At A Glance | एक नजर में
- कंज्यूमर कोर्ट का फैसला: ज्वैलरी शोरूम को खराब डायमंड रिंग को बदलने, ₹10,000 का एकमुश्त मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश।
- विवाद की वजह: महिला ने किटी स्कीम के तहत ₹48,890 में हीरे की अंगूठी खरीदी थी, जिसमें से कुछ हीरे गायब (टूटे) थे और साइज भी ठीक नहीं था।
- ज्वेलर का रुख: शोरूम ने विनिर्माण दोष (Manufacturing Defect) माना, लेकिन डकैती और अन्य बहानों का हवाला देकर बदलाव करने से इनकार कर दिया और नए स्टोन चार्जेस की मांग की।
- कानूनी निष्कर्ष: कोर्ट ने कहा कि अगर बिल या स्कीम के दस्तावेजों में “नो एक्सचेंज” (No Exchange) की शर्त नहीं लिखी है, तो ज्वेलर का इनकार पूरी तरह से अवैध है।
रोपड़ (पंजाब): आभूषण विक्रेताओं द्वारा मासिक किटी या आवर्ती जमा योजनाओं (Kitty / Monthly Recurring Schemes) के तहत दोषपूर्ण जेवरात बेचने, बाद में उन्हें बदलने से मना करने और अतिरिक्त पत्थर/डायमंड शुल्क (Stone Cost) की अनुचित मांग करने पर उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाया है।
आयोग के अध्यक्ष कुलजीत पाल सिंह और सदस्य रणवीर कौर की पीठ ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि यदि खरीद बिल (Tax Invoice) या किटी स्कीम के मूल अनुबंध में “नो एक्सचेंज” (No Exchange) की स्पष्ट शर्त लिखित रूप से दर्ज नहीं है, तो विक्रेता द्वारा उत्पाद बदलने से इनकार करना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत पूरी तरह अवैध और अनुचित व्यापार व्यवहार है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोपड़ (Ropar District Consumer Commission) ने एक 51 वर्षीय महिला उपभोक्ता के पक्ष में फैसला देते हुए ज्वैलरी शोरूम को दोषपूर्ण हीरे की अंगूठी (Diamond Ring) को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तत्काल बदलने और उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न व कानूनी खर्च के लिए ₹10,000 की एकमुश्त क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है।
उपभोक्ता आयोग के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं अवलोकन
1. ‘ग्राहक की गलती के बिना अतिरिक्त शुल्क या एक्सचेंज से इनकार नहीं किया जा सकता’ आयोग ने 2 सितंबर 2026 को पारित अपने आदेश में ज्वैलर की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “चूंकि उत्पाद/सामग्री स्पष्ट रूप से दोषपूर्ण (Defective) थी, परंतु विपक्षी पक्ष ने शिकायतकर्ता के बार-बार किए गए अनुरोधों पर कोई ध्यान न देते हुए उसे बदलने से साफ इनकार कर दिया। चूंकि उपभोक्ता द्वारा पूरा भुगतान किया जा चुका था, इसलिए विपक्षी पक्ष न तो एक्सचेंज से इनकार कर सकता है और न ही दोबारा स्टोन चार्ज जैसे नए शुल्क थोप सकता है—विशेष रूप से तब जब उस दोष में शिकायतकर्ता की कोई गलती नहीं थी।”
2. ‘नो एक्सचेंज’ की अलिखित शर्तों की विधिक अमान्यता
- आयोग ने रेखांकित किया कि विक्रेता अक्सर विवाद होने पर मनगढ़ंत नियमों का हवाला देते हैं।
- पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि “नो एक्सचेंज” या “नो रिप्लेसमेंट” जैसी कोई शर्त खरीद के समय जारी किए गए बिल या स्कीम से जुड़े ब्रोशर/दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं थी, तो विवाद उत्पन्न होने के बाद ऐसी शर्तों का मौखिक हवाला देकर एक्सचेंज से मना करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
3. एकतरफा कार्यवाही (Ex-parte Order) और सेवा में कमी
- उपभोक्ता आयोग द्वारा नोटिस तामील होने के बावजूद ज्वैलरी शोरूम प्रबंधन और उसका सेल्स एग्जीक्यूटिव आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए।
- अदालत ने विपक्षी पक्ष के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) कार्यवाही करते हुए माना कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत पक्के बिल, किटी पासबुक और भुगतान रसीदें सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार को निर्विवाद रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: ‘किटी स्कीम’ से दोषपूर्ण अंगूठी तक
- मासिक किटी भुगतान: 51 वर्षीय महिला ने ज्वैलरी ब्रांड की 22 महीने की किटी/आरडी स्कीम में ₹2,000 प्रति माह के हिसाब से कुल ₹44,000 का अग्रिम भुगतान किया था।
- अंगूठी की डिलीवरी और अतिरिक्त भुगतान: किटी राशि पूरी होने के बाद 25 सितंबर 2025 को उन्होंने एक डायमंड रिंग का चयन किया और समायोजित राशि के अतिरिक्त ₹4,890 का नकद भुगतान किया (कुल लागत: ₹48,890)।
- मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट: अंगूठी प्राप्त करने के कुछ ही दिनों भीतर पीड़िता ने देखा कि अंगूठी से कुछ हीरे गायब (Missing Diamonds) थे और उसका साइज भी निर्धारित माप के अनुसार सही नहीं था।
- शोरूम का टालमटोल और लूट की दलील: जब महिला ने शोरूम से संपर्क किया, तो सेल्स एग्जीक्यूटिव ने निर्माण दोष (Manufacturing Defect) की बात मौखिक रूप से स्वीकार की, परंतु यह बहाना बनाकर समाधान टाल दिया कि शोरूम में हाल ही में डकैती/चोरी हो गई है और सामान्य कामकाज बहाल होने पर अंगूठी बदल दी जाएगी।
- बदलने से इनकार व अतिरिक्त मांग: बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो पीड़िता ने औपचारिक लीगल नोटिस भेजा। इसके जवाब में ज्वैलर ने अंगूठी बदलने से इनकार कर दिया और नए सिरे से स्टोन की लागत मांगी, जिसके बाद महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता संरक्षण की दृष्टि से फैसले का विधिक महत्व
- दोषपूर्ण उत्पाद पर पूर्ण संरक्षण: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत यदि किसी उत्पाद में निर्माण दोष (Manufacturing Defect) है, तो विक्रेता/निर्माता का यह दायित्व है कि वह या तो बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उस दोष को दूर करे, उत्पाद को नए से बदले, या पूरा पैसा वापस करे।
- किटी/ईएमआई स्कीमों में पारदर्शिता: यह निर्णय आभूषण उद्योग में चलने वाली स्वर्ण/हीरा किटी योजनाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि अग्रिम किश्तों में धन जुटाने के बाद ग्राहक को घटिया उत्पाद सौंपना और नियमों की अस्पष्टता की आड़ में मनमाने शुल्क थोपना गंभीर कानूनी उल्लंघन माना जाएगा।
विधिक विवरण
- फोरम: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोपड़ (पंजाब)
- पीठ: कुलजीत पाल सिंह (अध्यक्ष) एवं रणवीर कौर (सदस्य)
- आदेश की तिथि: 2 सितंबर 2026
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019:
- धारा 2(10) (दोष – ‘Defect’ की परिभाषा)
- धारा 2(11) (सेवा में कमी – ‘Deficiency in Service’)
- धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार – ‘Unfair Trade Practice’)
- धारा 39 (दोषपूर्ण उत्पाद को बदलने और हर्जाना दिलाने का आयोग का आदेश)
- भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 (नियम व शर्तों के लिखित प्रकटीकरण का सिद्धांत)
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019:
- आयोग द्वारा प्रदत्त कुल राहत:
- दोषपूर्ण डायमंड रिंग के बदले उसी मूल्य की नई दोषरहित अंगूठी देने का आदेश (बिना किसी अतिरिक्त मेकिंग या स्टोन चार्ज के)।
- मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी के खर्च हेतु: ₹10,000 का एकमुश्त हर्जाना।
Recurring Scheme: Key Indicators | मुख्य बिंदु
| संकेत बिंदु | विवरण |
| उपभोक्ता फोरम | जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रोपड़/रूपनगर (अध्यक्ष कुलजीत पाल सिंह व सदस्य रणवीर कौर) |
| शिकायतकर्ता | 51 वर्षीय स्थानीय महिला |
| स्कीम का विवरण | ₹2,000 प्रति माह (22 महीने की किटी स्कीम = ₹44,000) + ₹4,890 अतिरिक्त भुगतान (कुल कीमत: ₹48,890) |
| खरीद की तारीख | 25 सितंबर 2025 |
| अदालत की कार्यवाही | नोटिस के बावजूद शोरूम की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद एकतरफा (Ex-Parte) फैसला सुनाया गया। |

