मुख्य भाषण के प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- न्याय, कानून और करुणा का संतुलन:न्यायाधीश की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:“अन्य न्यायाधीशों की तरह, मेरे सामने भी ऐसी स्थितियाँ आईं जब कानून एक न्यायसंगत परिणाम सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं था और न्याय से अलग थलग दिखाई देता था। ऐसी परिस्थितियों में, मैंने योग्य याचिकाकर्ताओं के लिए कानून को न्याय की ओर नम्रता से मोड़ने का प्रयास किया। ऐसा करने में सक्षम होना मेरे लिए एक आशीर्वाद रहा है।”
- ‘अच्छे बनाम महान’ जज की बहस:जस्टिस उपाध्याय ने कहा कि उनका प्रयास हमेशा एक “अच्छा जज” बनने का रहा है, चाहे वह “महान जज” न भी बन पाए हों। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुख्य न्यायाधीश केवल “समान सहयोगियों में प्रथम” (First among equals) होता है।
- दिल्ली हाईकोर्ट की तुलना ‘भारतीय थाली’ से:उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों की तुलना में दिल्ली के छोटे भौगोलिक क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को संभालना काफी जटिल है, क्योंकि यहाँ आने वाले मामलों की प्रकृति अद्वितीय है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता का उदाहरण देते हुए कहा:“भारत को अक्सर संस्कृतियों का ‘मेल्टिंग पॉट’ या ‘सलाद बाउल’ कहा जाता है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि भारत एक थाली की तरह है जिसमें एक ही प्लेट पर अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं। मैं इससे सहमत हूँ और मुझे दिल्ली हाईकोर्ट भी एक ‘भारतीय थाली’ की तरह लगता है।”
- ऑस्कर वाइल्ड के कथन से समापन:भाषण का अंत हल्के-फुल्के अंदाज में करते हुए उन्होंने ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) की पंक्तियाँ उद्धृत कीं:“कुछ लोग जहाँ भी जाते हैं खुशी लाते हैं; अन्य जब भी जाते हैं खुशी लाते हैं। मुझे नहीं पता कि मुझे किस श्रेणी में रखा जाएगा, इसका उत्तर आने वाली पीढ़ी (Posterity) देगी।”
नई दिल्ली: न्यायशास्त्र के मानवीय व करुणामयी दृष्टिकोण, कानून के कठोर अक्षरों (Letters of Law) बनाम वास्तविक न्याय की आत्मा (Spirit of Justice) के संतुलन, और मुख्य न्यायाधीश की संस्थागत भूमिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय (Justice D.K. Upadhyaya) ने अपने विदाई संदर्भ (Farewell Reference) में विचार व्यक्त किए हैं।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का विदाई समारोह
दिल्ली उच्च न्यायालय में उनके सम्मान में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति उपाध्याय ने रेखांकित किया कि मुख्य न्यायाधीश केवल “समानों में प्रथम” (First Among Equals) होता है। उन्होंने न्यायिक निर्णय प्रक्रिया (Judging) को कानून, न्याय और करुणा (Compassion) को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे कई मौके आए जब कानून और न्याय अलग-थलग दिखाई दिए, और वहां उन्होंने जरूरतमंद व हकदार वादियों के हित में कानून को न्याय की दिशा में लचीला बनाने का यत्न किया। न्यायमूर्ति उपाध्याय को हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है।
विदाई संबोधन के प्रमुख विचार एवं न्यायिक दृष्टिकोण
1. ‘हकदार वादियों के लिए कानून को न्याय की ओर हौले से मोड़ने का प्रयास’ न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय ने कानून की तकनीकी सीमाओं और वास्तविक न्याय के अंतर्संबंध पर अनुभव साझा करते हुए कहा: “अन्य न्यायाधीशों की तरह, मेरे सामने भी ऐसी कई परिस्थितियां आईं जब कानून एक न्यायपूर्ण परिणाम (Just Outcome) सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं था और वह न्याय से पूरी तरह अलग-थलग दिखाई पड़ता था। ऐसी संवेदनशील स्थितियों में, मैंने हकदार वादियों (Deserving Litigants) के लिए कानून को न्याय की ओर हौले से मोड़ने (Softly bend the law towards justice) का प्रयास किया। ऐसा करने में सक्षम होना मेरे लिए एक सच्चा विधिक आशीर्वाद रहा है।”
