मुख्य कानूनी व्याख्या और निष्कर्ष
- ओरल सेक्स या गहरा प्रवेश अनिवार्य नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में इस धारा के तहत ओरल सेक्स या मुंह के भीतर गहरा प्रवेश होना अनिवार्य नहीं है:“कानून इस विशिष्ट खंड के लिए ओरल सेक्स या गहरे प्रवेश को अनिवार्य नहीं बनाता है। यौन इरादे से बच्चे के निर्दिष्ट गुप्त अंगों पर मुंह का कोई भी भौतिक स्पर्श इस धारा के दायरे को पूरा करता है। जब मुंह यौन इरादे से पेनिस को छूता है, तो इसे POCSO एक्ट की धारा 3(d) के तहत ‘भेदक लैंगिक हमला’ माना जाएगा।”
- एक से अधिक बार अपराध (Aggravated POCSO): चूंकि यह कृत्य एक ही दिन में दो बार किया गया था, इसलिए अदालत ने माना कि यह धारा 5(l) के तहत ‘गंभीर भेदक लैंगिक हमला’ (Aggravated Penetrative Sexual Assault) है, जो धारा 6 के तहत दंडनीय है।
- बाल साक्षी का बयान: हाईकोर्ट ने माना कि पीड़ित बच्चे का बयान पूरी तरह से स्पष्ट था और जिरह (Cross-examination) के दौरान बचाव पक्ष आरोपी के पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।
कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक व्याख्या दी है।
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ ने 14 वर्षीय बालक के साथ बार-बार गंभीर यौन उत्पीड़न करने के मामले में 61 वर्षीय दोषी की दोषसिद्धि और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा की पुष्टि करते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। अदालत ने फैसला सुनाया है कि POCSO एक्ट की धारा 3(d) के तहत यौन मंशा (Sexual Intent) के साथ किसी बच्चे के गुप्तांग (Penis) को चूमना या मुंह लगाना ‘पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ (Penetrative Sexual Assault) के दायरे में आता है। इसके लिए वास्तविक ओरल सेक्स या मुंह के भीतर गहराई तक प्रवेश होना अनिवार्य नहीं है [थॉमस थॉमस बनाम केरल राज्य एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. धारा 3(d) के तहत पेनेट्रेशन की परिभाषा POCSO कानून के दायरे को स्पष्ट करते हुए न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने कहा: “कानून इस विशिष्ट खंड के लिए ओरल सेक्स या मुंह में गहरे प्रवेश को अनिवार्य नहीं करता। निर्दिष्ट निजी अंगों पर मुंह से किया गया कोई भी जानबूझकर शारीरिक संपर्क इस प्रावधान के मापदंडों को पूरा करता है। जब यौन मंशा के साथ मुंह बच्चे के गुप्तांग को छूता है, तो इसे POCSO एक्ट की धारा 3(d) के तहत ‘पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, जो धारा 4/6 के तहत दंडनीय है। इसलिए, विशेष अदालत का यह निष्कर्ष पूरी तरह सही है कि आरोपी ने POCSO अधिनियम की धारा 5(l) सहपठित धारा 6 के तहत दंडनीय अपराध किया है।”
2. बार-बार अपराध और एग्रैवेडेटेड असॉल्ट अदालत ने कहा कि चूंकि आरोपी ने एक ही दिन में दो अलग-अलग मौकों पर बच्चे के साथ यह कृत्य किया, इसलिए यह अपराध धारा 5(l) (एक से अधिक बार यौन हमला) के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव यौन हमले (Aggravated Penetrative Sexual Assault) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए धारा 6 के तहत 20 साल की न्यूनतम सजा तय है।
मामले की पृष्ठभूमि और अभियोजन के तथ्य
- जनवरी 2020 की घटना: पठानमथिट्टा जिले में 61 वर्षीय आरोपी अपनी एक दुकान चलाता था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने 14 वर्षीय लड़के को शराब और गांजा दिया और फिर उसी दिन दो बार उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
- काउंसलिंग में खुलासा: नाबालिग पीड़ित ने काउंसलिंग सत्र के दौरान इस घटना का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराए गए।
- ट्रायल कोर्ट का फैसला: स्पेशल POCSO कोर्ट ने बच्चे की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को POCSO एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, 2015 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल की जेल की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट द्वारा दोषसिद्धि बरकरार रखने के मुख्य आधार
- पीड़ित बच्चे की अटूट गवाही: अदालत ने पाया कि नाबालिग पीड़ित ने घटना का स्पष्ट, सुसंगत और स्वाभाविक विवरण दिया। जिरह (Cross-examination) के दौरान बचाव पक्ष बच्चे की गवाही की विश्वसनीयता को हिलाने में असमर्थ रहा।
- झूठे आरोप की दलील खारिज: आरोपी द्वारा झूठे फंसाए जाने का दावा खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई कारण या दुश्मनी नहीं पाई गई जिससे 14 वर्षीय बालक झूठे आरोप लगाए।
विधिक प्रतिनिधित्व
- दोषी (अपीलकर्ता) की ओर से: अधिवक्ता एम.आर. ससिथ।
- राज्य सरकार की ओर से: लोक अभियोजक (Public Prosecutor) एम.ए. शिहाब।
Kissing Child’s Penis: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन |
| केस का शीर्षक | Thomas Thomas v State of Kerala & ors |
| मुख्य कानूनी धाराएं | POCSO एक्ट की धारा 3(d), 4, 5(l) सहपठित धारा 6 |
| अदालत का निर्णय | अभियुक्त की अपील खारिज; 20 साल का कारावास और सजा बरकरार। |

