हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और निर्देश
- सोशल मीडिया केस पर सर्कुलर जारी करने का आदेश: तेलंगाना हाईकोर्ट के ‘नल्ला बालू बनाम तेलंगाना राज्य’ (Nalla Balu v. State of Telangana) मामले का हवाला देते हुए, पीठ ने DGP एवं IGP को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी थानों के लिए परिपत्र (Circular) जारी करें। इसमें स्पष्ट हो कि सोशल मीडिया पोस्ट या भाषणों के मामलों में प्राथमिक जांच, शिकायतकर्ता के अधिकार (Locus Standi), और गिरफ्तारी के उच्च मानकों का पालन जरूरी है।
- उल्लंघन पर विभागीय जांच और जुर्माना: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा; उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू होगी और संवैधानिक अदालतों द्वारा उन पर व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया जाएगा।
- पुलिस अधिकारी कानून से ऊपर नहीं: हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि वर्दी पहनने से किसी अधिकारी को संवैधानिक अनुशासन से छूट नहीं मिल जाती और न ही गिरफ्तारी की शक्ति उत्पीड़न का जरिया बन सकती है।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट्स पर दर्ज होने वाले मुकदमों और गिरफ्तारी से जुड़े दिशा-निर्देशों के बार-बार उल्लंघन पर बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन को कड़ी फटकार लगाई है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक (DGP & IGP) को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े अपराधों और गिरफ्तारी प्रक्रियाओं को विनियमित करने के लिए पूरे राज्य के थानों हेतु सख्त सर्कुलर व गाइडलाइंस जारी करें। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इनकी हरकतों को देखते हुए इस थाने का नाम ‘व्हाइटफील्ड’ से बदलकर ‘डार्कफील्ड’ कर दिया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय की प्रमुख तल्ख टिप्पणियां
1. ‘व्हाइटफील्ड’ नहीं, ‘डार्कफील्ड’ पुलिस स्टेशन व्हाइटफील्ड थाने की कार्यप्रणाली और सीसीटीवी फुटेज न होने के बहाने पर अदालत ने डीसीपी को फटकारते हुए कहा: “आपकी गतिविधियां काली (Dark) हो सकती हैं, लेकिन इसका नाम व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन है। इसे हटा दीजिए और इसे व्हाइटफील्ड क्षेत्र का ‘डार्कफील्ड पुलिस स्टेशन’ बना दीजिए। क्या आप कानून के शासन (Rule of Law) से बंधे नहीं हैं? कोऑर्डिनेट बेंच लिखती है कि थाने में कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है और आप लचर जवाब देते हैं कि बिजली नहीं थी, यानी आप अंधेरे में काम करते हैं!”
2. पुलिस कानून से ऊपर नहीं है संवैधानिक मर्यादा और वर्दी के अधिकारों पर पीठ ने रेखांकित किया: “कानून के शासन से संचालित एक संवैधानिक लोकतंत्र में, पुलिस खुद में कानून नहीं है। वे कानून के उतने ही अधीन हैं जितना कि वह नागरिक जिसके खिलाफ वे कार्रवाई करते हैं। गिरफ्तारी की शक्ति उत्पीड़न का साधन नहीं बन सकती। एक सामान्य व्यक्ति द्वारा पुलिसकर्मी बनने के लिए पहनी गई वर्दी उसे संवैधानिक अनुशासन से छूट या निरंकुश अधिकार प्रदान नहीं करती।”
तेलंगाना हाईकोर्ट के ‘नल्ला बालू’ फैसले का हवाला और DGP को निर्देश
अदालत ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के बहुचर्चित नल्ला बालू बनाम तेलंगाना राज्य फैसले (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था) का संदर्भ देते हुए कर्नाटक डीजीपी को निम्नलिखित बिंदुओं पर परिपत्र (Circular) जारी करने का आदेश दिया:
- लोकस स्टैंडी (Locus Standi) और प्रारंभिक जांच: सोशल मीडिया पोस्ट या भाषण से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता के अधिकार क्षेत्र की जांच पहले की जाए और प्राथमिक जांच के उच्च मानक पूरे होने पर ही मामला दर्ज हो।
- राजनीतिक अभिव्यक्ति का संरक्षण: राजनीतिक भाषणों/पोस्ट्स को सुरक्षा, मानहानि के मामलों को गैर-संज्ञेय (Non-cognizable) अपराध मानना, और तुच्छ व दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की छंटनी सुनिश्चित करना।