2. ‘अच्छा जज बनने का प्रयास रहा, महान नहीं’:
- न्यायिक बिरादरी में चलने वाली ‘अच्छे बनाम महान न्यायाधीश’ की बहस पर आत्ममंथन करते हुए उन्होंने विनम्रतापूर्वक टिप्पणी की:“मेरा निरंतर यह प्रयास रहा है कि मैं एक अच्छा न्यायाधीश (Good Judge) बन सकूं, भले ही मैं एक महान न्यायाधीश (Great Judge) न बन पाऊं।”
3. दिल्ली उच्च न्यायालय एक ‘विविध व्यंजनों से सजी भारतीय थाली’:
- न्यायमूर्ति उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश (इलाहाबाद हाईकोर्ट) और महाराष्ट्र (बॉम्बे हाईकोर्ट) में अपने पूर्व के न्यायिक अनुभवों की तुलना दिल्ली से की।
- उन्होंने कहा कि दिल्ली भले ही भौगोलिक दृष्टि से छोटा क्षेत्र है, परंतु दिल्ली उच्च न्यायालय का प्रबंधन और यहां आने वाले मुकदमों की जटिलता अभूतपूर्व है:“भारत को अक्सर संस्कृतियों का ‘मेल्टिंग पॉट’ या ‘सलाद बाउल’ कहा जाता है। कुछ लोग कहते हैं कि भारत एक थाली की तरह है जिसमें एक ही पटल पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे जाते हैं। मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ और मेरे लिए दिल्ली उच्च न्यायालय विभिन्न विधिक धाराओं से सजी एक संपूर्ण ‘भारतीय थाली’ (Indian Thali) की तरह है। मुझे घर जैसा महसूस कराने के लिए मैं आप सभी का आभारी हूँ।”
4. ऑस्कर वाइल्ड का उद्धरण और हल्का-फुल्का विदाई संदेश: अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने महान साहित्यकार ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) की प्रसिद्ध पंक्ति को उद्धृत करते हुए कहा:“कुछ लोग जहां भी जाते हैं, वहां खुशियां लाते हैं; और कुछ लोग जब भी वहां से जाते हैं, तब खुशियां लाते हैं (Some cause happiness wherever they go; others whenever they go)। मुझे नहीं पता कि मुझे किस श्रेणी में रखा जाएगा, परंतु इसका सटीक उत्तर भविष्य और आने वाली पीढ़ियों (Posterity) के पास ही सुरक्षित है।”
न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय का न्यायिक सफरनामा
- इलाहाबाद बार से शुरुआत:
- 16 जून 1965 को जन्मे न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1991 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में वकालत शुरू की। उन्होंने मुख्य रूप से सिविल और संवैधानिक मामलों की पैरवी की।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में पदोन्नति (2011):
- 21 नवंबर 2011 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और अगस्त 2013 में वे स्थायी न्यायाधीश बने।
- बॉम्बे और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश:
- जुलाई 2023 में उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- तत्पश्चात, उनका स्थानांतरण दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ, जहां उन्होंने कई संवैधानिक, वाणिज्यिक और जनहित से जुड़े ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की।
- सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति (अक्टूबर 2026):
- मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय को 5 अक्टूबर 2026 को गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह के साथ देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court of India) के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
Justice Speech:विदाई सभा का संदर्भ
- आयोजन: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल रेफरेंस (Full-Court Farewell Reference)
- तिथि: 6 अक्टूबर 2026
- उपस्थिति:
- दिल्ली उच्च न्यायालय के सभी साथी न्यायाधीशगण
- भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा
- दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के पदाधिकारी एवं वरिष्ठ व युवा अधिवक्तागण

