Tuesday, October 27, 2026
HomeScam NoseFile Disappearance: सरकारी वकील के कार्यालय से भूमि अधिग्रहण की मूल फाइल...

File Disappearance: सरकारी वकील के कार्यालय से भूमि अधिग्रहण की मूल फाइल गायब; फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार करना गंभीर मामला, जांच करें

डिवीजन बेंच का रुख और जांच का आदेश

  • मूल फाइलें मिलीं और जालसाजी पकड़ी गई: राज्य सरकार द्वारा अपील दायर किए जाने के बाद आखिरकार मूल फाइलें मिल गईं। जब मूल फाइलों का याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए ‘ए-रजिस्टर’ (A-Register) से मिलान किया गया, तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया।
  • दस्तावेजों में हेरफेर: मूल फाइलों में जमीन को “सरकारी पोरम्बोक” (Government Poramboke) और “राष्ट्रीय राजमार्ग” दर्ज किया गया था, जबकि याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश प्रति में रामसामी कोनार का नाम बाद में जोड़ा गया था।
  • कोर्ट का सख्त आदेश: 3 सितंबर के आदेश में पीठ ने कोयंबटूर के जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि:
    1. एकल पीठ की सुनवाई के दौरान फाइलें कैसे गायब हुईं, इसकी पूरी जांच की जाए।
    2. अदालत में जमा कराए गए हेरफेर किए गए ‘ए-रजिस्टर’ की निष्पक्ष जांच हो।
    3. जांच के नतीजों के आधार पर फर्जीवाड़ा और जालसाजी करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने 5 दशक पुराने भूमि अधिग्रहण मामले में सरकारी वकील (Government Pleader) के कार्यालय से महत्वपूर्ण मूल रिकॉर्ड्स के कई वर्षों तक रहस्यमय तरीके से गायब रहने और फर्जी ‘ए-रजिस्टर’ (राजस्व रिकॉर्ड) के आधार पर सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने कोयंबटूर के जिला कलेक्टर को मूल फाइलों के गायब होने और रिकॉर्ड्स में हेरफेर करने के मामले में गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है [सचिव बनाम नागराज (मृत) वारिसों के जरिए]।अदालत ने सिंगल जज के 2025 के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया जो मूल फाइलों के अभाव में निजी पक्षकारों के पक्ष में गया था।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व तीखी टिप्पणियां

1. सरकारी संसाधनों को हड़पने का सुनियोजित षड्यंत्र रिकॉर्ड्स की हेराफेरी पर टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा: “याचिकाकर्ताओं का दावा उन रिकॉर्ड्स पर आधारित था, जिनकी तुलना जब अदालत के समक्ष पेश की गई मूल फाइलों से की गई, तो वे पूरी तरह से जाली और मनगढ़ंत (Fabricated or Manipulated) प्रतीत हुए। याचिकाकर्ताओं ने राज्य के किसी विभाग में मौजूद तत्वों के साथ मिलीभगत करके सरकारी संसाधनों को हड़पने का प्रयास किया।”

2. जांच और आपराधिक प्राथमिकी का स्पष्ट निर्देश अदालत ने 3 सितंबर के अपने आदेश में कहा: “हम दूसरे अपीलकर्ता यानी जिला कलेक्टर को निर्देश देते हैं कि वह विद्वान सिंगल जज के समक्ष सुनवाई के दौरान प्रासंगिक रिकॉर्ड के गायब होने और याचिकाकर्ताओं द्वारा अदालत के समक्ष दाखिल किए गए हेरफेर युक्त ए-रजिस्टर (A-Registers) के संबंध में विस्तृत जांच करें और निष्कर्षों के आधार पर आपराधिक शिकायत (FIR) दर्ज करें।”

Read the Story; Serious Manipulation: निगरानी करने वाले जजों की अनुकूल रिपोर्ट के बावजूद चीफ जस्टिस ने बिना ठोस आधार के ACR कैसे घटाई? जानिए सब कुछ

