दिशा-निर्देशों के प्रमुख बिंदु और नियम
- इन क्षेत्रों में रहेगा पूर्ण प्रतिबंध:अदालत के हॉल (Court Halls), जजों के चैंबर, रजिस्ट्री कार्यालयों और अनुभागों, रिकॉर्ड रूम, सुरक्षा नियंत्रण कक्ष (Security Control Rooms), सर्वर रूम और अन्य संवेदनशील/प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
- सोशल मीडिया अपलोड पर रोक:रजिस्ट्रार जनरल या मुख्य न्यायाधीश द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना हाई कोर्ट परिसर का कोई भी वीडियो, फोटो या लाइव स्ट्रीम सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पोस्ट, शेयर या प्रसारित नहीं किया जा सकता।
- आधिकारिक वीडियोग्राफी और मीडिया कवरेज:
- आधिकारिक काम: केवल रजिस्ट्री द्वारा अधिकृत कर्मियों/एजेंसियों को ही सरकारी उद्देश्यों के लिए शूटिंग की अनुमति होगी।
- मीडिया कवरेज: प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को केवल रजिस्ट्रार जनरल द्वारा स्वीकृत स्थल, तिथि और समय पर ही कवरेज करने की अनुमति मिलेगी।
- सुरक्षा और लागू करने का अधिकार:हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारियों और सुरक्षा विंग (Security Wing) को परिसर के भीतर किसी भी अनधिकृत शूटिंग या लाइव स्ट्रीमिंग को तुरंत रोकने, प्रतिबंधित करने और उल्लंघनकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट करने का पूर्ण अधिकार होगा।
उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?
- वकील, लॉ इंटर्न या लॉ क्लर्क: मामला केरल हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA), बार काउंसिल ऑफ केरल या अन्य संबंधित प्राधिकारी के पास अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
- हाईकोर्ट कर्मचारी या अधिकारी: मामला उनके नियंत्रण अधिकारी (Controlling Officer) के पास विभागीय कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।
- मीडियाकर्मी या अन्य आगंतुक (Visitors): भविष्य के लिए कोर्ट परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है और मीडिया कवरेज की अनुमति रद्द की जा सकती है।
कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने अदालत परिसर के भीतर अनधिकृत फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग को विनियमित एवं प्रतिबंधित करने के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य अदालत परिसर की सुरक्षा, न्यायिक गोपनीयता (Privacy), अदालती गरिमा (Decorum) और न्यायिक कार्यप्रणाली के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करना है।
अधिसूचित नियमों को ‘केरल उच्च न्यायालय परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग के विनियमन हेतु सामान्य दिशानिर्देश’ (General Guidelines for the regulation of Photography, Videography and Live Streaming in the High Court premises) नाम दिया गया है। इसके तहत बिना पूर्व अनुमति के अदालत परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की तस्वीरें खींचने, वीडियो या रील्स बनाने और लाइव स्ट्रीम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नए दिशानिर्देशों के प्रमुख प्रावधान एवं प्रतिबंध
1. रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया प्रसार पर सख्त रोक
- उच्च न्यायालय परिसर में खींची गई तस्वीरों, रिकॉर्ड किए गए वीडियो या लाइव स्ट्रीम को रजिस्ट्रार जनरल या अधिकृत प्राधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, एक्स आदि) या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अपलोड करने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने या साझा करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
- केवल विशेष आयोजनों के लिए निर्धारित ऑडिटोरियम या बैंक्वेट हॉल जैसे विशिष्ट परिसरों के आवंटन नियमों के तहत या मुख्य न्यायाधीश द्वारा अधिकृत अधिकारी/रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति से ही अपवाद स्वरूप छूट दी जा सकेगी।
2. संवेदनशील व प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध
दिशानिर्देशों के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्रों में आधिकारिक प्रयोजनों के लिए विशिष्ट लिखित अनुमति के बिना फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लागू रहेगा:
- सभी अदालत कक्ष (Court Halls)
- न्यायाधीशों के चैंबर (Judges’ Chambers)
- रजिस्ट्री कार्यालय एवं अनुभाग (Registry Offices & Sections)
- रिकॉर्ड रूम (Record Rooms)
- सुरक्षा नियंत्रण कक्ष (Security Control Rooms)
