हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के वाणिज्यिक स्वरूप और यूजर के अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
- प्लेटफॉर्म के अधिकार पर टिप्पणी:“मेटा इंस्टाग्राम का मालिक है। वे ऐसा कर सकते हैं। अगर आप उनकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं, तो इसका इस्तेमाल मत कीजिए।”
- वाणिज्यिक मूल्य बनाम मौलिक अधिकार: जब याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसका अकाउंट उसकी आजीविका का साधन है, तो पीठ ने कहा:“आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) से कमाई कर रहे हैं। इसलिए यह आपके लिए एक व्यावसायिक मूल्य (Commercial Value) बन जाता है; यह केवल अधिकार नहीं रह जाता।”
- लीज और स्थायी स्थान का अधिकार: पीठ ने यह भी कहा कि मध्यस्थ प्लेटफॉर्म का स्वामी है और उसने याचिकाकर्ता के पोस्ट हटाने का अधिकार रखा है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने प्लेटफॉर्म पर अपने कंटेंट को स्थायी रूप से रखने के लिए कोई “लीज” (Lease) नहीं दी थी।
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों (मध्यवर्ती संस्थाओं / Intermediaries) की सामग्री हटाने की शक्तियों, आईटी नियम 2021 की वैधता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19(1)(a)) बनाम व्यावसायिक अधिकारों के अंतर और कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायतों पर निजी कंपनियों के निर्णयों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण व तीखी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की खंडपीठ ने 17 सितंबर को याचिकाकर्ता की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित (Reserved) रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकारों के संवैधानिक दायरे पर महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणियां कीं। अदालत ने इंस्टाग्राम पर ‘@memenasha’ नाम से मीम पेज चलाने वाले एक डिजिटल क्रिएटर द्वारा अपने पोस्ट हटाए जाने और खाता निलंबित (Suspended) किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म का स्वामी होने के नाते मेटा को अपनी नीतियों के तहत कार्रवाई का अधिकार है।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की प्रमुख मौखिक टिप्पणियां
1. ‘मेटा प्लेटफॉर्म का मालिक है, असंतुष्ट हैं तो इस्तेमाल न करें’: खंडपीठ जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कोई निजी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बिना न्यायिक जांच के स्वयं कॉपीराइट उल्लंघन का फैसला नहीं कर सकता, तो खंडपीठ ने टिप्पणी की: “मेटा इंस्टाग्राम का मालिक है। वे ऐसा कर सकते हैं। यदि आप उनकी सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं, तो इसका उपयोग न करें।”
2. ‘कमाई शुरू होते ही यह अधिकार नहीं, व्यावसायिक मूल्य बन जाता है’
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि उसका इंस्टाग्राम अकाउंट उसकी आजीविका (Livelihood) का प्राथमिक साधन है, जिससे वह विज्ञापनों और ब्रांड कोलैबोरेशन के जरिए आय अर्जित करता है।
- इस पर खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में कहा:“आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) से कमाई कर रहे हैं, है न? इसलिए यह आपके लिए एक व्यावसायिक मूल्य (Commercial Value) बन जाता है; यह अब केवल एक विशुद्ध अधिकार नहीं रह जाता।”
3. प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रखने की कोई लीज नहीं ली गई है
- अदालत ने यह भी मौखिक रूप से कहा कि मध्यवर्ती प्लेटफॉर्म ही डिजिटल स्पेस का वास्तविक स्वामी है।
- अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने अपने कंटेंट को हमेशा के लिए प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखने के लिए मेटा को कोई “पट्टा या लीज” (Lease) नहीं चुकाई है, अतः प्लेटफॉर्म को अपनी सेवा शर्तों और बौद्धिक संपदा सुरक्षा नियमों के तहत सामग्री हटाने का विधिक अधिकार है।
याचिकाकर्ता की ओर से दी गई विधिक दलीलें
1. आईटी नियम, 2021 के नियम 3(1)(b)(iv) की वैधता को चुनौती
