NLU दिल्ली छात्र संघ के मुख्य बिंदु
- छात्रों की स्वायत्तता का सम्मान: NLU दिल्ली के छात्र संघ ने कहा कि स्नातक हो रहे बैच के पास दीक्षांत समारोह और अतिथियों के चयन को लेकर अपने सामूहिक विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता और स्वायत्तता होनी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारों का दायरा छात्रों की अभिव्यक्ति को दबाने तक नहीं बढ़ सकता।
- ‘In Absentia’ डिग्री का विकल्प अधूरा: छात्र संघ ने कहा कि यद्यपि प्रशासन ने डिग्रियां घर भेजने की बात कही है, लेकिन यह छात्रों द्वारा एक साथ मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण को मनाने के महत्व का विकल्प नहीं हो सकता।
- पुराने उदाहरण का हवाला: छात्र संघ ने ध्यान दिलाया कि सितंबर 2025 में NLSIU के 33वें दीक्षांत समारोह में तत्कालीन सीजेआई व चांसलर जस्टिस बी.आर. गवई का प्रतिनिधित्व तत्कालीन जस्टिस सूर्यकांत ने किया था। जब प्रतिनिधियों द्वारा दीक्षांत समारोह संपन्न कराने की परंपरा रही है, तो इस बार समारोह को पूरी तरह रद्द करने के बजाय बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए।
नई दिल्ली: नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU), दिल्ली की स्टूडेंट बार काउंसिल की गवर्निंग काउंसिल ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के 2026 बैच के छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। NLSIU प्रशासन द्वारा वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द किए जाने पर चिंता जताते हुए NLU दिल्ली की छात्र संस्था ने कहा कि छात्रों द्वारा अपनी राय या असहमति दर्ज कराने के आधार पर पूरा दीक्षांत समारोह रद्द नहीं किया जाना चाहिए था।
28 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक बयान में छात्र निकाय ने माना कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) NLSIU के पदेन कुलाधिपति (Ex-officio Chancellor) हैं, जिनका समारोह से जुड़ाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, संस्थान का प्रशासनिक नियंत्रण छात्रों की सामूहिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने तक नहीं बढ़ सकता।
NLU दिल्ली की स्टूडेंट बार काउंसिल की प्रमुख टिप्पणियां
1. छात्र स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छात्र संस्था ने विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल और स्वायत्तता पर जोर देते हुए कहा: “ग्रेजुएटिंग बैच के पास अपने दीक्षांत समारोह से जुड़े मामलों—जिसमें अतिथियों को आमंत्रित करने का विषय भी शामिल है—पर अपने सामूहिक विचार व्यक्त करने की स्वायत्तता और स्वतंत्रता होनी चाहिए। दीक्षांत समारोह के संचालन पर प्रशासनिक अधिकार छात्रों की सामूहिक अभिव्यक्ति के सार को नियंत्रित करने तक विस्तारित नहीं हो सकता।”
2. डिग्री ‘इन एब्सेंशिया’ देना सामूहिक उत्सव का विकल्प नहीं NLSIU की ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को रेखांकित करते हुए बयान में कहा गया: “NLSIU का दर्जा अपने साथ शैक्षणिक स्वतंत्रता, छात्र स्वायत्तता और संवैधानिक अभिव्यक्ति के मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी लेकर आता है। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि डिग्रियां ‘अनुपस्थिति में’ (In Absentia) प्रदान की जाएंगी, लेकिन यह उस महत्व का विकल्प नहीं हो सकता जहां पूरा बैच इस ऐतिहासिक अवसर को एक साथ मनाता है।”
3. पूर्व उदाहरण और वैकल्पिक समाधान का सुझाव NLU दिल्ली के छात्रों ने याद दिलाया कि सितंबर 2025 में आयोजित NLSIU के 33वें दीक्षांत समारोह में तत्कालीन सीजेआई और कुलाधिपति जस्टिस बी. आर. गवई का प्रतिनिधित्व तत्कालीन जस्टिस सूर्यकांत ने किया था। जब ऐसे प्रतिनिधित्व की अनुमति रही है, तो विश्वविद्यालय को बीच का रास्ता तलाशना चाहिए जो कुलाधिपति के पद और छात्रों की भावनाओं दोनों का सम्मान करता हो।
NLSIU दीक्षांत समारोह विवाद की पृष्ठभूमि
- प्रारंभिक योजना: 3 अगस्त को NLSIU प्रशासन ने घोषणा की थी कि वार्षिक दीक्षांत समारोह 12 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
- छात्रों का विरोध: 15 अगस्त को NLSIU समुदाय के 700 से अधिक सदस्यों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और सीजेआई सूर्यकांत की उपस्थिति पर आपत्ति जताई। यह विरोध नालसार (NALSAR) हैदराबाद के छात्रों के साथ BCI के विवाद के बाद उपजा था।
- सहमति और नया गतिरोध: सीजेआई सूर्यकांत द्वारा छात्रों से बातचीत के बाद यह सहमति बनी थी कि BCI अध्यक्ष कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से सीजेआई को औपचारिक रूप से सार्वजनिक आमंत्रण जारी करने की मांग की, जिसे छात्रों ने खारिज कर दिया।
- समारोह रद्द: 27 अगस्त को NLSIU प्रशासन ने “अपरिहार्य परिस्थितियों” (Unavoidable Circumstances) का हवाला देते हुए दीक्षांत समारोह रद्द करने और सभी छात्रों को ‘इन एब्सेंशिया’ डिग्री देने का नोटिस जारी कर दिया।
- सहमति का प्रयास: BCI अध्यक्ष को आमंत्रित न करने के आश्वासन के बाद छात्रों और सीजेआई के बीच बातचीत हुई थी और छात्र समारोह में शामिल होने पर सहमत हुए थे।
- सार्वजनिक बयान की मांग: बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से सीजेआई सूर्यकांत को समारोह में आमंत्रित करने वाला एक सार्वजनिक बयान जारी करने को कहा, जिसे छात्रों ने खारिज कर दिया।
- 27 अगस्त 2026 को रद्दीकरण: प्रशासन ने “अपरिहार्य परिस्थितियों” (Unavoidable Circumstances) का हवाला देते हुए 12 सितंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह को रद्द कर दिया और कहा कि डिग्रियां ‘इन एब्सेंशिया’ (in absentia – अनुपस्थिति में) दी जाएंगी।
NLU दिल्ली स्टूडेंट बार काउंसिल की टिप्पणी
NLU दिल्ली छात्र संघ ने अपने बयान में कहा: “NLSIU देश के कानूनी शिक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके गौरव के साथ यह जिम्मेदारी भी आती है कि वह अकादमिक स्वतंत्रता, छात्र स्वायत्तता और संवैधानिक अभिव्यक्ति के मूल्यों को बनाए रखे। हम यूनिवर्सिटी प्रशासन से आग्रह करते हैं कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और ऐसा रास्ता निकाले जिससे चांसलर के पद की गरिमा और छात्रों के अधिकारों दोनों का सम्मान हो सके।”
Convocation Row: एट ए ग्लान्स (At a Glance of the Dispute)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित संस्थान | NLSIU बेंगलुरु एवं NLU दिल्ली |
| विवाद का कारण | NLSIU के 2026 बैच का दीक्षांत समारोह प्रशासन द्वारा रद्द किया जाना |
| मूल घटनाक्रम | BCI अध्यक्ष और CJI की उपस्थिति का छात्रों द्वारा विरोध; बाद में आमंत्रण पत्र पर असहमति |
| NLU दिल्ली का रुख | समारोह रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार हो; छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए। |

