सुनवाई और मुख्य सुझाव
- लाइसेंस निलंबन वापस: सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद MCA के 5 Eateries के लाइसेंस का निलंबन वापस लेने (Revoke) पर सहमति व्यक्त की।
- सार्वजनिक निगरानी तंत्र (Public Oversight): मामले की सुनवाई समाप्त करते हुए पीठ ने पश्चिमी देशों और पर्यटन क्षेत्र की तर्ज पर बड़े होटलों के लिए एक जन-निगरानी तंत्र का प्रस्ताव रखा।
- छोटे स्टालों को छूट: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था बड़े रेस्टोरेंट और होटलों के लिए है, न कि छोटे वड़ा पाव या मिसल पाव सेंटरों के लिए।
- सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम का जिक्र: MCA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने कहा कि आजकल वेबसाइट्स से ज्यादा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकप्रिय हैं। इस पर पीठ ने FDA को अपने नियमों में संशोधन (Amend Rules) करने का विचार करने को कहा ताकि ऐसे डिजिटल फीडबैक तंत्र को शामिल किया जा सके।
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में खाद्य स्वच्छता (Food Hygiene) और गुणवत्ता में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अनखड़ की खंडपीठ ने ‘मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन’ (MCA) के पांच भोजनालयों के लाइसेंस निलंबन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान यह प्रस्ताव रखा। अदालत ने सुझाव दिया कि राज्य के सभी प्रमुख रेस्तरां और भोजनालय अपनी समर्पित वेबसाइटें या सोशल मीडिया हैंडल (जैसे इंस्टाग्राम) संचालित करें, जहां आम नागरिक भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और साफ-सफाई को लेकर अपनी सार्वजनिक समीक्षा (Reviews) दर्ज कर सकें।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां और सुझाव
1. पश्चिमी देशों की तर्ज पर डिजिटल ओवरसाइट (Public Oversight) सार्वजनिक निगरानी तंत्र का प्रस्ताव रखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे ने कहा: “हम एक और बात पर विचार कर रहे थे, जो समाज के हित में है और जिससे खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग को भी मदद मिलनी चाहिए। जिस तरह पश्चिमी देशों में व्यवस्था होती है, वैसे ही प्रमुख भोजनालयों के पास अपना वेब पेज क्यों नहीं होना चाहिए?”
2. केवल बड़े प्रतिष्ठानों के लिए प्रस्ताव दायरा स्पष्ट करते हुए खंडपीठ ने रेखांकित किया: “यह सुझाव केवल प्रमुख और बड़े भोजनालयों के लिए है, छोटे वड़ा पाव या मिसल पाव केंद्रों के लिए नहीं। बड़े प्रतिष्ठानों को अपना वेब पेज या सोशल मीडिया पेज रखने दें, जहां नागरिक उनकी स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और स्वाद के बारे में अपने रिव्यू अपलोड कर सकें।”
3. नियमों में संशोधन का निर्देश एमसीए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने जब यह रेखांकित किया कि आजकल वेबसाइटों से ज्यादा ‘इंस्टाग्राम’ जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकप्रिय हैं, तो पीठ ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को अपने नियमों में संशोधन कर इस तरह के जन-प्रतिक्रिया तंत्र (Public Feedback Mechanism) को अनिवार्य बनाने पर विचार करने को कहा।
मामले की पृष्ठभूमि
- एमसीए के भोजनालयों का निलंबन: महाराष्ट्र एफडीए ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के वानखेड़े परिसर स्थित पांच भोजनालयों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।
- लाइसेंस बहाली पर सहमति: हाईकोर्ट में हुई सुनवाई और अदालत के हस्तक्षेप के बाद एफडीए ने इन भोजनालयों का निलंबन वापस लेने (Revoke) पर सहमति व्यक्त की।
बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे ने सुनवाई के दौरान कहा: “हम समाज के हित और विभाग की सहायता के लिए एक और बात सोच रहे थे। जैसे पश्चिमी देशों में होता है, वैसे ही बड़े खान-पान केंद्रों की अपनी वेबपेज क्यों न हो? बड़े रेस्टोरेंट अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज रखें और नागरिकों को उस पर स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और स्वाद के बारे में अपने रिव्यू अपलोड करने दें।”
मुख्य निष्कर्ष
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पर्यटन क्षेत्र की तर्ज पर खाद्य उद्योग में भी उपभोक्ता समीक्षा और डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई, ताकि नागरिकों को सुरक्षित व स्वच्छ भोजन मिल सके और नियामक संस्थाओं पर निगरानी का बोझ भी कम हो सके।
Court On FDA Action-II: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Hearing)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| पीठासीन पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड |
| मामला/केस | Mumbai Cricket Association v. State of Maharashtra & Ors. |
| मुख्य सुझाव | FDA अपने नियमों में संशोधन कर बड़े रेस्टोरेंट के लिए वेबसाइट/सोशल मीडिया पर पब्लिक हाइजीन रिव्यू अनिवार्य करे। |
| ताजा स्थिति | हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद FDA ने MCA के रेस्टोरेंट लाइसेंस का निलंबन रद्द करने पर सहमति जताई। |