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद (1974 से 2026)

  • 1974 का भूमि अधिग्रहण: कोयंबटूर बाईपास/आउटर रिंग रोड परियोजना के लिए पट्टनम गांव में 1974 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और 1978 में मुआवजा अवार्ड पारित किया गया था। इसमें रामासामी कोनार और उनके भाई की 4.06 एकड़ जमीन शामिल थी।
  • 2019 में मूल मालिक की मृत्यु के बाद नया विवाद: रामासामी कोनार का 2019 में निधन हो गया और उन्होंने अपने जीवनकाल में अधिग्रहण को कभी चुनौती नहीं दी। इसके बाद नागराज नामक व्यक्ति ने दावा किया कि अधिग्रहण की गई जमीन का एक हिस्सा कभी इस्तेमाल नहीं हुआ और कोनार ने 2018 में वसीयत (Will) के जरिए वह हिस्सा उसे सौंप दिया था।
  • सरकारी वकील के दफ्तर से फाइल गायब होना: 2021 में सुनवाई के लिए सरकारी फाइलें सरकारी वकील के कार्यालय लाई गईं, जहां एक ऑफिस असिस्टेंट को फाइलें दी गईं लेकिन कोई रिसीविंग नहीं ली गई। इसके बाद फाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं।
  • सिंगल जज का 2025 का फैसला: मूल रिकॉर्ड न मिलने के कारण सिंगल जज ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए राजस्व रिकॉर्ड पर भरोसा करते हुए सरकार को जमीन की आवश्यकता और मुआवजे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दे दिया था।

खंडपीठ के समक्ष हुआ फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

  • मूल फाइलों की बरामदगी: राज्य सरकार द्वारा डिवीजन बेंच में अपील दायर करने के दौरान मूल फाइलें बरामद कर ली गईं।
  • रिकॉर्ड में मिला बड़ा अंतर: मूल रिकॉर्ड्स में विवादित जमीन को “सरकारी पोरम्बोके” (Government Poramboke) और “राष्ट्रीय राजमार्ग” के रूप में दर्ज पाया गया। वहीं याचिकाकर्ताओं द्वारा अदालत में पेश किए गए ए-रजिस्टर में छेड़छाड़ कर रामासामी कोनार का नाम जोड़ा गया था।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. राज्य की अपील मंजूर: डिवीजन बेंच ने सिंगल जज का 2025 का आदेश निरस्त कर दिया।
  2. कलेक्टर को जांच और एफआईआर का आदेश: कोयंबटूर कलेक्टर को फाइल गायब होने, रिकॉर्ड में जालसाजी करने वाले विभागीय कर्मचारियों और लाभ उठाने वाले निजी पक्षकारों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • तमिलनाडु राज्य की ओर से: अपर महाधिवक्ता (AAG) पी.वी. बालसुब्रमण्यम और शासकीय अधिवक्ता के. कुमारन।
  • रिट याचिकाकर्ताओं की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल सलीम और अधिवक्ता बी. नितीश कुमार।
  • NHAI की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ए.आर.एल. सुंदरेशन और स्टैंडिंग काउंसिल एस.यू. श्रीनिवासन।

File Disappearance:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court)
पीठमुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी एवं न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन
केस का नामSecretary Vs Nagraj
मूल भूमि विवादकोयंबटूर बाईपास/आउटर रिंग रोड हेतु 1974 में अधिग्रहित जमीन (पट्टनम गांव)
मुख्य आदेशजिला कलेक्टर को फाइलों के गायब होने व फर्जी दस्तावेजों की जांच और दोषियों पर FIR का निर्देश।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
26.5 ° C
26.5 °
26.5 °
49 %
2.6kmh
100 %
Tue
27 °
Wed
30 °
Thu
22 °
Fri
23 °
Sat
30 °

Recent Comments