मुख्य संकेतक और अदालती निर्देश (Key Highlights)
- बिना किसी भेदभाव के अंगदान की इच्छा:याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि वह बिना किसी वित्तीय लाभ, जाति, धर्म या व्यक्तिगत संबंध के किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान करना चाहता है। उसने अपनी और प्राप्तकर्ता की गोपनीयता (Confidentiality) बनाए रखने का अनुरोध किया था।
- परिवार की सहमति और मेडिकल रिपोर्ट:2016 में भाई के विरोध के कारण प्रक्रिया रुक गई थी, लेकिन अब मां और भाई की सहमति मिलने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। विक्टोरिया अस्पताल की मेडिकल जांच रिपोर्ट (21 सितंबर) में पाया गया कि याचिकाकर्ता पूरी तरह स्वस्थ है और दान से जुड़े सभी चिकित्सीय जोखिमों को समझने के बाद यह फैसला ले रहा है।
- गोपनीयता और SOTTO को जिम्मेदारी:
- प्राप्तकर्ता का चयन: राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) वरिष्ठता और मरीज की गंभीर स्थिति (Criticality) के आधार पर उपयुक्त प्राप्तकर्ता का चयन करेगा।
- पहचान की गोपनीयता: अदालत ने सख्त आदेश दिया कि ट्रांसप्लांट पूरा होने तक प्राप्तकर्ता और उसके परिवार की पहचान याचिकाकर्ता से पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
- राज्य सरकार बनाएगी पारदर्शी नीति:अदालत ने कहा कि स्पष्ट प्रक्रिया न होने के कारण दाताओं को हर बार हाईकोर्ट आना पड़ता है, जिससे काफी समय बर्बाद होता है। राज्य सरकार के अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता मोहम्मद जाफर शाह ने कोर्ट को बताया कि निःस्वार्थ अंगदान को सुगम बनाने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन्स तैयार की जा रही हैं, जिन्हें 8 हफ्तों के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
बेंगलुरु: वित्तीय लाभ या पारिवारिक रिश्ते के बिना किसी अनजान जरूरतमंद मरीज को स्वेच्छा से अंगदान करने (Altruistic Living Organ Donation) के कानूनी, नैतिक और प्रक्रियात्मक ढांचे पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक व्यवस्था दी है।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने विक्टोरिया अस्पताल, बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रो यूरोलॉजी (Institute of Nephro Urology) द्वारा प्रस्तुत मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय ने एक 52 वर्षीय अविवाहित पुरुष को किसी जरूरतमंद और सुसंगत गैर-संबंधी प्राप्तकर्ता (Unrelated Recipient) को परोपकारवश अपनी एक किडनी दान करने की सशर्त औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि राज्य में असंबंधित परोपकारी अंगदान को विनियमित करने के लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट नीति नहीं थी, परंतु स्वास्थ्य विभाग अब इस संबंध में व्यापक दिशानिर्देश (Guidelines for Altruistic Organ Donation) तैयार कर रहा है, जिसका प्रथम ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे 8 सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निर्देश एवं सुरक्षात्मक शर्तें
1. SOTTO के माध्यम से आवंटन और वरिष्ठता सूची:
- अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की किडनी दान की प्रक्रिया राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO – State Organ and Tissue Transplant Organisation) की विधिक मंजूरी और पर्यवेक्षण के अधीन होगी।
- SOTTO कर्नाटक भर में प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों की वरिष्ठता (Seniority Matching) और चिकित्सकीय अनिवार्यता/गंभीरता (Criticality of Requirement) के आधार पर सबसे उपयुक्त प्राप्तकर्ता की पहचान करेगा।
2. दाता और प्राप्तकर्ता की पहचान की पूर्ण गोपनीयता (Strict Confidentiality):
- अंगदान के दुरुपयोग, संभावित वित्तीय लेन-देन या भावनात्मक दबाव को रोकने के लिए पीठ ने कड़ा सुरक्षात्मक आदेश दिया:“प्रत्यारोपण प्रक्रिया पूरी होने तक और उसके बाद भी प्राप्तकर्ता (Recipient), उसके परिवार के सदस्यों और उससे जुड़े विवरणों की पहचान याचिकाकर्ता (अंगदाता) के समक्ष पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अंगदान के पश्चात केवल प्राप्तकर्ता की लिखित सहमति होने पर ही पहचान उजागर की जा सकेगी।”
3. सरकार को 8 सप्ताह में पॉलिसी अंतिम रूप देने का समय:
- अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) मोहम्मद जाफर शाह ने अदालत को सूचित किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा परोपकारी जीवित अंगदान के लिए दिशानिर्देशों का पहला मसौदा तैयार कर लिया गया है।
- अदालत ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को नीति को अंतिम रूप देने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए 23 नवंबर 2026 तक का समय दिया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: 2016 से शुरू हुआ परोपकारी प्रयास
- याचिकाकर्ता का व्यक्तिगत विवरण: 52 वर्षीय याचिकाकर्ता एक अविवाहित व्यक्ति हैं, जो पिछले 16 वर्षों से अधिक समय से स्वतंत्र रूप से रह रहे हैं। उनके निकटतम परिजनों में उनकी वृद्ध माता और एक भाई हैं, परंतु दोनों में से कोई भी उन पर वित्तीय या अन्य रूप से आश्रित नहीं है।
