Tuesday, October 27, 2026
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Legal Compromise: वकील की फीस बनवाने के लिए समझौते के बावजूद ट्रायल चलाया; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस ACJM जज को फटकारा, जानिए मामला

हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • झूठे दावे पर ऐतराज: पीठ ने कहा कि जब पक्षकार खुद हाईकोर्ट आकर समझौते के आधार पर केस रद्द कराने की मांग कर रहे थे, तो यह सोचना हास्यास्पद है कि वे ट्रायल कोर्ट में उस समझौते को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे।
  • न्यायिक अधिकारी का आचरण: हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि वकील की फीस सुनिश्चित करने के लिए पक्षकारों को जबरन अवैध और मनमाने तरीके से मुकदमेबाजी में धकेलना न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
  • माफी स्वीकार की गई: हाईकोर्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील सुधीर मेहरोत्रा ने अदालत को बताया कि जज ने अपने इस आचरण के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है। उनके लंबे करियर को देखते हुए कोर्ट ने अनुशासनात्मक कार्रवाई न करते हुए केवल भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी दी।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक न्यायिक अधिकारी के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) को परिनिंदित (Censure) किया है।

न्यायमूर्ति राज बीर सिंह की एकल पीठ ने 31 अगस्त के अपने फैसले में न्यायिक अधिकारी के इस आचरण को पद की गरिमा के प्रतिकूल (Unbecoming of a Judicial Officer) करार दिया। हालांकि, अधिकारी द्वारा बिना शर्त माफी मांगने और उनके लंबे सेवा करियर को देखते हुए अदालत ने कोई दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्रवाई न करते हुए भविष्य में सतर्क रहने की सख्त चेतावनी दी। ट्रायल जज ने पक्षों के बीच विधिवत समझौता (Compromise) होने और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद आरोपी के वकील की फीस बनवाने की खातिर समझौते पर आदेश पारित करने के बजाय गवाहों को मुकरवाकर (Hostile) पूरा ट्रायल संचालित किया [अरशद एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व तीखी टिप्पणियां

1. हाईकोर्ट के आदेश और विधिक प्रावधानों की घोर अवहेलना ट्रायल जज के आचरण पर असंतोष व्यक्त करते हुए अदालत ने कहा: “पीठासीन अधिकारी का यह बयान दर्शाता है कि उनके मन में इस न्यायालय के आदेश के प्रति कोई सम्मान नहीं था। आरोपी के वकील की फीस की सुविधा के लिए उन्होंने विधिवत सत्यापित समझौते पर कोई आदेश पारित किए बिना आरोपियों को अवैध और मनमाने तरीके से ट्रायल में झोंक दिया।”

2. झूठे स्पष्टीकरण और समझौते की अनदेखी पर सवाल अदालत ने रेखांकित किया:

  • जब दोनों पक्ष स्वयं समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द कराने हाईकोर्ट गए थे, तो यह मानना कतई तर्कसंगत नहीं है कि वे निचली अदालत में समझौते पर जोर नहीं देंगे और ट्रायल का सामना करना चुनेंगे।
  • जज के स्पष्टीकरण से ही यह उजागर हुआ कि आरोपी के वकील ने अदालत से कहा था कि यदि मामला ट्रायल पर जाएगा तो उसे अपनी वकालत फीस मिल जाएगी और गवाहों के पक्षद्रोही (Hostile) बयान दर्ज कर मामले का फैसला किया जाए—जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उसी अनुरोध पर मुकदमा आगे बढ़ा दिया।

मामले की पृष्ठभूमि और ट्रायल कोर्ट का घटनाक्रम

  • समझौते का सत्यापन और हाईकोर्ट का निर्देश: मारपीट और आपराधिक धमकी के मामले में आरोपियों और पीड़ितों ने आपस में समझौता कर लिया था। हाईकोर्ट ने 8 अगस्त 2025 को ACJM / अपर सिविल जज को निर्देश दिया था कि वह समझौते के आवेदन पर उचित निर्णय लें।
  • समझौते को दरकिनार कर ट्रायल: ट्रायल जज ने समझौते को रिकॉर्ड पर सत्यापित करने के बावजूद उस पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया। इसके बजाय, आरोप तय किए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अंततः आरोपियों को दोषमुक्त (Acquit) कर दिया गया।
  • रिकॉल अर्जी पर हाईकोर्ट का संज्ञान: जब आरोपी ने हाईकोर्ट के 8 अगस्त 2025 के आदेश को वापस लेने (Recall) के लिए अर्जी दी, तब हाईकोर्ट के संज्ञान में आया कि निचली अदालत के जज ने आदेश का पालन करने के बजाय पूरा ट्रायल ही निपटा दिया है।

हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय

  1. बिना शर्त माफी स्वीकार: हाईकोर्ट की ओर से पेश वकील ने पीठ को अवगत कराया कि न्यायिक अधिकारी ने अपने आचरण के लिए बिना शर्त माफी मांग ली है। अदालत ने उनके भविष्य और सेवा काल को ध्यान में रखते हुए माफी स्वीकार कर ली और कोई विभागीय कार्रवाई की सिफारिश नहीं की।
  2. भविष्य के लिए सख्त चेतावनी: पीठ ने न्यायिक अधिकारी को भविष्य में अपने न्यायिक दायित्वों के प्रति अत्यधिक सावधान रहने की हिदायत दी।
  3. रिकॉल अर्जी का निस्तारण: चूंकि ट्रायल कोर्ट द्वारा मुकदमे का फैसला पहले ही मेरिट पर किया जा चुका है और आरोपी बरी हो चुके हैं, इसलिए 8 अगस्त 2025 के आदेश को वापस लेने की अर्जी को निरस्त कर दिया गया।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • आवेदकों (अभियुक्तों) की ओर से: अधिवक्ता अब्दुल माजिद।
  • उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से: अधिवक्ता सुधीर मेहरोत्रा।

Legal Compromise:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति राज बीर सिंह
केस का नामArshad And Another v State of UP and Another
मुख्य मुद्दासमझौते को दरकिनार कर केवल वकील की फीस के लिए ट्रायल चलाना
कोर्ट का निष्कर्षजज के आचरण की कड़ी निंदा; भविष्य के लिए सख्त चेतावनी।
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