करते हुए उसके माता-पिता को दिए जाने वाले मुआवजे में 25% की कटौती कर दी।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां
पीठ ने दुर्घटना के समय की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा: “मृतक लगभग 19 वर्ष का एक युवा था। उसकी प्रेमिका पीछे की सीट (Pillion) पर बैठी थी। जब किसी सवार की प्रेमिका पीछे बैठी हो, तो उसका उत्साहित होना स्वाभाविक है। दोपहिया वाहन पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर जा रहा था।”
सड़क की गलत दिशा में वाहन चलाने पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा: “सड़क की दाईं तरफ होना (Being on the right) यातायात नियमों के अनुसार गलत (Traffic-wrong) हो सकता है।”
मामले की पृष्ठभूमि और दुर्घटना
- 10 मई 2018 की घटना: आधी रात को 19 वर्षीय गोपाल अपनी बाइक से जा रहा था। उसकी प्रेमिका (राजेश्वरी) पीछे की सीट (Pillion) पर बैठी थी। सामने से आ रही एक वैन से उनकी आमने-सामने की टक्कर हो गई, जिसमें गोपाल की मौके पर ही मौत हो गई और प्रेमिका घायल हो गई।
- आमने-सामने की टक्कर: बाइक की एक वैन से सीधी टक्कर हो गई, जिसमें गोपाल की मौके पर ही मौत हो गई और पीछे बैठी युवती घायल हो गई।
- ट्रिब्यूनल का फैसला: थेनी स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने गोपाल के माता-पिता की याचिका पर वैन की बीमा कंपनी ‘चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस’ को ब्याज सहित ₹25.54 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
- बीमा कंपनी की अपील: बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर तर्क दिया कि दुर्घटना में मृतक की भी गलती थी, इसलिए मुआवजे की राशि में कटौती की जानी चाहिए। वैन का बीमा करने वाली कंपनी ‘चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस’ ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर तर्क दिया कि दुर्घटना में केवल वैन चालक की गलती नहीं थी, बल्कि बाइक सवार भी उतना ही जिम्मेदार था।
हाईकोर्ट द्वारा अंशदायी लापरवाही तय करने के मुख्य आधार
- सड़क का रफ स्केच (Rough Sketch): घटनास्थल के नक्शे से स्पष्ट हुआ कि वैन सड़क के अपनी सही दिशा में चल रही थी, जबकि गोपाल की बाइक गलत दिशा (Wrong Side) में थी।
- वैध ड्राइविंग लाइसेंस का अभाव: 19 वर्षीय मृतक के पास कोई वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। हालांकि लर्नर लाइसेंस होने का दावा किया गया, लेकिन अदालत के समक्ष कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया।
- आईविटनेस और एफआईआर पर संदेह: अदालत ने वैन चालक के खिलाफ लापरवाही के दावों और चश्मदीद के बयानों को अस्पष्ट पाया। इसके अलावा, एफआईआर में दर्ज विवरणों को “दावे को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया” (Tailor-made) माना गया।
अंतिम फैसला
मद्रास उच्च न्यायालय ने माना कि मृतक ने अपने आचरण से दुर्घटना में 25% का योगदान दिया था। तदनुसार, अधिकरण द्वारा तय किए गए ₹25.54 लाख के मुआवजे में 25% की कटौती करने का आदेश दिया गया और बीमा कंपनी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।
मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा: “मृतक लगभग 19 वर्ष का एक युवा था। उसकी प्रेमिका पीछे की सीट पर बैठी थी। जब किसी राइडर की प्रेमिका पीछे बैठी हो तो उसका उत्साहित (exuberant) होना स्वाभाविक है। सड़क के नक्शे से साफ है कि वह गलत साइड पर गाड़ी चला रहा था। अपने आचरण से उसने दुर्घटना में योगदान दिया, इसलिए हम मृतक की सह-लापरवाही (contributory negligence) 25% तय करते हैं।
पैरवी
- चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस की ओर से: अधिवक्ता के. आर. शिवशंकरी
- मृतक के माता-पिता की ओर से: अधिवक्ता वी. पी. राजन
- ओरिएंटल इंश्योरेंस की ओर से: अधिवक्ता सी. जवाहर रवींद्रन
Bike Ride With Girlfriend: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन एवं न्यायमूर्ति एम.डी. सुमति |
| मामला/पक्षकार | ब्रांच मैनेजर (चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस) बनाम नागापांडी व अन्य |
| दुर्घटना तिथि और स्थान | 10 मई 2018 (आधी रात), वीरपांडी-वायलपट्टी रोड |
| अदालत का फैसला | मृतक की 25% सह-लापरवाही मानी; ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवजे को 25% घटाया। |