- जवाबदेही और विभागीय कार्रवाई: सर्कुलर में स्पष्ट उल्लेख हो कि दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी और संवैधानिक अदालतों द्वारा उन पर व्यक्तिगत हर्जाना (Costs) लगाया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
- कुणाल कामरा के शो का विरोध: उडुपी निवासी और हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के सदस्य मोहन गौड़ा ने व्हाइटफील्ड थाने में ज्ञापन देकर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के शो से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई थी, जिसके बाद शो रद्द हो गया।
- फेसबुक पोस्ट पर स्वतः संज्ञान से केस: शो रद्द होने के बाद गौड़ा ने फेसबुक पर इसे ‘हिंदू एकता की जीत’ बताते हुए पोस्ट किया। इसके बाद व्हाइटफील्ड पुलिस ने उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo motu) लेते हुए आपराधिक मामला दर्ज कर लिया।
- हाईकोर्ट में चुनौती: मोहन गौड़ा ने इस एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
- कुणाल कामरा शो विवाद: याचिकाकर्ता मोहन गौड़ा ने व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन क्षेत्र में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के शो से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताते हुए ज्ञापन दिया था। शो रद्द होने के बाद गौड़ा ने फेसबुक पर इसे ‘हिंदू एकता की जीत’ बताते हुए पोस्ट किया।
- पुलिस की स्वतः संज्ञान कार्रवाई: व्हाइटफील्ड पुलिस ने इस सोशल मीडिया पोस्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मोहन गौड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। गौड़ा ने इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
- सीसीटीवी रिकॉर्ड में हीला-हवाली: सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि इससे पहले भी एक अन्य मामले में इसी पुलिस स्टेशन ने सीसीटीवी फुटेज न होने का बहाना (बिजली न होने की बात) बनाया था और सुप्रीम कोर्ट के गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों का बार-बार उल्लंघन किया था।
कर्नाटका हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन की कार्यशैली और DCP/ACP की मौजूदगी पर असंतोष जताते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने कहा: “आपकी गतिविधियां काली (Dark) हो सकती हैं, लेकिन नाम व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन है। इसे हटाकर व्हाइटफील्ड इलाके का ‘डार्कफील्ड पुलिस स्टेशन’ कर देना चाहिए। एक संवैधानिक लोकतंत्र में पुलिस खुद कानून नहीं बन सकती। वे भी कानून के उतने ही अधीन हैं जितना कि वह नागरिक जिसके खिलाफ वे कार्रवाई करते हैं। वर्दी किसी को संवैधानिक अनुशासन से मुक्ति नहीं देती।”
अदालत की चेतावनी
व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की निरंतर अवहेलना को देखते हुए पीठ ने डीसीपी को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में सुधार नहीं हुआ, तो उनके खिलाफ विभागीय जांच और सेवा पुस्तिका (Service Record) में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज करने का आदेश दिया जाएगा।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (मोहन गौड़ा) की ओर से: अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज।
- राज्य सरकार व पुलिस की ओर से: राज्य लोक अभियोजक (SPP) बी. एन. जगदीश।
एट ए ग्लान्स (At a Glance of Order)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटका उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (Justice M Nagaprasanna) |
| याचिकाकर्ता | मोहन गौड़ा (Mohan Gowda – हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति) |
| मामले की पृष्ठभूमि | स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के शो रद्द होने से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) FIR |
| मुख्य निर्देश | DGP को सोशल मीडिया पोस्ट्स पर FIR/गिरफ्तारी के लिए परिपत्र (Circular) जारी करने और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आदेश। |