- याचिकाकर्ता के वकील ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(b)(iv) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी।
- दलील दी गई कि यह नियम मध्यवर्ती संस्थाओं (Social Media Intermediaries) को किसी तीसरे पक्ष की शिकायत पर बिना निष्पक्ष सुनवाई के बौद्धिक संपदा या कॉपीराइट उल्लंघन के नाम पर उपयोगकर्ताओं का कंटेंट हटाने की मनमानी और अनियंत्रित शक्तियां प्रदान करता है।
2. कॉपीराइट उल्लंघन न्यायिक निर्धारण का विषय है
- वकील ने तर्क दिया कि किसी सामग्री में कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह विशुद्ध रूप से तथ्यों का सवाल (Question of Fact) है।
- इसका निर्धारण केवल किसी सक्षम दीवानी अदालत (Trial Court) या न्यायिक मंच द्वारा ही किया जा सकता है, न कि किसी निजी कॉर्पोरेट मध्यवर्ती संस्था द्वारा।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (‘@memenasha’ अकाउंट विवाद)
- क्रिएटर का प्रोफाइल: याचिकाकर्ता वर्ष 2019 से डिजिटल कंटेंट बना रहा था और इंस्टाग्राम पर लगभग 39,000 फॉलोअर्स वाले अकाउंट ‘@memenasha’ का संचालन कर रहा था, जो उसकी आय का मुख्य स्रोत था।
- कॉपीराइट स्ट्राइक और पोस्ट डिलीट:
- 4 जुलाई 2025 को इंस्टाग्राम ने दो ईमेल भेजकर 2 मई और 16 जून के पोस्ट हटा दिए।
- 6 जुलाई 2025 को बिना किसी पूर्व सुनवाई के तीन अन्य पोस्ट (4 अप्रैल, 17 अप्रैल और 24 अप्रैल) भी डिलीट कर दिए गए।
- साइबर हमले का आरोप: याचिकाकर्ता ने 25 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज कराई कि कुछ विरोधी पक्षकार इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड कॉपीराइट टेस्टिंग सिस्टम का दुरुपयोग करके उसके खिलाफ फर्जी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
- खाता निलंबन और डी-एक्टिवेशन:
- 25 अगस्त 2025 को एक और शिकायत पर पोस्ट हटाने के साथ ही उसका इंस्टाग्राम अकाउंट पूरी तरह निलंबित (Suspended) कर दिया गया।
- इसके बाद अकाउंट को डी-एक्टिवेट कर दिया गया। 31 अगस्त, सितंबर, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में कई अनुस्मारक (Reminders) भेजने के बावजूद जब खाता बहाल नहीं हुआ, तो क्रिएटर ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: डिजिटल कंटेंट क्रिएटर (याचिकाकर्ता) बनाम मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक एवं अन्य [रिट याचिका (सिविल) – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून एवं नियम: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 79 (मध्यवर्तियों का दायित्व से संरक्षण / Safe Harbour Provisions); सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का नियम 3(1)(b)(iv); कॉपीराइट अधिनियम, 1957; भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार/आजीविका की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015, सुप्रीम कोर्ट) — ‘मध्यवर्ती संस्थाएं सामग्री को अदालत या अधिकृत सरकारी आदेश के बाद ही हटाने के लिए बाध्य हैं, परंतु निजी अनुबंधीय सेवा शर्तों (Terms of Service) और बौद्धिक संपदा उल्लंघन पर सेफ हार्बर की शर्तें अलग रूप से लागू होती हैं।’
- टाटा सेल्युलर बनाम भारत संघ एवं अन्य वाणिज्यिक अनुबंध मामले — ‘निजी सेवा प्रदाताओं के प्लेटफॉर्म के उपयोग की शर्तें निजी अनुबंध (Private Contract) के तहत आती हैं, जिनमें सीधे रिट क्षेत्राधिकार के तहत हस्तक्षेप करने के सीमित आधार होते हैं।’
- पीठ: मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय)
- स्थिति: पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया है।
IT Act: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court) |
| पीठ (Judges) | मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया |
| याचिकाकर्ता | इंस्टाग्राम पेज ‘@memenasha’ का संचालक (डिजिटल कंटेंट क्रिएटर) |
| प्रतिवादी/मध्यस्थ | मेटा (Meta / Instagram) व अन्य |
| चुनौती का विषय | IT नियम, 2021 के नियम 3(1)(b)(iv) की वैधता और बिना न्यायिक फैसले के अकाउंट सस्पेंशन |
| अदालत का रुख | फैसला सुरक्षित रखा; प्लेटफॉर्म मालिकों के अधिकारों पर मौखिक टिप्पणियां कीं |

