Friday, October 2, 2026
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Decision Reaction: स्तन पकड़ना या पायजामा का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास नहीं…फैसले पर मंत्री अन्नपूर्णा देवी व सांसद स्वाति मालीवाल ने यह कहा..

Decision Reaction:केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करना चाहिए, जिसमें कहा गया था कि स्तन पकड़ना या पायजामा का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जाता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से पूरी तरह असहमत: मंत्री

लोकसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए देवी ने कहा कि वह फैसले से पूरी तरह असहमत हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने का आह्वान किया। कहा, मैं इस फैसले के पूरी तरह खिलाफ हूं और सुप्रीम कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सभ्य समाज में इस तरह के फैसले के लिए कोई जगह नहीं है। मंत्री ने फैसले के व्यापक निहितार्थों पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। मंत्री ने कहा, कहीं न कहीं इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और हम इस मामले पर आगे चर्चा करेंगे।

इस तरह के फैसले से समाज को जाएगा गलत संदेश

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को बिल्कुल गलत बताया, जिसमें कहा गया है कि स्तनों को पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार के अपराध के दायरे में नहीं आता। मालीवाल ने इस तरह के फैसले से समाज में जाने वाले संदेश पर सवाल उठाया, खासकर बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले में। “यह बेहद शर्मनाक और बिल्कुल गलत है। वे समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?

छोटी बच्ची के साथ जघन कृत्य को क्या दुष्कर्म नहीं माना जाएगा: स्वाति मालीवाल

संसद के बाहर संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि क्या एक छोटी बच्ची के साथ इस तरह के जघन्य कृत्य किए जा सकते हैं और फिर भी इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा? मालीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने और इस तरह की न्यायिक व्याख्याओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। कहा, सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में बिना देरी किए हस्तक्षेप करना चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। राज्यसभा सांसद ने कहा, उत्तर प्रदेश का ऐसा अपराध किसी भी महिला के खिलाफ हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने के दायरे में आता है, जिसका उद्देश्य उसे निर्वस्त्र करना या नग्न होने के लिए मजबूर करना है।

यह है मामला व इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 वर्षीय नाबालिग पर वर्ष 2021 में दो लोगों ने हमला किया था। जब वह अपनी मां के साथ चल रही थी, तो आरोपियों ने उसके स्तनों को पकड़ लिया, उसके पायजामे का नाड़ा फाड़ दिया और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। जब उसकी चीखें सुनकर राहगीरों ने बीच-बचाव किया तो हमलावर भाग गए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि केवल स्तनों को पकड़ना और पायजामा की डोरी तोड़ना दुष्कर्म का अपराध नहीं है।

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