- सर्वर रूम (Server Rooms) और अन्य संवेदनशील/सुरक्षित क्षेत्र
3. आधिकारिक व मीडिया कवरेज के नियम
- आधिकारिक रिकॉर्डिंग: आधिकारिक प्रयोजनों के लिए रिकॉर्डिंग केवल रजिस्ट्री द्वारा अधिकृत एजेंसियों या कर्मियों द्वारा ही की जाएगी, और इसका उपयोग केवल आधिकारिक कार्यों तक सीमित रहेगा।
- मीडिया कवरेज: प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया द्वारा आधिकारिक कार्यक्रमों की कवरेज रजिस्ट्रार जनरल या मुख्य न्यायाधीश द्वारा अधिकृत अधिकारी की अनुमति के अधीन होगी। मीडिया कर्मियों को अपनी गतिविधियां केवल स्वीकृत स्थल, तिथि और समय तक सीमित रखनी होंगी और सुरक्षा विंग के निर्देशों का पालन करना होगा।
4. सुरक्षा विंग और प्रवर्तन अधिकार
- उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के अधिकारियों और सुरक्षा विंग (Security Wing) के कर्मियों को परिसर के भीतर किसी भी अनधिकृत फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या लाइव स्ट्रीमिंग को तुरंत रोकने, बाधित करने या प्रतिबंधित करने का पूर्ण अधिकार दिया गया है।
- दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसी गतिविधि तत्काल बंद करने का निर्देश दिया जाएगा और उचित कानूनी कार्रवाई के लिए मामला रजिस्ट्री को रिपोर्ट किया जाएगा।
उल्लंघन करने पर कार्रवाई और परिणाम (Consequences of Violations)
दिशानिर्देशों में उल्लंघनकर्ताओं की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग अनुशासनात्मक और कानूनी परिणामों की रूपरेखा तय की गई है:
- अधिवक्ता, लॉ इंटर्न या लॉ क्लर्क द्वारा उल्लंघन:
- यदि कोई वकील, लॉ इंटर्न या क्लर्क इन नियमों का उल्लंघन करता है (विशेष रूप से कोर्ट परिसर से रील्स/वीडियो बनाकर आत्म-प्रचार या सोशल मीडिया पर डालना), तो मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु केरल हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (KHCAA), बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) या अन्य सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा।
- रजिस्ट्री व कोर्ट कर्मचारियों द्वारा उल्लंघन:
- यदि उल्लंघन रजिस्ट्री या परिसर में कार्यरत किसी कार्यालय के अधिकारी/कर्मचारी द्वारा किया जाता है, तो विभागीय व सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उनके नियंत्रक अधिकारी (Controlling Officer) को भेजा जाएगा।
- मीडिया कर्मी या आम आगंतुक (Visitors) द्वारा उल्लंघन:
- किसी मीडिया कर्मी या आगंतुक द्वारा उल्लंघन किए जाने पर उनके भविष्य के प्रवेश पास या कवरेज की अनुमति को तत्काल प्रभाव से रद्द या प्रतिबंधित किया जा सकेगा, साथ ही अन्य लागू कानूनी दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
विधिक विवरण
- प्राधिकरण: केरल उच्च न्यायालय (प्रशासनिक विंग)
- अधिसूचना का शीर्षक: General Guidelines for the regulation of Photography, Videography and Live Streaming in the High Court premises
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक नियम:
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 225 एवं अनुच्छेद 229 (उच्च न्यायालयों के नियम बनाने की शक्तियां एवं आंतरिक प्रशासन पर नियंत्रण)
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 (व्यावसायिक कदाचार / Professional Misconduct) एवं धारा 49(1)(c)
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) नियम – नियम 36 (अधिवक्ताओं द्वारा प्रचार व काम मांगने पर प्रतिबंध)
- न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971)
- संबद्ध न्यायिक संदर्भ:
- स्वप्निल त्रिपाठी बनाम भारत का सर्वोच्च न्यायालय (2018, सुप्रीम कोर्ट) — ‘यद्यपि अदालती कार्यवाहियों की आधिकारिक लाइव स्ट्रीमिंग खुली अदालत के सिद्धांत को बढ़ाती है, परंतु अनधिकृत रिकॉर्डिंग, छेड़छाड़ और सोशल मीडिया पर व्यावसायिक/अनुचित उपयोग अदालत की अवमानना और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है।’
- प्रभावी तिथि: तत्काल प्रभाव से लागू।
Court Live:मामले का विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित संस्थान | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| अधिसूचित नियम | कोर्ट परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग हेतु दिशा-निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | अदालत की सुरक्षा, निजता, गरिमा और मर्यादा को बनाए रखना |
| मुख्य प्रतिबंध | बिना अनुमति फोटो/वीडियो खींचना, लाइव स्ट्रीम करना और सोशल मीडिया पर पोस्ट/शेयर करना |

