मुख्य विवाद और याचिकाकर्ताओं के तर्क (Key Arguments)
- 113 में से 0 चयन:गुजरात हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत जिला न्यायाधीश के 113 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। प्रारंभिक परीक्षा में 729 उम्मीदवारों में से केवल 31 मुख्य परीक्षा में पहुंचे। मुख्य परीक्षा के बाद केवल 2 उम्मीदवार—मानसी जैन और विशाल बलजीत सिंह—मौखिक साक्षात्कार (Viva-Voce) तक पहुंचे। हालांकि, 9 जुलाई 2026 को जारी अंतिम परिणाम में सभी 113 पद खाली छोड़ दिए गए।
- लिखित परीक्षा में अव्वल, इंटरव्यू में फेल:
- मानसी जैन ने मुख्य लिखित परीक्षा में 200 में से 100.5 अंक प्राप्त किए, लेकिन साक्षात्कार में 50 में से केवल 9.6 अंक दिए गए।
- विशाल बलजीत सिंह ने लिखित परीक्षा में 110.5 अंक प्राप्त किए, लेकिन साक्षात्कार में केवल 10 अंक मिले।
- नियमानुसार साक्षात्कार पास करने के लिए 50 में से न्यूनतम 20 अंक प्राप्त करना अनिवार्य था।
- इंटरव्यू में अत्यधिक विशेषाधिकार और ‘अजय हसिया’ फैसला:याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि केवल 5 मिनट के संक्षिप्त साक्षात्कार के आधार पर लिखित परीक्षा के अंकों को पूरी तरह बेअसर कर दिया गया। याचिका में संविधान पीठ के प्रसिद्ध फैसले ‘अजय हसिया बनाम खालिद मुजीब सेहरावर्दी’ (Ajay Hasia v. Khalid Mujib Sehravardi) का हवाला देते हुए कहा गया कि मौखिक साक्षात्कार अत्यधिक व्यक्तिगत/आत्मनिष्ठ (Subjective) होते हैं और सार्वजनिक भर्तियों में इन्हें अनुचित या अत्यधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
- पिछले 7 वर्षों का चौंकाने वाला आंकड़ा:याचिका में उजागर किया गया कि पिछले 7 वर्षों में गुजरात हाई कोर्ट ने 5 भर्ती अभियानों के तहत कुल 264 अधिसूचित रिक्तियों (2019 में 26, 2020 में 34, 2022 में 34, 2023 में 57 और 2024-25 में 113) के मुकाबले केवल 1 उम्मीदवार की नियुक्ति की है।
नई दिल्ली: देश भर की उच्चतर न्यायिक सेवाओं (Higher Judicial Service – HJS) में जिला न्यायाधीशों की सीधी भर्ती प्रक्रियाओं, न्यूनतम कट-ऑफ के नाम पर सैकड़ों रिक्तियों को खाली छोड़ने की प्रवृत्ति और मुख्य लिखित परीक्षा के मुकाबले इंटरव्यू (Viva Voce) को अत्यधिक वेटेज देकर उम्मीदवारों को बाहर करने की व्यवस्था पर देश की सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक सुधारात्मक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा जिला न्यायाधीश (District Judge) के 113 पदों पर 25% सीधी भर्ती कोटे (Direct Recruitment Quota) के तहत आयोजित चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली दो अधिवक्ताओं (मानसी जैन और विशाल बलजीत सिंह) की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस परीक्षा में मुख्य लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले एकमात्र दो उम्मीदवारों को इंटरव्यू में 50 में से अनिवार्य 20 अंक न देकर अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया, जिसके चलते सभी 113 अधिसूचित पद बिना किसी नियुक्ति के खाली रह गए। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्टूबर 2026) को स्पष्ट किया कि वह केवल एक राज्य की भर्ती तक सीमित रहने के बजाय संपूर्ण न्यायिक भर्ती एवं परीक्षा प्रक्रिया में सुधार (Reforming the Entire Judicial Recruitment/Examination Process) के लिए एक समग्र राष्ट्रीय नीतिगत पहल तैयार करना चाहता है।
सुप्रीम कोर्ट का मौखिक अवलोकन: राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती सुधार की मंशा