- निःस्वार्थ अंगदान की इच्छा: याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि वे किसी भी वित्तीय प्रतिफल या व्यक्तिगत लाभ के बिना, केवल मानवता के नाते किसी भी जरूरतमंद मरीज को—चाहे उसकी जाति, धर्म, सामाजिक या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो—अपनी एक किडनी दान करना चाहते हैं।
- 2016 का पूर्ववर्ती प्रयास: याचिकाकर्ता ने वर्ष 2015-16 में भी एक अस्पताल से संपर्क किया था और 4 जून 2016 को एक मैचिंग मरीज की पहचान भी हो गई थी, परंतु उस समय उनके भाई द्वारा आपत्ति जताए जाने के कारण प्रत्यारोपण रुक गया था। बाद में माता और भाई दोनों की लिखित सहमति मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- अस्पताल की मेडिकल व काउंसलिंग रिपोर्ट (21 सितंबर 2026):
- अदालत के 25 अगस्त के आदेश के बाद इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रो यूरोलॉजी द्वारा याचिकाकर्ता की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई।
- रिपोर्ट में उन्हें किडनी दान के लिए पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट (Medically Fit) पाया गया।
- डॉक्टरों ने याचिकाकर्ता को भविष्य में होने वाले संभावित जोखिमों—जैसे रीनल व कार्डियोवैस्कुलर जटिलताएं, नियमित फॉलो-अप की अनिवार्यता—के बारे में विस्तृत परामर्श (Counseling) दिया, जिसे समझकर उन्होंने पूर्णतः स्वैच्छिक और सूचित सहमति (Informed Consent) दी।
Organ Donation: विधिक एवं नीतिगत आवश्यकता: ‘समयबद्ध तंत्र का अभाव’
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एस.वी. जोगा राव ने अदालत के संज्ञान में लाया कि समाज में कई ऐसे परोपकारी नागरिक हैं जो बिना किसी रिश्ते के जरूरतमंदों को अंगदान करना चाहते हैं, परंतु स्पष्ट राज्य नीति के अभाव में उन्हें हर बार हाईकोर्ट का चक्कर लगाना पड़ता है:
- अंग प्रत्यारोपण में समय की संवेदनशीलता: अदालत ने 25 अगस्त के आदेश में रेखांकित किया था कि अंग प्रत्यारोपण अत्यधिक समय-संवेदनशील (Time-sensitive) प्रक्रिया है। प्रशासनिक देरी या नीतिगत शून्यता के कारण मरीज की जान जा सकती है।
- परोपकारी दान (Altruistic Donation) बनाम व्यावसायिक शोषण: मानव अंग प्रत्यारोपण कानून व्यावसायिक खरीद-फरोख्त पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, परंतु यह वास्तविक परोपकारी दान को हतोत्साहित नहीं करता। इसलिए अनधिकृत वित्तीय सौदों को रोकने और वास्तविक परोपकार को सुगम बनाने के लिए पारदर्शी नीति अनिवार्य है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: याचिकाकर्ता बनाम कर्नाटक राज्य व अन्य [रिट याचिका (सिविल) – कर्नाटक उच्च न्यायालय, प्रधान पीठ Bengaluru]
- पीठ: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (एकल पीठ)
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: अधिवक्ता एस.वी. जोगा राव
- राज्य सरकार की ओर से: अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) मोहम्मद जाफर शाह
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (THOTA, 1994):
- धारा 9(3) (निकट संबंधी के अलावा अन्य व्यक्तियों द्वारा केवल स्नेह, लगाव या विशेष कारणों से अंगदान की अनुमति हेतु अधिकृत समिति की स्वीकृति)
- धारा 19 (अंगों के व्यावसायिक सौदों और खरीद-फरोख्त पर कठोर कारावास का दंड)
- मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नियमावली, 2014
- भारत का संविधान:
- अनुच्छेद 21 (प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता, स्वास्थ्य और जीवन रक्षा का अधिकार)
- अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का असाधारण रिट क्षेत्राधिकार)
- मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (THOTA, 1994):
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- कुलदीप सिंह बनाम तमिलनाडु राज्य (2005, सुप्रीम कोर्ट) — ‘असंबंधित व्यक्तियों के बीच अंगदान में अधिकृत समिति (Authorisation Committee) का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि दान के पीछे कोई वित्तीय लेन-देन या व्यावसायिक शोषण नहीं है।’
- पार्थसारथी बनाम केरल राज्य (केरल हाईकोर्ट) — ‘यदि कोई नागरिक पूरी तरह स्वस्थ दिमाग से और बिना किसी दबाव के परोपकारी अंगदान करना चाहता है, तो राज्य को प्रक्रियात्मक जटिलताओं से उसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए।’
- अदालत का अंतिम आदेश: SOTTO की मंजूरी और पूर्व शर्तों के अधीन किडनी दान की अनुमति; दान से पूर्व और बाद में प्राप्तकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आदेश; राज्य सरकार को 8 सप्ताह में परोपकारी अंगदान नीति अधिसूचित करने का निर्देश; अनुपालन रिपोर्ट हेतु अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को नियत।
Organ Donation: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (Justice Suraj Govindaraj) |
| याचिकाकर्ता | 52 वर्षीय अविवाहित व्यक्ति (16 वर्षों से स्वतंत्र रूप से रह रहा है) |
| मुख्य निर्णय | SOTTO की मंजूरी के तहत अनजान जरूरतमंद मरीज को गुर्दा दान करने की अनुमति। |
| नीतिगत विकास | कर्नाटक सरकार 8 सप्ताह में ‘Altruistic Living Organ Donation’ पर नीति तैयार करेगी। |
| अगली सुनवाई | 23 नवंबर 2026 (गाइडलाइन्स की अनुपालन रिपोर्ट के लिए) |