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि गुजरात हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने अंकों और मूल्यांकन का रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे (Sealed Cover) में पेश कर दिया है और नियमों के तहत संबंधित उच्च न्यायालय से उम्मीदवारों की चरित्र रिपोर्ट (Character Report) मंगाई जानी चाहिए थी, तो न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने व्यापक संस्थागत दृष्टिकोण सामने रखा: “हम संपूर्ण न्यायिक परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में सुधार (Reforming the Entire Examination Process) के लिए कुछ ठोस पहल और रूपरेखा तैयार करने में अधिक रुचि रखते हैं।”
- CJI की पीठ के समक्ष सुनवाई: खंडपीठ ने मामले की व्यापकता और नीतिगत महत्व को देखते हुए निर्देश दिया कि इस याचिका पर तब सुनवाई की जाए जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी वर्तमान पीठ संयोजन (Bench Combination) में उपस्थित हों।
- सीलबंद रिकॉर्ड लिया गया: अदालत ने अपने औपचारिक आदेश में दर्ज किया:“रजिस्ट्रार सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट के साथ उपस्थित हैं। सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया जाता है। मामले को नियत तिथि पर सूचीबद्ध किया जाए। रजिस्ट्रार की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाती है।”
क्या है गुजरात जिला जज भर्ती (2024-25) का विवाद?
याचिकाकर्ताओं—अधिवक्ता मानसी जैन और अधिवक्ता विशाल बलजीत सिंह—ने गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 9 जुलाई 2026 को घोषित अंतिम चयन परिणाम को रद्द करने और एक निष्पक्ष, पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया आयोजित करने की मांग की है:
- 113 पदों पर शून्य चयन (Zero Selections):
- गुजरात हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को 25% बार कोटे के तहत जिला न्यायाधीश के 113 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था।
- चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा, गुजराती भाषा परीक्षा, मुख्य लिखित परीक्षा और मौखिक साक्षात्कार (Viva Voce) शामिल थे।
- प्रारंभिक परीक्षा में शामिल 729 उम्मीदवारों में से मात्र 31 मुख्य लिखित परीक्षा के लिए अर्ह हुए।
- अंततः केवल दो याचिकाकर्ता ही मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू (Viva Voce) तक पहुंचे।
- इंटरव्यू में अनुत्तीर्ण कर 113 पद खाली छोड़े गए:
- मानसी जैन: 200 अंकों की मुख्य लिखित परीक्षा में 100.5 अंक प्राप्त किए, परंतु 50 अंकों के इंटरव्यू में उन्हें मात्र 9.6 अंक दिए गए।
- विशाल बलजीत सिंह: 200 अंकों की लिखित परीक्षा में 110.5 अंक प्राप्त किए, परंतु इंटरव्यू में उन्हें मात्र 10 अंक दिए गए।
- चूंकि नियमों के तहत साक्षात्कार में न्यूनतम 40% (50 में से 20 अंक) लाना अनिवार्य था, इसलिए दोनों को अयोग्य घोषित कर दिया गया और सभी 113 पद खाली छोड़ दिए गए।
पिछले 7 वर्षों में 264 पदों के मुकाबले मात्र 1 नियुक्ति (चौंकाने वाले आंकड़े)
याचिका में गुजरात उच्च न्यायालय के अधीन सीधी भर्ती कोटे के चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए गए हैं:
- पिछले 7 वर्षों में 5 अलग-अलग भर्ती अभियानों में कुल 264 पदों का विज्ञापन निकाला गया, परंतु नियुक्त केवल 1 अभ्यर्थी हुआ:
- वर्ष 2019: 26 पद
- वर्ष 2020: 34 पद
- वर्ष 2022: 34 पद
- वर्ष 2023: 57 पद
- वर्ष 2024-25: 113 पद
- याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बार कोटे से आने वाले योग्य वकीलों को साक्षात्कार में अत्यधिक व्यक्तिपरक (Subjective) तरीके से बाहर का रास्ता दिखाकर अधीनस्थ न्यायपालिका में रिक्तियों का कृत्रिम संकट खड़ा किया जा रहा है।
विधिक एवं संवैधानिक तर्क: अजय हासिया नजीर और इंटरव्यू का असंगत प्रभाव
- अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब (संविधान पीठ नजीर):
- याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 5-जज संविधान पीठ के निर्णय अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब सहरावर्दी (1981) पर भरोसा जताया गया है।
- इस फैसले में सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रूप से व्यवस्था दी थी कि मौखिक साक्षात्कार (Viva Voce) स्वभाव से अत्यधिक व्यक्तिपरक (Inherently Subjective) होते हैं और सार्वजनिक भर्तियों में इंटरव्यू को इतना असंगत वेटेज या ‘वीटो पावर’ नहीं दिया जा सकता जो लिखित परीक्षा की समग्र योग्यता को पूरी तरह शून्य कर दे।
- मात्र कुछ मिनटों का संक्षिप्त साक्षात्कार:
- याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 30 अप्रैल 2026 को आयोजित साक्षात्कार मात्र कुछ मिनटों तक चला, जो किसी उम्मीदवार की न्यायिक क्षमता, विधिक ज्ञान और योग्यता का आकलन करने के लिए पूरी तरह अपर्याप्त था।
- मांगी गई अंतरिम राहत:
- याचिकाकर्ताओं ने 9 जुलाई 2026 के अंतिम परिणाम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने तथा इस मामले के लंबित रहने के दौरान गुजरात हाईकोर्ट को इन 113 पदों पर कोई नया भर्ती विज्ञापन जारी करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश की प्रार्थना की है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: मानसी जैन व अन्य बनाम रजिस्ट्रार जनरल, गुजरात उच्च न्यायालय [रिट याचिका (सिविल) संख्या 925/2026 – भारत का सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (आगे की सुनवाई CJI की संयोजन पीठ के समक्ष)
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण
- प्रतिवादी (गुजरात हाईकोर्ट रजिस्ट्री) की ओर से: रजिस्ट्रार (व्यक्तिगत रूप से सीलबंद रिपोर्ट के साथ)
- प्रासंगिक संवैधानिक व वैधानिक प्रावधान:
- भारत का संविधान:
- अनुच्छेद 233 (जिला न्यायाधीशों की बार से 25% कोटे के तहत सीधी नियुक्ति)
- अनुच्छेद 14 एवं 16 (सार्वजनिक नियोजन में समानता, मनमानेपन के विरुद्ध अधिकार)
- अनुच्छेद 32 (मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता)
- गुजरात उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली (इंटरव्यू में न्यूनतम अर्हक अंकों की अनिवार्यता)
- भारत का संविधान:
- संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
- अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब सहरावर्दी (1981, 5-जज संविधान पीठ) — ‘मौखिक साक्षात्कार को सार्वजनिक चयन में अनुचित महत्व नहीं दिया जा सकता; अत्यधिक कट-ऑफ मनमाना और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।’
- मलिक मजहर सुल्तान बनाम यूपी लोक सेवा आयोग (सुप्रीम कोर्ट) — ‘जिला न्यायपालिका में रिक्तियों का समयबद्ध भराव और न्यायिक अवसंरचना की मजबूती संस्थागत दायित्व है।’
- ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2002, 3-जज बेंच) — ‘बार से सीधी भर्ती के माध्यम से 25% कोटा न्यायिक प्रणाली में ताजगी और विधिक प्रतिभा लाने के लिए अनिवार्य रूप से भरा जाना चाहिए।’
- वर्तमान स्थिति: सीलबंद लिफाफे में मूल्यांकन रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरक्षित; देशव्यापी न्यायिक भर्ती सुधारों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उपस्थिति वाली पीठ के समक्ष विस्तृत सुनवाई शीघ्र नियत।
Judicial Service: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| मामला | गुजरात हाई कोर्ट जिला न्यायाधीश भर्ती परीक्षा 2024-25 |
| विवाद | 113 विज्ञापित पदों में से एक भी सीट न भरा जाना; लिखित परीक्षा में पास उम्मीदवारों को इंटरव्यू (Viva-Voce) में फेल करना |
| हाईकोर्ट का नतीजा | 9 जुलाई 2026 को जारी अंतिम परिणाम में किसी भी उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ |

